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सूखत घपले की चपेट में घुमका सहकारी समिति वेतन अटका

राजनांदगांव: घुमका सहकारी समिति के प्रबंधक, कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिल रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण प्रतिवर्ष धान खरीदी में हो रहा नुकसान है। कोचियों से सांठगांठ, सूखत के चलते मार्कफेड से मिलने वाला कमीशन काट लिया जा रहा है। इससे समिति नुकसान में चल रही है। अंश धारक किसानों को तो इससे क्षति हो ही रही है कर्मचारियों के वेतन के लिए भी समिति के पास पैसे नहीं बच रहे हैं। दूसरी ओर ईपीएफ भुगतान में गड़बड़ी के चलते भी समिति का बैंक खाता भी होल्ड पर है। इन सभी मामलों के चलते बीते दिनों घुमका सोसायटी में कर्मचारियों ने तालाबंदी कर दी। शनिवार को इस मामले को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इंटरनेट मीडिया में उठाया, जिससे बाद यह तेजी से चर्चा में आया है।

पिछले 10 दिनों से घुमका सहकारी समिति में तालाबंदी है। यही समिति शासकीय उचित मूल्य के दुकान का भी संचालन करती है जिससे राशन वितरण भी ठप पड़ा है। इस घटनाक्रम से ग्रामीणों में और किसानों में आक्रोश है। इधर कर्मचारियों का कहना है कि बिना वेतन के उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है। घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है। वे समिति को हो रहे नुकसान और बैंक खाता बंद होने के चलते भुगतान न मिलने की बात कह रहे हैं। बता दें कि घुमका सहकारी समिति जिले की संवेदनशील समितियों में शामिल हैं जहां हर वर्ष बड़ी मात्रा में सूखत पाया जाता है। पिछले वर्ष जिला प्रशासन की टीम ने यहां सैकड़ों क्विंटल धान खपाने के प्रयासों का भंडाफोड़ किया था। जिसके बाद प्राधिकृत अधिकारी नोहर सिन्हा को बर्खास्त किया गया था।

इस मामले को लेकर केंद्रीय सहकारी बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुधीर सोनी ने कहा कि, सोमवार से सहकारी समिति और शासकीय उचित मूल्य की दुकान का संचालन पूर्ववत होगा। प्रबंधक-कर्मचारियों से चर्चा कर ली गई है। बैंक खाते को दोबारा शुरु करने के लिए ईपीएफ का भुगतान भी किया जा रहा है।

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