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दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय क्षमता 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने का प्लान, 2030 तक कुल क्षमता 12.5 करोड़ यात्रियों से ऊपर

नई दिल्ली: देश के सबसे व्यस्त इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट की अंतरराष्ट्रीय यात्री क्षमता अगले चार वर्षों में 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की तैयारी है। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) टर्मिनल-3 पर नया अंतरराष्ट्रीय पियर-ई जोड़ने और टर्मिनल-1 में सीमित आंतरिक बदलाव का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। इन कदमों से एयरपोर्ट की कुल वार्षिक क्षमता मौजूदा 10.4 करोड़ यात्रियों से बढ़कर 2030 की शुरुआत तक 12.5 करोड़ से अधिक हो सकती है।

फिलहाल पूरी क्षमता तीन टर्मिनलों में बंटी है। टर्मिनल-1 की क्षमता करीब 4 करोड़, टर्मिनल-2 की 1.4 करोड़ और टर्मिनल-3 की 5 करोड़ यात्री प्रति वर्ष है। टर्मिनल-3 में लगभग 3 करोड़ अंतरराष्ट्रीय और 2 करोड़ घरेलू यात्रियों की क्षमता है।

नए पियर-ई से बढ़ेगी अंतरराष्ट्रीय क्षमता

प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय पियर-ई की क्षमता करीब 1.6 करोड़ यात्री प्रति वर्ष बताई गई है। इसके जुड़ने के बाद टर्मिनल-3 की कुल क्षमता 6.6 करोड़ यात्री प्रति वर्ष हो सकती है, जिसमें 4.6 करोड़ अंतरराष्ट्रीय और 2 करोड़ घरेलू यात्री शामिल होंगे। यानी अंतरराष्ट्रीय क्षमता मौजूदा स्तर से 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ने का अनुमान है।

टर्मिनल-1 पर कोई बड़ा ढांचागत बदलाव नहीं किया जाएगा। डायल चेक-इन और सुरक्षा जांच काउंटर बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है, जिससे इसकी क्षमता 4 करोड़ से बढ़कर 4.5 करोड़ यात्री प्रति वर्ष हो सकती है। घरेलू क्षमता में यह बढ़ोतरी सीमित रहेगी। मीटिंग में शामिल लोगों के अनुसार, डायल ने बताया कि घरेलू क्षमता पहले से करीब 8 करोड़ यात्री प्रति वर्ष के आसपास है।

अनुमानित खर्च और मंजूरी की समयसीमा

stakeholders के साथ 16 अगस्त को हुई सलाह बैठक में डायल ने 10 वर्षीय मास्टर प्लान का ब्योरा साझा किया। बैठक में शामिल लोगों के मुताबिक, नए पियर-ई पर करीब 2,000 करोड़ रुपये और टर्मिनल-1 के बदलावों पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान दिया गया।

यह प्लान इस महीने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को भेजा जाना है। मंत्रालय अन्य एजेंसियों से राय लेने के बाद मार्च तक, जरूरत पड़ने पर बदलावों के साथ, मंजूरी दे सकता है। काम शुरू होने के बाद पूरा होने में करीब तीन वर्ष लगने का अनुमान है। नियमों के तहत एयरपोर्ट का मास्टर प्लान हर दशक में एक बार तैयार किया जाता है।

टर्मिनल-2 और आगे की योजना

टर्मिनल-2 फिलहाल कुछ वर्षों तक चलता रहेगा। ग्रेटर नोएडा में दूसरे एयरपोर्ट के यात्री प्रभाव को देखते हुए, मांग के आधार पर अगले दशक में इसे हटाकर बड़े टर्मिनल-4 के लिए जगह बनाई जा सकती है। अभी तक यह दीर्घकालिक योजना है और तत्काल निष्पादन का हिस्सा नहीं है।

कुल मिलाकर अगले चार वर्षों में सबसे बड़ा इजाफा अंतरराष्ट्रीय क्षमता में होगा। घरेलू तरफ बढ़ोतरी मुख्य रूप से काउंटर और आंतरिक व्यवस्था तक सीमित रहेगी, जिससे पीक घंटों में भीड़ कुछ हद तक कम होने की उम्मीद है।

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