माहवारी पर झिझक की दीवार तोड़ डा.किरण बेटियों को सिखा रहीं स्वस्थ रहने का मंत्र
राजनांदगांव: राजनांदगांव: महावारी कोई बीमारी नहीं, बल्कि किशोरियों के जीवन में होने वाली एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है। इसके बावजूद सामाजिक झिझक, अधूरी जानकारी और पुरानी भ्रांतियों के कारण कई बार बेटियां अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात नहीं कर पातीं। इस संकोच को दूर करने और किशोरियों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगांव में पदस्थ आयुष मेडिकल आफिसर डा. किरण गायकवाड़ लगातार छात्राओं का मार्गदर्शन कर रही हैं। उनकी पहल का उद्देश्य बेटियों को सही जानकारी देकर उनमें आत्मविश्वास बढ़ाना और मासिक धर्म से जुड़े विषयों पर सकारात्मक संवाद को प्रोत्साहित करना है।
डा. किरण छात्राओं को मासिक धर्म की प्राकृतिक प्रक्रिया के बारे में विस्तार से समझा रही हैं। वे महावारी के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने, सैनिटरी पैड का सुरक्षित उपयोग करने और उसे निर्धारित अंतराल पर बदलने के महत्व की जानकारी दे रही हैं। इसके साथ ही इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड के उचित निपटान और स्वच्छता संबंधी आदतों को दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। छात्राओं को संतुलित आहार और बेहतर स्वास्थ्य देखभाल के बारे में भी बताया जा रहा है, ताकि वे किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक बदलावों को समझ सकें और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकें।
परेशानी होने पर विशेषज्ञ से लें सलाह
डा. गायकवाड़ छात्राओं को समझा रही हैं कि महावारी एक सामान्य प्रक्रिया है और इसे लेकर शर्म या संकोच करने की जरूरत नहीं है। मासिक धर्म के दौरान होने वाली किसी भी असामान्य परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। डा. गायकवाड़ ने माहवारी से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने के लिए परिवार और समाज में खुलकर बातचीत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कई मासूमों को मिली नई जिंदगी
आयुष मेडिकल आफिसर डा. किरण वर्ष 2017 से लगातार बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण और गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए कार्य कर रही हैं। उनके प्रयासों से कई बच्चों को निश्शुल्क उपचार के साथ नया जीवन मिला है। सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और छात्रावासों में पहुंचकर बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण करती हैं। वे किशोरी बालिकाओं को माहवारी, व्यक्तिगत स्वच्छता और संतुलित व पौष्टिक आहार के महत्व के प्रति जागरूक करती हैं। साथ ही बच्चों को स्वच्छता अपनाने और खानपान की गलत आदतों से होने वाली बीमारियों के प्रति भी सचेत करती हैं। उनके प्रयासों से अब तक जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित सात बच्चों, मोतियाबिंद से ग्रसित पांच बच्चों, आंखों की विकृति वाले तीन बच्चों, कटे-फटे होंठ वाले दो बच्चों, मुंह के टेढ़ेपन से प्रभावित दो बच्चों, मुड़े हुए पैर वाले तीन बच्चों और किडनी की विकृति से पीड़ित दो बच्चों का सफल आपरेशन करा चुकी है।
