‘छत्तीसगढ़’ का संपादकीय : अमरीकी वोटरों ने ट्रम्प के मुंह पर जूता तो मारा ही, उसके पहले थूक भी दिया…

अमरीकी मध्यावधि चुनावों के नतीजे राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प को पूरी तरह खारिज करने वाले हैं। एक विश्लेषक ने इन नतीजों को अमरीका में आई हुई ब्ल्यूनामी कहा है। वहां ब्ल्यू रंग डेमोक्रेटिक पार्टी का है, और इन चुनावी नतीजों में उसकी सुनामी सी आई है जिसने ट्रम्प की फूटी कौड़ी की साख को और चौपट कर दिया है। ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ने इन चुनावों से संसद के दोनों सदनों का नियंत्रण खोने के बाद, ढेर सारे राज्यों का शासन खोने के बाद अब नुकसान की गिनती छोड़ दी है, और 2028 के उस राष्ट्रपति चुनाव के लिए उम्मीदवार पर ध्यान केन्द्रित कर रही है जिसे लडऩे के लिए ट्रम्प संविधान के खिलाफ जाकर भी आमादा है। ट्रम्प ने इन मध्यावधि चुनावों को अपने नाम पर लड़ा था, और सार्वजनिक रूप से बार-बार कहा था कि लोग रिपब्लिकन उम्मीदवारों को यह मानकर वोट डालें कि वे ट्रम्प के लिए वोट डाल रहे हैं। वोटरों ने ट्रम्प को निकाल फेंका।
ट्रम्प अपने पिछले राष्ट्रपति चुनाव के समय से इन दो बरसों में जिन-जिन तबकों के खिलाफ मुहिम चलाए हुए था, उन सभी का सफाया हो गया। जिन तबकों से ट्रम्प नफरत करता था, जिन्हें आतंकी कहता था, अमरीका की छाती पर गंदा बोझ कहता था, ऐसे सारे लोग ट्रम्प का मुंह चिढ़ाने के लिए संसद पहुंच गए, राज्यों की विधानसभाओं में पहुंच गए, और गवर्नर (भारत के मुख्यमंत्री की तरह शासन प्रमुख, लेकिन मतदाताओं से राष्ट्रपतीय प्रणाली के तहत सीधे निर्वाचित) बन गए। कुछ ऐसे राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी के गवर्नर बने हैं जहां यह पार्टी दशकों से कभी जीती नहीं थी। यह सुनामी, या अधिक अच्छा होगा उसे ब्ल्यूनामी कहना, इतनी विशाल और रिपब्लिकन पार्टी के लिए इतनी विकराल है कि उसे इस कॉलम में बांधना मुमकिन नहीं है। लेकिन कुछ टुकड़ा-टुकड़ा बातों को देखा जा सकता है। निशिगन के संसदीय सीट के डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैय्यद इस चुनाव में ट्रम्प के सबसे अधिक निशाने पर थे जिन्हें ट्रम्प बार-बार आतंकी, जेहादी, और जाने क्या-क्या कह रहा था, और बार-बार कह रहा था कि इसके जीतने पर संसद में घुसने के पहले इसे मेटल डिटेक्टर से गुजरना पड़ेगा (मानो वह कोई हथियार लेकर घुसने वाला हो)। इसे हराने के लिए ट्रम्प ने अमरीकी इतिहास का सबसे भयानक इस्लामोफोबिया फैलाया। इसके बावजूद न सिर्फ यह उम्मीदवार डंके की चोट पर शानदार तरीके से जीता, बल्कि दूसरे मुस्लिम उम्मीदवार, फिलीस्तीनी, और अफ्रीकी मूल के उम्मीदवार जीतकर आए जिन्हें ट्रम्प अमरीका की छाती पर गंदगी का ढेर कहता था।
