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Fact Check: क्या SBI समेत सभी बैंक अब हफ्ते में सिर्फ 5 दिन खुलेंगे? जानें वायरल सर्कुलर का पूरा सच और मौजूदा नियम

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक कथित सरकारी लेटर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) सहित देश के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों में अब हफ्ते में सिर्फ 5 दिन काम होगा और सभी शनिवार को बैंक पूरी तरह बंद रहेंगे। इस दावे ने आम बैंक ग्राहकों और कर्मचारियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।

अगर आप भी इस वायरल मैसेज को सच मानकर अपनी बैंक शाखा जाने का प्लान बना रहे हैं, तो रुकिए। हमारी विस्तृत पड़ताल में यह दावा पूरी तरह से भ्रामक और असत्यापित साबित हुआ है। केंद्र सरकार या भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से 5-डे वर्क वीक को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

क्विक फैक्ट चेक (Takeaway): बैंक यूनियनों और IBA के बीच 5-डे बैंकिंग पर सहमति जरूर बनी है, लेकिन इसे लागू करने के लिए वित्त मंत्रालय (DFS) और केंद्र सरकार की अंतिम मंजूरी व नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत गजट नोटिफिकेशन अनिवार्य है, जो अभी तक जारी नहीं हुआ है।

वायरल मैसेज में क्या दावा किया जा रहा है?

व्हाट्सएप, फेसबुक और एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पत्र का स्क्रीनशॉट साझा किया जा रहा है। इसमें दावा किया गया है कि वित्त मंत्रालय ने बैंक कर्मचारियों के लिए 5 कार्य दिवस प्रति सप्ताह (5-Day Work Week) के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है और आगामी महीने की पहली तारीख से सभी शनिवार और रविवार को बैंक बंद रहेंगे। कई यूजर्स इसे आधिकारिक आदेश मानकर शेयर कर रहे हैं।

पड़ताल में क्या निकला? जानें मामले का असली सच

इस वायरल दावे की सच्चाई जानने के लिए जब वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (DFS), भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के आधिकारिक सर्कुलर्स की जांच की गई, तो सामने आया कि सरकार की तरफ से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है।

1. IBA और यूनियन का प्रस्ताव क्या था?

मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बीच 12वें द्विपक्षीय वेतन समझौते (12th Bipartite Settlement) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते में दोनों पक्षों ने सभी शनिवार को अवकाश घोषित करने की सिफारिश पर सहमति जताई थी। इसके बदले में बैंक कर्मचारियों के दैनिक कार्य समय में 40 मिनट की अतिरिक्त बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया था।

2. प्रस्ताव को लागू करने की कानूनी प्रक्रिया क्या है?

बैंकों के कार्य दिवसों और छुट्टियों में बदलाव केवल यूनियन या IBA के स्तर पर तय नहीं हो सकता। इसके लिए कानूनी प्रक्रिया अनिवार्य है:

  • वित्त मंत्रालय की मंजूरी: सबसे पहले वित्तीय सेवा विभाग (DFS) को इस प्रस्ताव को अपनी प्रशासनिक स्वीकृति देनी होती है।
  • नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट: केंद्र सरकार को ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881’ की धारा 25 के तहत आधिकारिक गजट अधिसूचना (Gazette Notification) जारी करनी होती है।
  • RBI का दिशा-निर्देश: सरकारी अधिसूचना के बाद आरबीआई बैंकों और क्लियरिंग हाउस (RTGS, NEFT, चेक ट्रंकेशन) के संचालन के लिए संशोधित दिशानिर्देश जारी करता है।

मौजूदा स्थिति यह है कि यह प्रस्ताव अभी भी सरकार के विचाराधीन है और इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है।

वर्तमान में क्या है बैंकों के खुलने का नियम?

जब तक सरकार आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं करती, तब तक देश के सभी बैंकों में वर्ष 2015 से लागू नियम ही प्रभावी रहेगा।

दिन शाखा की स्थिति डिजिटल सेवाएं (UPI, NetBanking, ATM)
पहला शनिवार खुला रहेगा (सामान्य कार्य दिवस) चालू
दूसरा शनिवार बंद (आधिकारिक अवकाश) चालू
तीसरा शनिवार खुला रहेगा (सामान्य कार्य दिवस) चालू
चौथा शनिवार बंद (आधिकारिक अवकाश) चालू
पांचवां शनिवार (यदि महीने में हो) खुला रहेगा (सामान्य कार्य दिवस) चालू
प्रत्येक रविवार बंद (साप्ताहिक अवकाश) चालू

ग्राहकों पर इसका क्या असर होगा?

ग्राहकों को किसी भी सोशल मीडिया मैसेज पर भरोसा करके बैंक शाखा जाने का कार्यक्रम तय नहीं करना चाहिए। वर्तमान में बैंक केवल दूसरे और चौथे शनिवार को ही बंद रहते हैं। यदि महीने में पांच शनिवार पड़ते हैं, तो पहले, तीसरे और पांचवें शनिवार को सामान्य दिनों की तरह बैंक शाखाओं में काम-काज जारी रहेगा।

इसके अलावा, शाखाएं बंद रहने पर भी एटीएम (ATM), इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई (UPI) सेवाएं 24×7 बिना किसी रुकावट के काम करती रहेंगी। किसी भी आधिकारिक बदलाव की जानकारी के लिए हमेशा अपनी बैंक शाखा या RBI की आधिकारिक वेबसाइट (rbi.org.in) पर ही भरोसा करें।

निष्कर्ष

सोशल मीडिया पर सभी शनिवार को बैंकों के बंद रहने का दावा करने वाला सर्कुलर पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक है। 5-डे बैंकिंग का प्रस्ताव जरूर विचाराधीन है, लेकिन केंद्र सरकार ने इस पर कोई अंतिम मुहर नहीं लगाई है। फिलहाल बैंक अपने तय पुराने रोस्टर के अनुसार ही खुलेंगे।

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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