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डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली मांग पर CEA ने कमेटी बनाई, ग्रिड स्थिरता की होगी जांच

देश के महानगरों और कई राज्यों में तेजी से बढ़ रहे डेटा सेंटरों की बिजली मांग बिजली व्यवस्था और ग्रिड स्थिरता के लिए चिंता का विषय बन गई है। इस स्थिति को देखते हुए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने एक विशेष कमेटी गठित की है।

कमेटी डेटा सेंटरों के संचालन, नीति और नियामक पहलुओं की जांच करेगी तथा इन सुविधाओं के बिजली ग्रिड पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करेगी। कमेटी में नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर (NLDC), नैसकॉम और सेंट्रल ट्रांसमिशन यूटिलिटी ऑफ इंडिया (CTUIL) सहित संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हैं। कमेटी पहले ही कई बैठकें कर चुकी है और ग्रिड-इंडिया ने इस विषय पर तकनीकी नोट भी सौंपा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में डेटा सेंटरों की स्थापित बिजली क्षमता 2020 में 375 मेगावाट से बढ़कर अब लगभग 1,575 मेगावाट हो गई है। CEA का अनुमान है कि 2031-32 तक डेटा सेंटरों से बिजली की मांग करीब 17 गीगावाट तक पहुंच सकती है। फिलहाल ये केंद्र मुख्य रूप से मुंबई, नवी मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, दिल्ली-एनसीआर और जामनगर में केंद्रित हैं, लेकिन आंध्र प्रदेश से पश्चिम बंगाल तक अन्य राज्यों में भी तेजी से फैल रहे हैं।

डेटा सेंटर 24 घंटे लगातार उच्च बिजली लोड रखते हैं। पश्चिम बंगाल में न्यू टाउन और राजरहाट के आसपास आने वाले वर्षों में 200-300 एमवीए का बड़ा लोड अनुमानित है। ओडिशा ने बड़े पैमाने पर बाजार से बिजली खरीद के कारण ग्रिड पर परिचालन संबंधी चुनौतियों की बात भी उठाई है।

कमेटी इन मुद्दों का विस्तृत अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट CEA की नेशनल पावर कमेटी को सौंपेगी। इसका उद्देश्य डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग को ग्रिड स्थिरता के साथ संतुलित करना और भविष्य की बिजली योजना को बेहतर बनाना है।

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