INDIA ब्लॉक की बैठक में CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के मुद्दे पर गहरे मतभेद, कांग्रेस के कई प्रस्ताव सहयोगियों को मंजूर नहीं

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अभियान चला रहे विपक्षी INDIA ब्लॉक के अंदर इस मुद्दे पर गंभीर मतभेद सामने आए हैं। बुधवार को हुई 19 दलों की बैठक में सार्वजनिक रूप से एकजुटता का प्रदर्शन किया गया, लेकिन बैठक के दौरान कम से कम पांच प्रमुख बिंदुओं पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के बीच स्पष्ट मतभेद रहे।
बैठक का आयोजन विशेष रूप से चुनाव आयोग के अंदर कथित मतभेदों, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े आरोपों के मद्देनजर किया गया था। भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराने का खुलासा हुआ था। विपक्ष इसे CEC ज्ञानेश कुमार द्वारा आयोग को एकतरफा चलाने का प्रमाण बता रहा है।
महाभियोग प्रस्ताव पर असहमति
बैठक में सीपीआई नेता पी. संदोष कुमार ने सुझाव दिया कि CEC को हटाने के लिए संसद में नया महाभियोग प्रस्ताव लाया जाए और इसमें गैर-INDIA ब्लॉक विपक्षी दलों का भी सहयोग लिया जाए। हालांकि कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पहले के ऐसे प्रयास असफल हो चुके हैं।
मार्च 2026 में INDIA ब्लॉक के 193 सांसदों ने पहला नोटिस दिया था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने खारिज कर दिया था। अप्रैल में राज्यसभा में 73 सांसदों का दूसरा नोटिस अभी भी लंबित है।
कांग्रेस वर्किंग कमिटी के प्रस्तावों को जगह नहीं मिली
बैठक से एक दिन पहले कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग की थी। साथ ही SIR को तुरंत रोकने और हटाए गए 13 करोड़ से अधिक नामों को बहाल करने की बात कही गई थी। INDIA ब्लॉक के घोषित एक्शन प्लान में ये मांगें शामिल नहीं की गईं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने का मुद्दा भी उठाया था। हालांकि कुछ रिपोर्टों में ब्लॉक ने बैलेट पेपर की मांग का उल्लेख किया, लेकिन यह कांग्रेस के मूल प्रस्ताव जितना प्रमुख नहीं रहा।
सीजेपी और अन्य संगठनों को शामिल करने पर मतभेद
शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (एसपी) समेत कुछ सहयोगी दल चाहते थे कि अभियान में गैर-INDIA ब्लॉक दलों के साथ-साथ एनजीओ और युवा संगठनों को भी शामिल किया जाए। उद्धव ठाकरे की पार्टी और शरद पवार गुट ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) जैसे युवा समूहों के समर्थन की बात कही। कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप रही।
कुछ दलों ने अलग-अलग स्तर पर आंदोलन चलाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि तालमेल के बिना मुहिम कमजोर पड़ेगी। शिवसेना (यूबीटी) ने मुंबई में सीजेपी के कार्यक्रम का समर्थन करने का ऐलान किया था।
सार्वजनिक एकजुटता बनाम आंतरिक मतभेद
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, ममता बनर्जी और अन्य नेताओं ने CEC के तत्काल इस्तीफे, SIR रोकने, पुरानी मतदाता सूची के इस्तेमाल और लोकतंत्र बचाने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान किया। 2 से 8 अक्टूबर तक जिला स्तर पर ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ और 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च की योजना बनाई गई।
डीएमके और आम आदमी पार्टी ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया, हालांकि दोनों ने CEC को हटाने के संसदीय कदम का समर्थन करने की बात कही है। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव भी राजस्थान सभा नामांकन के कारण अनुपस्थित रहे।
चुनाव आयोग का कहना है कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए और आंतरिक आपत्तियां विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं। भाजपा ने विपक्ष के आरोपों को चुनावी हार के बाद का निराशा भरा हमला बताया है।
विपक्ष का यह अभियान CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ तीसरे महाभियोग प्रयास की तैयारी के साथ चल रहा है। मामले की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत दोनों सदनों में विशेष बहुमत और राष्ट्रपति के आदेश की जरूरत होती है।



