सरायपाली में वन्यप्राणियों का शिकार बेखौफ! 10 दिनों में तीन घटनाएं, नीलगाय,जंगली सुअर, चौसिंगा के शिकार से बेजुबानों की सुरक्षा और विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल।
विकास नंद/ सर्वव्यापी
सरायपाली वन परिक्षेत्र में वन्यप्राणियों के अवैध शिकार की घटनाएं लगातार सामने आने से वन्यजीवों की सुरक्षा और वन विभाग की गश्त एवं निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। पिछले करीब 10 दिनों में शिकार की चार घटनाएं सामने आने की जानकारी है। नीलगाय से लेकर जंगली सुअर और चौसिंगा तक के अवैध शिकार के मामले सामने आने के बाद वन विभाग की कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं। विभाग ने कुछ मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर वन्यप्राणियों के शिकार पर प्रभावी रोक कब लगेगी?
बेहरापाली में नीलगाय के शिकार पर दो आरोपी गिरफ्तार
जानकारी के अनुसार, बेहरापाली के वन कक्ष क्रमांक 348 में नीलगाय के अवैध शिकार के मामले में वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों को 5 अक्टूबर को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, सरायपाली के समक्ष पेश किया गया, जहां न्यायालय के आदेश पर उन्हें जेल भेज दिया गया।इस कार्रवाई से वन विभाग ने शिकार के मामले में अपनी सक्रियता जरूर दिखाई, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने जंगल और उससे लगे क्षेत्रों में नियमित निगरानी की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जंगली सुअर के शिकार में गिरफ्तारी, कार भी जब्त
दूसरे मामले में जंगली सुअर के अवैध शिकार को लेकर एक आरोपी की गिरफ्तारी और एक कार जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में जांच का दायरा बढ़ाकर यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि शिकार की घटना में कौन-कौन शामिल था और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय है।
हालांकि, मामले से जुड़े कई सवालों पर वन विभाग की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रही है। अधिकारियों की ओर से विवेचना जारी होने की बात कही जा रही है। जांच के नाम पर लंबित सवालों के बीच यह जानना भी जरूरी है कि अब तक क्या-क्या तथ्य सामने आए हैं और आगे की कार्रवाई की दिशा क्या है।
बलौदा क्षेत्र के कोलियादेवरी में भी शिकार का मामला
सरायपाली के बलौदा क्षेत्र अंतर्गत कोलियादेवरी में भी विगत दिनों जंगली सुअर और चौसिंगा के अवैध शिकार का मामला सामने आने की जानकारी है। इस मामले में एक ग्रामीण की गिरफ्तारी की बात कही जा रही है।लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में वन्यप्राणियों के शिकार की घटनाएं सामने आने से वन्यजीव सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त गश्त हो रही है और क्या शिकार की आशंका वाले स्थानों की नियमित निगरानी की जा रही है?
गिरफ्तारी के बाद जमानत, लेकिन शिकार रोकने की चुनौती बरकरार
जंगली सुअर के शिकार से जुड़े मामलों में आरोपियों को न्यायालय से जमानत मिलने की चर्चा भी सामने आ रही है। हालांकि, संबंधित मामलों में जमानत की स्थिति और न्यायालय के आदेशों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। जमानत मिलना अपने आप में आरोपों के निराधार होने का प्रमाण नहीं है, ठीक उसी तरह गिरफ्तारी को भी दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।वन्यप्राणियों के अवैध शिकार पर अंकुश लगाने के लिए केवल घटना के बाद गिरफ्तारी करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए शिकार की घटनाओं को रोकने, समय रहते सूचना प्राप्त करने और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की जरूरत है।
विद्युत प्रवाहित तार से शिकार की आशंका, वन्यजीव सुरक्षा पर गंभीर चिंता
अवैध शिकार में विद्युत प्रवाहित जीआई तार जैसे खतरनाक तरीकों के इस्तेमाल की आशंका भी गंभीर चिंता का विषय है। इस तरह के तरीके वन्यप्राणियों के साथ-साथ ग्रामीणों और जंगल में आने-जाने वाले लोगों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।हालांकि, संबंधित घटनाओं में इस तरीके के इस्तेमाल और विभागीय गश्त में कथित चूक के संबंध में स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। यदि ऐसी गतिविधियां सामने आती हैं, तो उनकी गंभीरता को देखते हुए समयबद्ध जांच और प्रभावी रोकथाम जरूरी होगी।
सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, शिकारियों के पूरे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी
वन विभाग द्वारा की जा रही गिरफ्तारियों के बाद अब जांच की दिशा और उसके परिणाम महत्वपूर्ण होंगे। क्या कार्रवाई केवल मौके पर पकड़े गए आरोपियों तक सीमित रहेगी, या शिकार की योजना बनाने, हथियार अथवा उपकरण उपलब्ध कराने, वन्यप्राणियों का शिकार करने और उनके अवैध कारोबार से जुड़े संभावित लोगों तक भी जांच पहुंचेगी? इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।वन्यजीव संरक्षण के लिए अभयारण्य की सीमा से लगे गांवों और संवेदनशील वन क्षेत्रों में नियमित पेट्रोलिंग, रात्रिकालीन गश्त, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी और स्थानीय सूचना तंत्र को मजबूत करना आवश्यक है। साथ ही, ग्रामीणों से मिलने वाली सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई और शिकार की घटनाओं की पारदर्शी जानकारी भी महत्वपूर्ण है।
वन विभाग की कार्रवाई जारी, अब निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर नजर
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन मामलों में कार्रवाई वनमंडलाधिकारी महासमुंद श्रीनिवास तन्नेटी के निर्देशन, संयुक्त वनमंडलाधिकारी सरायपाली उदेराम बसंत के मार्गदर्शन तथा वन परिक्षेत्र अधिकारी सरायपाली प्रत्युष टाण्डेय के नेतृत्व में की गई।वन विभाग की कार्रवाई के बावजूद लगातार सामने आ रहे शिकार के मामलों ने वन्यप्राणियों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। अब देखना होगा कि विभाग इन घटनाओं की विवेचना के साथ-साथ भविष्य में ऐसी वारदातों को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब वन्यप्राणियों के शिकार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, तो संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त और निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? वन्यजीवों की सुरक्षा केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए जिससे शिकार की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लग सके।
