अर्नब चक्रवात: लोगों से सतर्क रहने की सलाह, कहां-कहां होगा असर?

-लक्कोजु श्रीनिवास
आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने कहा है कि पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात अर्नब बेहद गंभीर चक्रवाती तूफ़ान में बदल गया है.
प्राधिकरण के एमडी प्रखर जैन ने बताया कि चक्रवात अर्नब 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है. मंगलवार सुबह तूफ़ान विशाखापट्टनम से 300 किलोमीटर, काकीनाडा से 360 किलोमीटर, मछलीपट्टनम से 460 किलोमीटर और बापटला से 530 किलोमीटर दूर केंद्रित था.
तूफ़ान मंगलवार शाम तक पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ता रहेगा. जैन ने बताया कि चक्रवात के बुधवार सुबह यानम के पास बापटला और विशाखापट्टनम के बीच तट से टकराने की आशंका है.
उन्होंने कहा कि चक्रवात अर्नब के असर से मंगलवार और बुधवार को पूरे राज्य में व्यापक बारिश होगी. कुछ जगहों पर बहुत भारी बारिश होने का भी अनुमान है.
उन्होंने चेतावनी दी कि तटीय इलाकों में 90 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी. लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी मंगलवार तड़के तीन बजे चक्रवात अर्नब की स्थिति को लेकर बुलेटिन जारी किया था. विभाग ने कहा कि तूफान बहुत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया है. तट से टकराते समय इसकी फ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे रहने का अनुमान है.
आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों और ओडिशा के दक्षिणी तटीय क्षेत्रों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है.
फिलहाल चक्रवात बंगाल की खाड़ी के पूर्व-मध्य हिस्से में विशाखापत्तनम से लगभग 610 किलोमीटर दूर स्थित है. यह पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है.
अनुमान है कि यह बहुत गंभीर चक्रवाती तूफ़ान में बदल सकता है. इसके 28 अक्तूबर की सुबह तक बापटला और विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश और यानम के तट से टकराने की आशंका है. इस दौरान हवा की रफ़्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटे तक रह सकती है.
अर्नब तूफ़ान का कितना असर होगा?
इसका असर किन-किन इलाक़ों पर पड़ेगा?
हवाओं की रफ़्तार कितनी होगी?
लोगों को क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, इन मुद्दों पर विशाखापट्टनम तूफ़ान चेतावनी केंद्र और आंध्र यूनिवर्सिटी के मौसम विभाग से बीबीसी तेलुगू ने बात की.
भारी नुकसान की आशंका
बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवात अर्नब मज़बूत हो गया है, जिसके कारण आंध्र प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है.
विशाखापत्तनम चक्रवात चेतावनी केंद्र ने बताया है कि इस महीने की 27 और 28 तारीख़ को तटीय आंध्र प्रदेश (कोस्तांधरा) में अत्यधिक भारी बारिश और 140 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है.
मौसम विभाग ने 28 अक्तूबर को 12 जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. सोमवार को रायलसीमा के जिलों में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है.
अर्नब चक्रवात के प्रभाव से डॉक्टर बी.आर. आंबेडकर कोणसीमा जिले के अल्लावरम मंडल स्थित ओडालारेवु समुद्र में लहरों का उफान बढ़ गया है. आंध्र प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि वहां तटीय इलाके में भारी कटाव हो रहा है, इसलिए स्थानीय लोग अनिवार्य रूप से सतर्कता और सावधानियां बरतें.
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक प्रखर जैन ने अपील की है कि राज्य भर के लोग अगले तीन दिनों तक सतर्क रहें.
इसके अलावा, इस चक्रवात का प्रभाव ओडिशा राज्य पर भी पड़ेगा, जिसके चलते वहां के कई जिलों में शिक्षण संस्थानों (स्कूलों/कॉलेजों) में छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं. मौसम विभाग के अनुसार ओडिशा के गंजाम, गजपति, रायगढ़ा, कोरापुट और मलकनगिरि जिलों में 28 और 29 अक्तूबर को चक्रवात का असर रहेगा.
