कावेरी बीज कंपनी के कार्यालय घेराव से पहले किसान नेता गिरफ्तार

महासमुंद से ट्रेक्टर रैली लेकर रायपुर आ रहे थे
किसानों एवं मजदूरों का साढ़े चार करोड़ रुपये से अधिक का मूल भुगतान बकाया, ब्याज सहित छह करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि का दावा
महासमुंद/ रायपुर, 23 अक्टूबर। बीज कंपनी के खिलाफ प्रदर्शन के लिए महासमुंद से रायपुर रवाना होने से पहले ही किसान नेताओं को गिरफ्तार किया गया।ये लोग कावेरी सीड्स कंपनी द्वारा बीज उत्पादन कराने के बाद किसानों एवं मजदूरों का भुगतान नहीं किया है। इसके विरोध में ही भारतीय किसान यूनियन ने राजधानी में प्रदर्शन की घोषणा की थी।
इसके तहत प्रभावित किसान एवं मजदूर ट्रैक्टर-ट्रालियों तथा अन्य साधनों से महासमुंद से रायपुर के लिए रवाना होने इकट्ठा हो रहे थे।
किसान नेता एवं जिला पंचायत सदस्य जागेश्वर जुगनू चंद्राकर ने बताया कि कावेरी सीड्स कंपनी लिमिटेड के छत्तीसगढ़ क्षेत्रीय प्रबंधक राजकुमार रेड्डी के मार्गदर्शन में कंपनी के माध्यम से रबी सीजन 2024-25 में किसानों के खेत लीज (रेग) पर लेकर बीज उत्पादन कराया गया था। लेकिन किसानों एवं मजदूरों को अब तक उनकी मेहनत और उत्पादन का भुगतान नहीं किया गया है।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सात जिलों के 176 किसानों का कुल 4 करोड़ 62 लाख 29 हजार 866 रुपये भुगतान लंबित है। इनमें अकेले महासमुंद जिले के 85 किसान शामिल हैं। इसके अतिरिक्त मजदूरों की 7 लाख 89 हजार 500 रुपये की मजदूरी भी बकाया है। इस प्रकार किसानों एवं मजदूरों का कुल मूल बकाया 4 करोड़ 70 लाख 19 हजार 366 रुपये है। यूनियन के अनुसार जुलाई 2025 से अक्टूबर 2026 तक 15 महीने की अवधि के लिए 2 प्रतिशत मासिक ब्याज जोड़ने पर कुल बकाया राशि लगभग 6 करोड़ 11 लाख 25 हजार 175 रुपये हो गई है।
यूनियन छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही ने बताया कि किसानों मजदूरों द्वारा शासन-प्रशासन से भुगतान प्रदान कराने हेतु आवेदन निवेदन किया जा चुका है परंतु अभी तक भुगतान नहीं मिलने से परेशान होकर सभी किसान मजदूर परिवार द्वारा 20 फरवरी 2026 को भी किसान रायपुर के लिए निकल रहे थे जिन्हे बेलसोण्डा के पास से प्रशासन ने भुगतान कराने का आश्वासन के साथ किसानों को मना लिये थे परंतु भुगतान अभी तक नहीं हुआ है।
तेजराम विद्रोही ने सवाल उठाया कि ज़ब कावेरी बीज कंपनी बीज उत्पादन कार्य के लिए स्थानीय स्तर पर मासिक वेतन पर मुंशी रखते थे जिन्हे छै महीने का भुगतान नहीं किया था उन्हें बाद में तीन महीने की भुगतान के साथ समझौता किया और छै मुंशियों को एक लाख अस्सी हजार रुपये का भुगतान किया है परंतु मुंशियों द्वारा काम कराये मजदूरों का भुगतान नहीं किया गया तथा जिन किसानों के खेत में बीज उत्पादन कराया उन किसानों को भुगतान न देकर कंपनी उनका आर्थिक व मानसिक शोषण क्यों कर रही है। कंपनी के विरुद्ध कार्यवाही करने के बजाय आंदोलनकारी किसानों को नजरबंद करना कॉर्पोरेट परस्त सरकार की किसान विरोधी, लोकतंत्र विरोधी चेहरे को बेनक़ाब करती है।


