छत्तीसगढ़

सहमति से बने संबंधों को रिश्ता खत्म होने के बाद रेप नहीं कह सकते: सुप्रीम कोर्ट

-आदर्श शर्मा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर को असफल रिश्तों को आपराधिक मामलों में बदलने की बढ़ती प्रवृत्ति के प्रति आगाह किया. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंधों को केवल इसलिए बलात्कार नहीं कहा जा सकता क्योंकि रिश्ता टूट गया है. जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर महादेवन की बेंच ने केरल के एक व्यक्ति को बलात्कार और धोखाधड़ी के आरोपों से बरी करते हुए ये टिप्पणियां कीं.

कोर्ट ने कहा, किसी रिश्ते के दौरान हुई शारीरिक अंतरंगता को बाद में केवल इसलिए बलात्कार नहीं करार दिया जा सकता क्योंकि रिश्ता खराब हो गया और अब कायम नहीं है. बेंच ने कहा, क्या यह कहा जा सकता है कि पुरुष को रिश्ते से निकलने का कोई अधिकार नहीं है? क्या इस फैसले को छल या धोखाधड़ी कहा जा सकता है? बिल्कुल नहीं.

कोर्ट ने आगे कहा कि बलात्कार एक गंभीर अपराध है और इसका इस्तेमाल केवल वास्तविक यौन हिंसा, जबरदस्ती या धोखा देकर सहमति हासिल करने से जुड़े मामलों में ही किया जाना चाहिए. कोर्ट ने कहा, जब सहमति से बने हर रिश्ते के बिगड़ने पर उसे बलात्कार के आरोप में बदल दिया जाता है, तो इससे कथित अपराध की गंभीरता कम हो जाती है.(dw.com/hi)

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