ख़तरे की चेतावनी
चक्रवात (तूफान) के प्रभाव से 28 अक्तूबर को विशाखापत्तनम, अल्लूरी सीताराम राजू, अनाकापल्ली, काकीनाडा, डॉक्टर बी.आर. आंबेडकर कोणसीमा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिम गोदावरी, एलुरु, एन.टी.आर., कृष्णा, गुंटूर और बापटला जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में भारी बारिश होने की संभावना है.
वहीं 27 अक्तूबर को काकीनाडा, आंबेडकर कोणसीमा, पूर्वी गोदावरी, पश्चिम गोदावरी और एलुरु जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है.
रेड अलर्ट का मतलब है अत्यंत गंभीर मौसम स्थितियों के प्रति अधिकारियों और जनता को तुरंत आवश्यक कार्रवाई और सुरक्षा उपाय करने की चेतावनी देना.
मौसम विभाग ने सलाह दी है कि:
मछुआरे किसी भी हाल में समुद्र में न जाएं. 27 और 28 तारीख को आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों पर मछुआरों के समुद्र में जाने पर पूरी तरह रोक रहेगी.
तटीय और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए तथा आम जनता पूरी तरह सतर्क रहे.
अधिकारियों को चक्रवात प्रभावित तटीय क्षेत्रों में आवश्यक एहतियाती कदम उठाने और निचले इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं.
गंभीर स्थिति का संकेत
आंध्र यूनिवर्सिटी के मौसम विज्ञान विभाग के प्रोफेसर रामकृष्ण ने बीबीसी को बताया कि 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं अत्यंत गंभीर चक्रवाती स्थिति का संकेत देती हैं.
उन्होंने कहा कि इसकी तुलना सामान्य रूप से चलने वाली तेज हवाओं से नहीं की जा सकती, क्योंकि इसमें पेड़ उखड़ने, बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त होने और घरों की छतें उड़ने जैसे हादसों की संभावना बहुत अधिक होती है.
उन्होंने बताया कि अर्नब चक्रवात के दौरान हवा की गति 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी, जो कभी-कभी बढ़कर 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. प्रोफेसर रामकृष्ण ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक अनुमान है और चक्रवात की दिशा तथा तीव्रता के आधार पर इसमें बदलाव हो सकता.
प्रोफ़ेसर रामकृष्ण ने बताया कि आंध्र प्रदेश, ख़ासकर उत्तरी तटीय इलाक़े में, पहले भी इस स्तर की तेज़ हवाएं चल चुकी हैं. उन्होंने याद दिलाया कि 2014 में आए हुदहुद और 2018 में आए तितली तूफ़ान के दौरान तेज़ हवाएं चली थीं.
उन्होंने कहा, इन तूफ़ानों के तट से टकराने के दौरान हवा की अधिकतम रफ़्तार लगभग 150 से 185 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी. इससे पेड़ों, इमारतों और बिजली व्यवस्था को भारी नुक़सान हुआ था.
सावधान रहने की अपील
बंगाल की खाड़ी में चक्रवात की आशंका के मद्देनज़र आपदा प्रबंधन और गृह मंत्री अनिता ने राज्य के प्रशासन को सतर्क रहने का निर्देश दिया है.
उन्होंने लोगों से अगले पांच दिनों तक बेहद सावधान रहने की अपील की. मंत्री ने कहा कि आज से धीरे-धीरे बारिश शुरू होने और मंगलवार-बुधवार को तटीय आंध्र प्रदेश के ज़िलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका है.
उन्होंने चक्रवात से प्रभावित होने वाले ज़िलों के कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों (एसपी) और ज़मीनी स्तर पर तैनात अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए.
कौन-कौन देश देते हैं चक्रवातों के नाम?
एशिया और प्रशांत क्षेत्र के लिए संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक आयोग (ईएससीएपी) और विश्व मौसम संगठन (डब्लूएमओ) ने साल 2000 में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले चक्रवातों को नाम देने की पद्धति शुरू की.
इसके तहत बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे देशों के एक समूह ने बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में उठने वाले चक्रवातों के लिए 13 नामों की एक सूची सौंपी.
