छत्तीसगढ़

कोल लेवी घोटाला: EOW ने 9,500 पन्नों का पूरक चालान किया पेश, 12 नए आरोपी शामिल

रायपुर, 5 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले की जांच कर रही आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने विशेष अदालत में करीब 9,500 पन्नों का छठा पूरक अभियोग पत्र (चार्जशीट) पेश किया है। पूरक चालान में 12 नए आरोपियों को शामिल किया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि मामले में अवैध वसूली, राशि के वितरण और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन के संबंध में महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए हैं।

EOW के अनुसार, मामले की जांच भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 420, 384, 467, 468, 471, 109 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत की जा रही है। एजेंसी ने आरोपियों की भूमिका को लेकर विस्तृत विवरण अदालत के समक्ष रखा है।

कोयला परिवहन पर 25 रुपये प्रति टन अवैध वसूली का आरोप

जांच एजेंसी के मुताबिक वर्ष 2020 में कोयला परिवहन से जुड़े कारोबारियों और ट्रांसपोर्टरों से 25 रुपये प्रति टन की दर से कथित अवैध वसूली की व्यवस्था बनाई गई थी। आरोप है कि 15 जुलाई 2020 को जारी एक आदेश के बाद ऑनलाइन ई-परमिट जारी करने से पहले जिला खनिज अधिकारी की अनुमति अनिवार्य कर दी गई थी।

EOW का दावा है कि इस व्यवस्था का उपयोग परिवहन परमिट जारी करने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने और उसके बदले रकम वसूलने के लिए किया गया। जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि विभिन्न जिलों से एकत्र की गई राशि रायपुर पहुंचाई जाती थी, जहां उसका लेखा-जोखा रखकर आगे वितरण किया जाता था।

जांच एजेंसी ने बताया कि जब्त किए गए डिजिटल साक्ष्यों में 15 जुलाई 2020 के आदेश का मसौदा, विश्राम गृह बुकिंग से जुड़े दस्तावेज, कुछ औद्योगिक इकाइयों के ई-मेल और खनिज विभाग को लिखे गए पत्र शामिल हैं, जिन्हें महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया है।

आयरन पैलेट परिवहन पर 100 रुपये प्रति टन लेवी का भी दावा

EOW के पूरक अभियोग पत्र में कोयले के अलावा आयरन पैलेट परिवहन से भी कथित अवैध वसूली का उल्लेख किया गया है। एजेंसी के अनुसार, दिसंबर 2021 में इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया गया था और जनवरी 2022 से सड़क एवं रेल मार्ग से परिवहन के लिए नई व्यवस्था लागू की गई।

चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि कुछ उद्योगपतियों के साथ बैठकों के माध्यम से आयरन पैलेट परिवहन पर 100 रुपये प्रति टन की कथित लेवी व्यवस्था बनाई गई। जांच एजेंसी इस पूरी प्रक्रिया को अवैध वसूली तंत्र का हिस्सा मान रही है।

रामगोपाल अग्रवाल से जुड़ी 104.20 करोड़ रुपये की एंट्रियों का उल्लेख

पूरक चालान में कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल का भी उल्लेख किया गया है। EOW के अनुसार, जब्त की गई एक डायरी में ‘भवन’ और ‘सी पार्टी’ नाम से कुल 32 प्रविष्टियां दर्ज मिली हैं, जिनका संबंध 104.20 करोड़ रुपये की राशि से बताया गया है।

जांच एजेंसी का दावा है कि इन प्रविष्टियों से संबंधित रकम को राजनीतिक गतिविधियों और अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने के संकेत मिले हैं। अभियोग पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ संपत्ति सौदों में रजिस्ट्री में दर्ज रकम से अधिक नकद भुगतान किए जाने और परिवार से जुड़ी कंपनियों के नाम पर निवेश किए जाने के संबंध में जांच की गई है।

12 आरोपियों के खिलाफ पूरक चालान

EOW द्वारा दाखिल छठे पूरक चालान में कुल 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें राजनीतिक पदाधिकारी, कारोबारी और अन्य संबंधित व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि आरोपियों की भूमिका जब्त दस्तावेजों, डायरी प्रविष्टियों, डिजिटल साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर जांची गई है।

मामले की सुनवाई विशेष अदालत में जारी है। आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा सभी पक्षों को सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के बाद किया जाएगा।

मनोज तिवारी

पारंपरिक परिवार से आते हैं। घर में पूजा-पाठ, बड़ों का सम्मान और सादा रहन-सहन रहा। उन्होंने जीवन में धैर्य और संयम सीखा। उन्हें मंदिर के प्रांगण में बैठना, गंगा किनारे की यादें और पुराने रिश्तों को जीवित रखना अच्छा लगता है। वे कम शब्दों में बात करते हैं, लेकिन बात पूरी होती है।

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