छत्तीसगढ़

जीएसटी व्यवस्था सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने के प्रयास व्यापारिक समुदाय के लिए स्वागतयोग्य-चेंबर

ओपी का जताया आभार

रायपुर, 16 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रदेशाध्यक्ष थौरानी ने बताया कि उनके नेतृत्व में चेम्बर के प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढशासन के वित्त, वाणिज्यिक कर (जीएसटी), आवास एवं पर्यावरण मंत्री श्री ओ. पी. चैधरी जी से भेंट कर 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में व्यापारियों, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) तथा व्यावसायिक समुदाय के हित में लिए गए निर्णयों के लिए आभार व्यक्त किया और धन्यवाद ज्ञापन सौंपा।

श्री थौरानी ने बताया कि ज्ञापन में 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में व्यापारिक समुदाय की समस्याओं एवं अपेक्षाओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने और जीएसटी 2.0 सुधारों के माध्यम से कारोबारियों को राहत दिलाने के प्रयासों की सराहना की गई। चेम्बर ने कहा कि जीएसटी की जटिल प्रक्रियाओं, अनुपालन संबंधी कठिनाइयों और व्यावहारिक समस्याओं को दूर करने के लिए प्रक्रियाओं का सरलीकरण आवश्यक है। इस दिशा में किए गए सुधार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सुदृढ़ करने में सहायक होंगे।

श्री थौरानी ने बताया कि अंतरराज्यीय मार्गों पर मालवाहक वाहनों को बार-बार रोकने के बजाय उद्गम एवं गंतव्य पर जांच की व्यवस्था तथा ज्वाइंट कमिश्नर स्तर के पूर्व अनुमोदन के बिना वाहनों को नहीं रोकने संबंधी प्रावधानों से माल की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने, परिवहन समय घटाने और आपूर्ति शृंखला की दक्षता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसी प्रकार, कर्मचारियों के स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ढ्ढञ्जष्ट) की स्वीकृति, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर के अंतर्गत इनपुट सर्विसेज पर रिफंड तथा प्लांट एवं मशीनरी से संबंधित मासिक रिफंड जैसे प्रावधानों को उद्योगों की कार्यशील पूंजी मजबूत करने की दिशा में उपयोगी बताया गया। चेम्बर के अनुसार, इन उपायों से वित्तीय तरलता में सुधार होगा और उद्योगों के विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा।

श्रीथौरानी ने यह भी बताया कि वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चैधरी ने व्यापारियों एवं एमएसएमई वर्ग के हितों को प्रभावी ढंग से रखने में सराहनीय भूमिका निभाई है। जीएसटी व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने के लिए किए जा रहे प्रयास व्यापारिक समुदाय के लिए स्वागतयोग्य हैं। अभियोजन की सीमा में वृद्धि, दंड एवं नोटिस संबंधी प्रक्रियाओं का सरलीकरण और माल परिवहन में अनावश्यक बाधाओं को दूर करने जैसे कदम कारोबारियों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करेंगे।

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