देश
दिल्ली की अदालत का ऐतिहासिक फैसला: जज ने 7 साल की बच्ची को लिखी भावुक चिट्ठी, दोषी को मरते दम तक उम्रकैद

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने 7 साल की बच्ची से यौन दुष्कर्म के मामले में एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने पूरे देश का दिल छू लिया है। अदालत ने न सिर्फ दोषी को उसकी अंतिम सांस तक (नैचुरल लाइफ) जेल में रहने की सजा सुनाई, बल्कि महिला जज ने पीड़िता को एक बेहद भावुक और संवेदनशील चिट्ठी लिखकर उसे न्याय का भरोसा भी दिलाया।
बच्ची ने की थी यह मार्मिक मांग
दरअसल, सुनवाई के दौरान 7 वर्षीय मासूम ने अदालत से एक विशेष गुहार लगाई थी। बच्ची ने कहा था कि उसके साथ दरिंदगी करने वाले ‘अंकल’ को तब तक जेल में ही रखा जाए, जब तक वह बूढ़ा न हो जाए। बच्ची की इस मासूम लेकिन दर्दनाक मांग ने अदालत में मौजूद सभी लोगों को झकझोर कर रख दिया।
जज ने पूरी की बच्ची की मांग, लिखी भावुक चिट्ठी
बच्ची की इस मांग का संज्ञान लेते हुए, महिला जज ने दोषी को उसके स्वाभाविक जीवनकाल (नैचुरल लाइफ) के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इतना ही नहीं, न्याय सुनाने के साथ जज ने बच्ची के नाम एक संदेश (चिट्ठी) भी लिखा। जज ने अपनी चिट्ठी में बच्ची को आश्वस्त करते हुए लिखा, “तुम्हारे साथ बुरा काम करने वाला वह इंसान अब एक आजाद इंसान के रूप में कभी सूरज नहीं देख पाएगा।”
न्यायपालिका की संवेदनशीलता का उदाहरण
अदालत का यह फैसला कानूनी प्रक्रिया में संवेदनशीलता और बाल मनोविज्ञान को समझने का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है। यह फैसला न केवल बाल यौन शोषण जैसे जघन्य अपराधों को अंजाम देने वालों के मन में खौफ पैदा करेगा, बल्कि पीड़ितों और उनके परिवारों का देश की न्याय व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत करेगा।