2018 में इन देशों के पैनल में ईरान, क़तर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन का नाम भी जुड़ गया. इस पैनल का काम चक्रवातों के नाम तय करना है.
इन देशों की ओर से सुझाए गए नाम देश के नाम की वर्णमाला के हिसाब से सूचीबद्ध किए जाते हैं. इस सूची की शुरुआत बांग्लादेश से होती है.
फिर इसके बाद इसमें भारत, ईरान, मालदीव, ओमान, पाकिस्तान का नाम आता है.
इस क्रम के हिसाब से ही चक्रवातों के नाम रखे जाते हैं. 2020 में आए चक्रवात निवार के बाद जिन चक्रवातों के नाम सुनाई पड़ने वाले हैं वो हैं बुरेवी (मालदीव), तौकते (म्यांमार), यास (ओमान) और गुलाब (पाकिस्तान).
अप्रैल 2020 में इन नामों वाली नई सूची सदस्य देशों की ओर से मंजूर की गई है.
चक्रवात के नाम रखने के पीछे मक़सद
पूरी दुनिया में क्षेत्रवार छह विशेष मौसम केंद्र और पांच चक्रवात चेतावनी केंद्र हैं. इन केंद्रों का काम चक्रवात से संबंधित दिशा-निर्देश जारी करना और उनके नाम रखना है.
छह विशेष मौसम केंद्रों में से एक भारतीय मौसम विभाग भी है जो चक्रवात और आंधी को लेकर एडवाइज़री जारी करता है.
नई दिल्ली स्थित इस केंद्र का काम उत्तर हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का नामकरण करना भी है. उत्तर हिंद महासागर के तहत ही बंगाल की खाड़ी और अरब सागर आते हैं.
चक्रवातों के नाम रखने की वजह से वैज्ञानिक समुदाय, आपदा प्रबंधकों, मीडिया और आम लोगों में हर चक्रवात को अलग-अलग पहचानने में मदद मिलती है. इससे जागरूकता फैलाने में भी आसानी होती है.
क्षेत्र में एक ही वक़्त पर दो चक्रवात आने की स्थिति में कोई उलझन नहीं पैदा होती है.
किस चक्रवात की बात हो रही है इसे आसानी से याद किया जा सकता है. चक्रवात से संबंधी चेतावनी को बड़े पैमाने पर लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलती है.
इसलिए अलग-अलग महासागरीय क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नामकरण उस क्षेत्र में मौजूद विशेष मौसम केंद्र या चक्रवात चेतावनी केंद्र करते हैं.
मस्कट में साल 2000 में ईएससीएपी और डब्लूएमओ के 27वें सम्मेलन के बाद चक्रवातों के नाम रखने को लेकर सैद्धांतिक तौर पर रज़ामंदी हुई है और साल 2004 के सितंबर महीने से सदस्य देशों के बीच लंबे विमर्श के बाद इसकी शुरुआत हुई.
उस वक़्त सूची में आठ देशों की ओर से सुझाए गए नाम शामिल थे. इस सूची में अब तक इस्तेमाल हुए लगभग सभी नाम थे सिर्फ़ आख़िरी अम्फन को छोड़कर.
2018 में ईएससीएपी और डब्लूएमओ के 45वें सम्मेलन में चक्रवातों के नाम वाली नई सूची तैयार की गई. इसमें पाँच नए सदस्य देशों के भी सुझाए गए नाम शामिल किए गए थे.
ये देश थे ईरान, क़तर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन.
इसके बाद कुल 13 सदस्य हो गए थे. इस सम्मेलन में भारतीय मौसम विभाग के डॉक्टर मृत्युंजय मोहापात्रा को विभिन्न सदस्य देशों के बीच समन्वय स्थापित करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई ताकि सभी तय मापदंडों का पालन करते हुए चक्रवातों का नामकरण किया जा सके.
उनकी तैयार की गई रिपोर्ट को म्यांमार में हुए 46वें सम्मेलन में पेश किया गया और फिर उस पर विचार-विमर्श करने के बाद अप्रैल 2020 को मंज़ूर किया गया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.(bbc.com/hindi)

