यूरेशिया में भारत का मजबूत रणनीतिक कदम: जानिए क्या है INSTC और क्यों बना व्यापार का नया प्रवेश-द्वार

नई दिल्ली: मध्य एशिया और यूरोप के साथ रणनीतिक व आर्थिक संबंधों को विस्तार देने की दिशा में ‘अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा’ (INSTC – International North–South Transport Corridor) भारत के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो रहा है। लगभग 7,200 किलोमीटर लंबा यह बहु-आयामी (मल्टी-मॉडल) ट्रांसपोर्ट नेटवर्क हिंद महासागर और फारस की खाड़ी को ईरान के रास्ते कैस्पियन सागर और आगे रूस होते हुए उत्तरी यूरोप से जोड़ता है। इसे यूरेशियाई बाजार में भारत के प्रमुख आर्थिक प्रवेश-द्वार के रूप में देखा जा रहा है।
क्या है अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC)?
INSTC जल, रेल और सड़क परिवहन का एक समन्वित नेटवर्क है। इस परियोजना की नींव सितंबर 2000 में सेंट पीटर्सबर्ग में भारत, रूस और ईरान द्वारा संयुक्त रूप से रखी गई थी। बाद में इस समझौते में मध्य एशिया, काकेशस और दक्षिण एशिया के कई अन्य देश (जैसे आर्मेनिया, अजरबैजान, कजाकिस्तान, बेलारूस, ओमान आदि) भी शामिल हुए।
यह मार्ग मुख्य रूप से भारत के पश्चिमी तट (जैसे मुंबई और कांडला बंदरगाह) से शुरू होकर अरब सागर के जरिए ईरान के बंदर अब्बास और चाबहार बंदरगाह तक पहुंचता है। इसके बाद सड़क और रेल नेटवर्क से कैस्पियन सागर के बंदरगाहों (जैसे बाकू और अस्त्राखान) से होते हुए मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग तक माल ढुलाई को सुगम बनाता है।
समय और लागत में भारी कटौती
पारंपरिक रूप से भारत से यूरेशिया और उत्तरी यूरोप तक माल भेजने के लिए स्वेज नहर और भूमध्य सागर वाले समुद्री मार्ग का सहारा लेना पड़ता है। INSTC इस पुराने मार्ग का एक सुरक्षित और किफायती विकल्प प्रस्तुत करता है:
- समय की बचत: स्वेज नहर के रास्ते सामान पहुंचने में आमतौर पर 40 से 45 दिन लगते हैं, जबकि INSTC मार्ग से यह समय घटकर लगभग 20 से 25 दिन रह जाता है।
- माल ढुलाई खर्च में कमी: परिवहन अध्ययन और ड्राई-रन के अनुसार, इस गलियारे से लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई की लागत में लगभग 30% तक की सीधी कमी आती है।
- सप्लाई चेन की सुरक्षा: स्वेज नहर जैसे वैश्विक चोक-पॉइंट्स पर निर्भरता कम होने से किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट के समय आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने का जोखिम कम रहता है।
भारत के लिए रणनीतिक और भू-राजनीतिक अहमियत
आर्थिक लाभ से परे, INSTC भारत की विदेश नीति और यूरेशियाई पहुंच के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है:
- पाकिस्तान को बाईपास कर मध्य एशिया तक पहुंच: जमीनी मार्ग से पारगमन (ट्रांजिट) की अनुमति न मिलने के कारण भारत के लिए मध्य एशियाई देशों तक सीधी पहुंच हमेशा एक चुनौती रही है। INSTC और चाबहार के समन्वय ने भारत को बिना किसी तीसरे देश की रुकावट के सीधा प्रवेश-द्वार दिया है।
- ऊर्जा और संसाधन सुरक्षा: मध्य एशियाई गणराज्य तेल, प्राकृतिक गैस, यूरेनियम और दुर्लभ खनिजों के बड़े स्रोत हैं। INSTC के जरिए भारत के लिए इन रणनीतिक संसाधनों का आयात आसान हो जाता है।
- ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ विजन को गति: यह गलियारा भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति और अशगाबात समझौते के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने का मजबूत आधार है।
चुनौतियां और आगे की राह
इस परियोजना में अपार संभावनाएं होने के बावजूद कुछ बुनियादी ढांचागत चुनौतियां भी हैं, जिनमें ईरान में कुछ रेल संपर्कों (जैसे रश्त-अस्तारा रेल लिंक) का विकास, सीमा शुल्क (कस्टम्स) प्रक्रियाओं का एकीकरण और डिजिटल डेटा एक्सचेंज शामिल हैं। सदस्य देश अब डिजिटल कस्टम प्लेटफॉर्म और रेल लाइनों के विस्तार पर तेजी से समन्वय कर रहे हैं।
वैश्विक व्यापार मार्गों के विविधीकरण और यूरेशिया के बढ़ते भू-आर्थिक महत्व के बीच INSTC आने वाले वर्षों में भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक प्रभाव को नई मजबूती देने वाला प्रमुख गलियारा है।



