धोखेबाजों को उलझाने एआई का इस्तेमाल, 3.5 लाख बॉट वक़्त बर्बाद कर रहे ठगों का

छत्तीसगढ़ न्यूज़ डेस्क
साइबर ठगी से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया की टेक्नोलॉजी कंपनी अपेटे (अपेटे एआई) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल कर रही है। कंपनी ने ऐसे एआई बॉट तैयार किए हैं, जो संभावित शिकार बनकर ठगों के फोन और संदेशों का जवाब देते हैं। उनका मकसद ठगों को ज्यादा से ज्यादा समय तक बातचीत में उलझाए रखना और उनके कामकाज से जुड़ी जानकारी जुटाना है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डाली काफार के मुताबिक, उसके नेटवर्क में करीब 3.5 लाख बॉट हैं।
कंपनी का दावा है कि इन बॉट के जरिए ठगों से जुड़ी 2.5 लाख से अधिक जानकारियां जुटाई जा चुकी हैं। इनमें संदिग्ध वेबसाइटों के पते, बैंक खातों और ठगी में इस्तेमाल होने वाले खातों की जानकारी शामिल है। कुछ बातचीत 2 घंटे से अधिक समय तक चलने की बात भी सामने आई है। इस दौरान बॉट ठगों के तरीके समझने और उनके नेटवर्क से जुड़े सुराग जुटाने की कोशिश करते हैं।
कंपनी के अनुसार, ऑस्ट्रेलियाई दूरसंचार कंपनी टीपीजी के साथ एक परियोजना के तहत 2025 के आखिर में 6 सप्ताह के दौरान उसके बॉट ने ठगी से जुड़ी करीब 6 लाख कॉल संभालीं। अपेटे का अनुमान है कि इससे ठगों के 500 से अधिक दिन बर्बाद हुए और संभावित रूप से 1.3 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के नुकसान को टाला जा सका। हालांकि, बचत की यह राशि कंपनी का अनुमान है, स्वतंत्र रूप से प्रमाणित आंकड़ा नहीं।
ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय एंटी-स्कैम केंद्र की 2025 की रिपोर्ट में भी टीपीजी और अपेटे की इस पहल का उल्लेख है। हालांकि, उसमें अलग अवधि और आकलन के आधार पर 2.8 लाख से अधिक कॉल रोकने तथा 76 लाख ऑस्ट्रेलियाई डॉलर से अधिक के संभावित नुकसान को टालने का अनुमान दिया गया है। इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही अवधि का परिणाम नहीं माना जाना चाहिए।
इस तकनीक का उद्देश्य ठगी को पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि ठगों का समय बर्बाद करने के साथ ऐसी जानकारियां जुटाना है, जिनका इस्तेमाल बैंक और दूरसंचार कंपनियां संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने तथा धोखाधड़ी रोकने में कर सकें।



