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भ्रष्टाचार के मुद्दे पर जवाब देने ​की बजाए महापौर ने सदन में किया अमर्यादित शब्द का इस्तेमाल : संतोष​​ पिल्ले

राजनांदगांव :- नगर निगम की सामान्य सभा में महापौर के अमर्यादित शब्द के प्रयोग को लेकर नेताप्रतिपक्ष संतोष पिल्ले ने कड़ा प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सदन में ऐसी भाषा का प्रयोग व्यवहार के निचले स्तर को साबित करता है। इसके लिए महापौर को विपक्ष के पार्षदों से माफी मांगनी चाहिए। 

 नेताप्रतिपक्ष संतोष पिल्ले ने कहा कि पाइप लाइन में हुए भ्रष्टाचार का मुद्दा जैसे ही सदन में उठा। महापौर आग बबूला हो गए। उन्होंने विपक्ष के पार्षदों के लिए मां का दूध पीने जैसे अमर्यादित शब्द का प्रयोग किया है। यह बेहद शर्मनाक हैं। महापौर मधुसूदन यादव सांसद रह चुके हैं। पूर्व में भी महापौर की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके बाद भी उनका सदन में ऐसी भाषा का प्रयोग करना भ्रष्टाचार के आरोपों पर उनकी खींझ को साबित कर रहा है। नेताप्रतिपक्ष पिल्ले ने कहा कि कांग्रेस पार्षद दल ने खरखरा से राजनांदगांव तक बिछी पाइप लाइन, शहर के 51 वार्डों में हो रही पानी की समस्या को लेकर महापौर मधुसूदन यादव से सवाल किया। खुद भाजपा की एक पार्षद ने अपने वार्ड में हो रही पानी की समस्या को सदन में रखा। जबकि अमृत मिशन के नाम पर 200 करोड़ से अधिक राशि खर्च की जा चुकी है। जनता की समस्या पर जवाब देने की बजाए महापौर ने कांग्रेस पार्षदों के लिए कहा कि जिसने अपनी मां का दूध पिया है, वह जांच करा लें। यह जनहित के मु्द्दे पर महापौर की गंभीर अनदेखी को साबित करता है। सदन में ऐसी अमर्यादित भाषा को सुनकर कांग्रेस ने सामान्य सभा से वॉक आउट किया। जन समस्या पर जवाब देने की बजाए महापौर अपने पार्षदों के संख्या बल के आधार पर सदन में दादागिरी करते रहें। कांग्रेस पार्षदों से सदन में धक्का मुक्की की गई। महापौर का यह रवैया तानाशाही भरा है। उनहें अपनी आपत्तिजनक भाषा के लिए कांग्रेस पार्षदों से माफी मांगनी चाहिए। जनहित के मु़्द्दों पर हर पार्षद की बात सुननी और समस्या को हल करना चाहिए।

कांग्रेस पार्षदों के वार्डों में नहीं मिल रही विकास की राशि 

नेताप्रतिपक्ष संतोष पिल्ले ने आरोप लगाया कि महापौर शहर के विकास में भी भेदभाव कर रहे हैं। कांग्रेस पार्षदों वाले वार्ड को लेकर विकास कार्य के​ लिए राशि की स्वीकृति नहीं मिल रही है। इसके चलते कांग्रेस पार्षदों वाले वार्डाों में काम ठप पड़ा हुआ है। महापौर मधसूदन यादव के तानाशाही रवैए से इन वार्डों की जनता मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। महापौर के इसी रवैए के चलते कुछ समय पहले भाजपा के पार्षदों का पुतला दहन भी आम लोगों द्वारा किया जा चुका है। विकास पर जवाब मांगने पर महापौर बौखला कर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

अजय यादव

एक सीधे-सादे स्वभाव के व्यक्ति हैं। बचपन से ही अपने आसपास की बातों को याद रखने की आदत रही। परिवार में बड़ों का आदर और मेहनत की सीख मिली। वे सड़कों पर घूमना, बस-स्टैंड और बाजार की हलचल देखना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है कि असली तस्वीर वही है जो आम दिन में दिखती है, किसी मंच पर नहीं।

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