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हिसार की बेटी रीना भट्टी ने रचा इतिहास, 7355 मीटर ऊंची ‘अबी गामिन’ चोटी को किया फतह

हिसार: जिले के बालक गांव की बेटी और विख्यात पर्वतारोही हिमपुत्री रीना भट्टी ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर ली है। रीना भट्टी ने हाल ही में 7355 मीटर ऊंचे अबी गामिन टेक्निकल पीक को सफलतापूर्वक फतह कर तिरंगा फहराया है। इस अभियान में उन्होंने सिविलियन टीम लीडर की भूमिका निभाई और कठिन परिस्थितियों के बीच अपने अदम्य साहस का परिचय दिया।

अभियान की मुख्य झलकियां:

  • 23 दिन के कठिन अभियान के बाद बनीं पहली भारतीय सिविलियन महिला पर्वतारोही।
  • अबी गामिन टेक्निकल पीक पर तिरंगा फहराकर रचा नया इतिहास।
  • कैंप-3 से कैंप-5 तक पांच दिन तक नहीं मिला पर्याप्त भोजन और पानी।

अबी गामिन चोटी का परिचय और संयुक्त अभियान

माउंट कामेट और अबी गामिन उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित हिमालय की दुर्गम चोटियों में शामिल हैं तथा उत्तर-पूर्व में स्थित हैं। इसकी ऊंचाई करीब 7355 मीटर है। रीना भट्टी के अनुसार, यह अभियान आईटीबीपी, भारतीय सेना एवं अर्जेंटीना का संयुक्त तथा आरटी और सिविलियन के मिशन के रूप में आयोजित किया गया था।

सिविलियन टीम की अकेली महिला सदस्य और नेतृत्व

अभियान में सिविलियन टीम के 12 सदस्य शामिल थे, जिनमें रीना भट्टी अकेली महिला सदस्य थीं। उन्होंने सिविलियन टीम की अगुवाई करते हुए बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में चोटी तक पहुंचकर सफलता हासिल की। रीना की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने एक स्वतंत्र सिविलियन पर्वतारोही के रूप में इस तकनीकी चोटी को फतह करने वाली पहली भारतीय महिला होने का गौरव हासिल किया है। उनका यह अभियान 23 दिनों तक चला।

कठिन चढ़ाई और संघर्ष की पूरी कहानी

बेस कैंप की ओर कठिन चढ़ाई के दौरान उन्होंने करीब 9 से 11 घंटे लगातार प्रतिदिन पैदल चलकर दूरी तय की। अबी गामिन अभियान के दौरान रीना भट्टी को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, कैंप-3 से कैंप-5 तक करीब पांच दिन तक पर्याप्त भोजन उपलब्ध नहीं हो सका। कई घंटों तक पानी की भी भारी कमी रही। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कठिन चढ़ाई जारी रखते हुए लक्ष्य हासिल किया।

पहले भी बना चुकी हैं कई बड़े रिकॉर्ड

रीना भट्टी ने अबी गामिन टेक्निकल पीक को फतह कर जीत का खिताब अपने नाम किया है। इससे पहले भी वह माउंट एवरेस्ट और माउंट ल्होत्से पर 20 घंटे 50 मिनट के अभियान में तिरंगा फहराने की पहली भारतीय महिला बनने की उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं। रीना के अनुसार, अब तक वह 23 पर्वत चोटियों को फतह कर चुकी हैं।

बालक गांव की बेटी का संघर्ष

हिमपुत्री रीना भट्टी मूल रूप से जिले के बालक गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता ट्रैक्टर मैकेनिक हैं। परिवार में दो भाई और एक बड़ी बहन हैं। मां के निधन के बाद रीना को जीवन में गहरा आघात लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मुश्किल दौर से उबरकर उन्होंने अपने हौसले को मजबूत किया और पर्वतारोहण के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयां हासिल करती चली गईं। अबी गामिन की दुर्गम चोटी पर सफलता उनकी इसी जिजीविषा, साहस और संघर्ष की नई मिसाल है।

पंकज कुमार वर्मा

एक शांत और सोचने वाले इंसान हैं। घर का माहौल सादगी भरा रहा। वे सुबह जल्दी उठते हैं, अखबार पलटते हैं और दिन भर देखी गई बातों को याद रखते हैं। दोस्तों के साथ बैठक, लंबी सैर और पुरानी फिल्में देखना उनका शौक है। वे दिखावे से दूर रहते हैं और बात को उसके असली रूप में रखना पसंद करते हैं।

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