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महापौर मधु डॉ. रमन की आड़ में कब तक निजी स्वार्थ साधेंगे : ओस्तवाल

राजनांदगांव :- शहर कांग्रेस के पूर्व महामंत्री एवं पूर्व पार्षद हेमंत ओस्तवाल ने एक पत्र के माध्यम् से छ.ग. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और राजनांदगांव के विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी से यह जानना चाहा है कि राजनांदगांव जिले की भोली भाली जनता को आखिर कब तक गुमराह करते रहोगे? जो बैठक आपके रायपुर निवास में रेल्वे के अधिकारी जिला कलेक्टर और महापौर मधुसूदन यादव के साथ जो बैठक कर रेल्वे के अधिकारियों को समीक्षा बैठक बुलाकर समस्याओं का निराकरण करने की जो नई कार्य योजना मोतीपुर रेल्वे फाटक से गौरीनगर, स्टेशन पारा के अंडर ब्रिज पूर्ण किये जाने के संबंध में जो बैठक हुई उसमें ऐसा लगता है कि एक जवाबदार शहर के विधायक और महापौर को यह अनुभव नही है कि रेल्वे से संबंधित विकास कार्य की योजना को लेकर सांसद संतोष पाण्डेय रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव से अनेकों बार मिल चुके है जो कार्य सांसद का है उस कार्य को जिस तरीके से महापौर मधुसूदन यादव की आपसी सांसद की राजनीतिक लड़ाई से राजनांदगांव चिखली, शांतिनगर, स्टेशनपारा, गौरीनगर, पटरी पार आदि के तमाम लोगों को चिखली ओवर ब्रिज और अंडर ब्रिज के मामले में जो परेशानी आये दिन चौबीसो घंटे हो रही है। और दुर्घटनाओं से कितनी मौते हो चुकी है लेकिन जिस जवाबदारी और कत्र्तव्य का निर्वहन निर्वाचित जवाबदार सांसद को करना चाहिये वह पूरी तरह फैलवर है और महापौर मधुसूदन यादव को यह नही भूलना चाहिये कि आपके संसदीय कार्यकाल से लेकर पूर्व सांसद अभिषेक सिंह और वर्तमान सांसद संतोष पाण्डेय के संसदीय वर्तमान दूसरे कार्यकाल मे भी अनवरत् चिखली ओवर ब्रिज, गौरीनगर अंडरब्रिज, मोतीपुर अंडरब्रिज आदि को बनाने की मांग पिछले २० वर्षों से जारी है लेकिन मधुसूदन यादव संासद रहते तत्कालानी कलेक्टर, सिद्धार्थ, कोमल सिंह परदेशी आदि के साथ फोटो खिचवाकर जो दौरा कर जनता को यह आश्वासन देते है कि अब यह अंडरब्रिज आदि तत्काल बन जायेगा। जब प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद  पर रहते हुए डॉ. रमन सिंह जी ने चिखली ओवर ब्रिज, गौरीनगर, मोतीपुर अंडर ब्रिज का निर्माण पॉवरफुल पद में रहते नही हुआ तो अभी होना मुस्किल लग रहा है ? क्योंकि आज छ.ग. प्रदेश की राजनीति में सरगुजा संभाग के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के तुती चल रही है राजनंादगांव जिले की डॉ. रमन सिंह जी की राजनीतिक नींव की पकड़ पहले से काफी कमजोर हो गई है ?  जिसका उदाहरण यह है कि डॉ. रमन सिंह जी की जो जन्म और कर्म भूमि बरसों का तक ठाठापुर और कवर्धा रही है और कवर्धा जिले में पिछले २० वर्षाे के पॉवरफुल मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री रहते डॉ. रमन साहब ने कवर्धा जिले में रेल्वे लाईन नही बिछवा सके यह उसका स्वमेव प्रमाण है और इसलिये कवर्धा क्षेत्र में डॉ. रमन साहब विधायक चुनाव हारने के बाद राजनंादगांव शहर को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बना ली। और राजनांदगांव जिले की भोली-भाली जनता ने लगभग २५ वर्षाे से एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि के तौर पर लगातार भेज रहे है लेकिन अब डॉ. रमन साहब का स्वास्थ्य और उम्र का पड़ाव डॉ. साहब की सहन शक्ति को कमजोर कर दी है? यदि मजबूत हौसले और निर्णय कड़े लिये होते तो डॉ. रमन सिंह जी ने जो गत् दिनों रेल्वे ब्रिज अलीवारा, बरगा, मुसरा आदि की उस लगभग ९४ करोड़ रूपयों के ओवर ब्रिज के भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन निर्माण के मामले में रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव और रेल्वे के अधिकारियों को पत्र लिखकर कार्यवाही हेतु अनुरोध किया था। लेकिन आज ०३ माह से अधिक व्यतीत हो गये है डॉ. रमन साहब और सांसद संतोष पाण्डेय के पत्र को कोई तवज्जों नही दी गई यह उसका सबसे बड़ा प्रमाण है। एवं पूर्व सांसद एवं वर्तमान महापौर मधुसूदन यादव जिस तरह से डॉ. रमन सिंह जी के मुख्यमंत्री कार्यकाल में डॉ.रमन सिंह की पगडंडी बनकर जो प्रशासनिक अधिकारियों पर अपना रूतबा कायम किया था वह समय अब नही है क्योंकि अब इस छ.ग. प्रदेश का रिमोट कंट्रोल दिल्ली और नागपुर आर.एस.एस. शाखा से संचालित होता है ? यदि डॉ. रमन सिंह का रूतबा कायम रहता तो डबल इंजन की सत्ता होने के बावजूद राजनंादगांव शहर सहित जिले की जनता के मूलभूत समस्याओं और विकास कार्यों का निराकरण होता लेकिन नही  हो रहा है। जिसके कारण चिखली, शांतिनगर, स्टेशनपारा आदि वार्ड की जागरूक जनता ने अपने अधिकारो और वार्ड की मूलभूत समस्याओं और अवैध शराब और नशीले पदार्थो एवं चिखली ओवर ब्रिज, गौरीनगर अंडर ब्रिज, मोतीपुर अंडर ब्रिज आदि की समस्याओं को लेकर निर्वाचित ०३ पार्षदों का जो पुतला चिखली होटल देशमुख के सामने धरना प्रदर्शन कर फूंका गया वह राजनांदगांव के इतिहास के पन्नों में काले अध्याय के रूप में अंकित हो गया जिसकी समस्त जवाबदारी निगम के महापौर की बनती है लेकिन महापौर यादव निगम के सब इंजीनियर उप अभियंता, कार्यपालन अभियंता लेखापाल और निगम आयुक्त से बाहर नही आ सके है इसलिये सबसे बड़ी जवाबदारी नगर के प्रथम नागरिक महापौर मधुसूदन यादव की बनती है और अपनी लापरवाही और निजी स्वार्थों को ढकने के लिये पुतला दहन के बाद जिले के कलेक्टर और रेल्वे के अधिकारियों आदि को छ.ग. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी के रायपुर निवास में ले जाकर यह बताना चाह रहें है कि पटरी पार के लोगों का यह आंदोलन कही उग्र रूप पुरे शहर में न ले ले इसलिये बैठक की फोटो समाचारों में प्रकाशित करवाकर यह बता रहें है कि वे पटरी पार के लोगों की समस्याओं को डॉ. रमन साहब के सामने रख दिया हूँ जबकि महापौर में यदि जरा भी नैतिक जवाबदारी समझते और अपने आपसी झगड़ो को छोडक़र सांसद संतोष पाण्डेय को उस बैठक में साथ लेकर तीनों निर्वाचित संासद, विधायक और महापौर चर्चा करके हल निकालते तो राजनांदगांव शहर की जनता को खुशी होती की तीनों जागरूक नेता चिखली वार्ड में ०३ पार्षदों के पुतले फुंकने के बाद पटरी पार के लोगों की समस्या का तत्काल समय सीमा में निराकरण कर काम करने का निर्देश देते लेकिन ऐसा कुछ भी नही हुआ और कही राजनांदगांव शहर और जिले की जनता अब महापौर विधायक और सांसद का पुतला भी  न फुंक दे। इसलिये समय रहते जाग जाओं तो अच्छा है।

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