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दिल्ली हाईकोर्ट ने शरजील इमाम की PhD रिसर्च याचिका पर तिहाड़ जेल और दिल्ली पुलिस से चार हफ्ते में जवाब मांगा

नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को जेएनयू स्कॉलर और 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले के आरोपी शरजील इमाम की याचिका पर तिहाड़ जेल प्रशासन और दिल्ली पुलिस से चार हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। जस्टिस संजीव नरूला की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर तय की है।

इमाम ने याचिका में अपनी पीएचडी रिसर्च जारी रखने के लिए वकीलों के जरिए पेन ड्राइव में मौजूद शोध सामग्री लेने और जेल के अंदर उपलब्ध कंप्यूटर का इस्तेमाल करने की अनुमति मांगी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे जेल में वाई-फाई या इंटरनेट कनेक्शन नहीं मांग रहे हैं। प्रस्ताव यह है कि सामग्री को इंटरनेट रहित कंप्यूटर पर अपलोड कर जेल स्टाफ की निगरानी में इस्तेमाल किया जाए।

इमाम की ओर से पेश हुए वकील अहमद इब्राहिम ने अदालत को बताया कि इमाम जनवरी 2020 से हिरासत में हैं और गिरफ्तारी के समय वे पीएचडी के अंतिम वर्ष में थे। उनका शोध सार यूजीसी और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय द्वारा स्वीकृत हो चुका है। पेन ड्राइव में करीब 2132 फाइलें हैं, जिनमें शोध आलेख, किताबें और अभिलेखीय रिकॉर्ड के स्क्रीनशॉट शामिल हैं। यह सामग्री भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित नहीं बताई गई है।

याचिका के अनुसार, अप्रैल 2026 में ट्रायल कोर्ट ने जेल अधीक्षक को इसी तरह के अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया था। तत्कालीन अधीक्षक ने पेन ड्राइव देने की अनुमति दे दी थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद नए अधीक्षक ने अदालत के विशेष आदेश के बिना अनुमति देने से इनकार कर दिया। जुलाई 2026 में कड़कड़डूमा कोर्ट ने मामले को जेल अधीक्षक के विवेक पर छोड़ दिया था।

सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस के विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि राज्य ने ट्रायल कोर्ट में भी इस याचिका का विरोध नहीं किया था। उन्होंने कहा कि अगर आरोपी उस सामग्री को दिखाएं जिसे वे एक्सेस करना चाहते हैं तो निगरानी में अनुमति दी जा सकती है। इमाम 2020 के दिल्ली दंगा साजिश मामले में यूएपीए समेत अन्य धाराओं के तहत आरोपी हैं।

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