अभी हम यहां पर जीत और हार के आंकड़े देना नहीं चाहते, वे किसी लेख में बेहतर तरीके से दिए जाएंगे, लेकिन हम उन मुद्दों को लेकर बात करना चाहते हैं जिन पर ट्रम्प को यह शर्मिंदगी झेलनी पड़ी है। ट्रम्प की हलकटपने और नीचता की तमाम बातों के बावजूद उसे राष्ट्रपति चुनाव तो अमरीकी जनता ने जिता दिया था, लेकिन उसके बाद से उसने अमरीका को जिस तरह ईरान के साथ जंग में उलझा दिया, वह एक सबसे बड़ा मुद्दा इस चुनाव में रहा। हालत यह है कि ईरान पर हमला करके ट्रम्प ने पूरी दुनिया को जिस आर्थिक संकट में डाल दिया है, उससे अगर पूरी दुनिया में एक जनमत संग्रह करवाया जाए तो ट्रम्प की जमानत जब्त हो जाएगी। अमरीकी जनता के पास राष्ट्रपति चुनने के बाद यह पहला मौका था जब वह अपनी निराशा और नाराजगी जाहिर कर सकती थी, और उसने बड़े बुलंद अंदाज में यह किया है। हालत यह है कि कल अमरीकी उपराष्ट्रपति जे.डी.वांस ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि पार्टी मध्यावधि चुनाव ईरान-युद्ध के कारण हारी है। और साथ-साथ यह भी कहा कि राष्ट्रपति ने भी यह बात मान ली है। कुछ घंटों के भीतर ट्रम्प के बेटे ने उपराष्ट्रपति की इस पोस्ट को दुबारा पोस्ट करते हुए इससे अपनी पूरी सहमति जाहिर की। इसी ईरान-युद्ध के चलते हुए इजराइल में ट्रम्प की पहली पसंद नेतन्याहू का गठबंधन पूरी तरह से चुनाव खो बैठा, और सत्ता के बाहर होने की राह पर है। इस तरह एक ईरान में तो ये दोनों बड़ी ताकतें मिलकर न सिर्फ युद्ध हार चुकी हैं, बल्कि जंग छिडऩे वाले ये दोनों जंगखोर नेता अपने-अपने देश में शर्मनाक चुनावी शिकस्त भी झेल चुके हैं।
अमरीका के उच्च सदन के इतिहास में पहली बार एक मुस्लिम निर्वाचित होकर पहुंच रहा है जिसे ट्रम्प ने आतंकी करार दिया था। लोगों को याद होगा कि अमरीका की अघोषित राजधानी न्यूयॉर्क के मेयर के चुनाव को ट्रम्प ने अपने चुनाव की तरह पेश किया था, और वहां के लोगों ने एक भारतवंशी मुस्लिम जोहरान ममदानी को शानदार तरीके से चुना था, और ट्रम्प को, उसके पूरे एजेंडा को, उसके चुनावी मुद्दों को सबको खारिज कर दिया था। अब मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद इस चुनाव में अमरीकी इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक चंदा देने वाले एलन मस्क ने खुद होकर यह पोस्ट किया है कि ऐसा लगता है कि उसकी ताकत काम नहीं आई। उसने करीब 366 मिलियन डॉलर (35 सौ करोड़ रूपए) ट्रम्प की पार्टी पर खर्च किए थे। एक पिछले डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि अमरीकी जनता ने लोगों को बांटने वाली राजनीति को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी का साथ देने वाले वोटरों ने भी इस बार डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का साथ दिया है। ट्रम्प और उनके युद्ध-मंत्री जिस तरह काले लोगों से नफरत करते हैं, उन्हें इससे सदमा पहुंचा होगा कि अभी पहली बार अमरीका में एक काली महिला एक राज्य की गवर्नर बनी है। इजराइल के पिट्ठू की तरह काम करने वाले ट्रम्प को इससे भी सदमा पहुंचेगा कि गाजा में घायलों की सर्जरी के लिए जाने जाने वाले मिस्र मूल के एक डॉक्टर ने संसद का चुनाव जीत लिया है। भारतवंशी उम्मीदवार डेमोक्रेटिक पार्टी से जीतते चले गए हैं, और ट्रम्प के एकदम करीबी विवेक रामास्वामी गवर्नर का चुनाव एक ऐसी महिला से हार गए हैं जिसके खिलाफ उन्होंने एक बहुत ही घटिया वीडियो बनाकर टीवी पर इश्तहार करवाया था। मोटेतौर पर यह कहा जा सकता है कि जो ट्रम्प से जितने अधिक जुड़े हुए थे, वे उतने ही अधिक खारिज हुए।

