जंतर-मंतर प्रदर्शन: एआई से बने फर्जी वीडियो के आरोप में हरियाणा का 24 वर्षीय युवक गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस का दावा

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2026: दिल्ली पुलिस ने कहा है कि 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा एक वायरल वीडियो और पोस्टर असल सीसीटीवी फुटेज नहीं है। पुलिस के अनुसार यह सामग्री आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स की मदद से तैयार की गई और सोशल मीडिया पर सीसीटीवी बताकर फैलाई गई। इस मामले में हरियाणा के पलवल निवासी 24 वर्षीय नदीम अहमद को गिरफ्तार किया गया है।
अतिरिक्त डीसीपी (नई दिल्ली) मंजीत के अनुसार 3 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर एक फुटेज घूमने लगा, जिसे प्रदर्शन स्थल का सीसीटीवी बताया जा रहा था। इसमें पुलिस वर्दी में एक व्यक्ति को एक महिला के साथ अनुचित व्यवहार करते दिखाया गया था। पोस्ट में अधिकारी का नाम, फोटो और पदनाम भी जोड़ा गया था, जिससे यह impression दिया गया कि आरोपी अधिकारी एसीपी विवेक भगत हैं। जांच में यह सामग्री इंस्टाग्राम और फेसबुक पेज न्यूज आइना या न्यूज आइना टुडे से जुड़ी पाई गई। कुछ रिपोर्टों में युट्यूब चैनल का भी जिक्र है। पुलिस का कहना है कि इस पेज पर करीब 24 हजार फॉलोअर्स हैं।
पुलिस के मुताबिक नदीम अहमद को 5 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया। शुरुआती पूछताछ में उसने खुद को स्वतंत्र पत्रकार बताया और कहा कि उसने साकेत, दिल्ली की एक मदरसे में दसवीं तक पढ़ाई की है। पुलिस का दावा है कि उससे एआई से जुड़े टूल बरामद हुए हैं और उसने स्वीकार किया कि वीडियो 3 अक्टूबर को बनाया गया तथा 4 अक्टूबर को अपलोड किया गया। पूछताछ में उसने बताया कि मकसद दिल्ली पुलिस की छवि खराब करना था, ताकि प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने वाले लोग पुलिस के खिलाफ नफरत पालें और उन पर हमला कर सकें। पुलिस ने इसे अशांति फैलाने और अराजकता पैदा करने की कोशिश बताया है। उसका फोन जब्त कर लिया गया है। फंडिंग और संभावित सहयोगियों की जांच जारी है।
नई दिल्ली जिले की साइबर पुलिस स्टेशन में इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 353 (झूठी जानकारी से लोक शांति या सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप), धारा 352 (शांति भंग के लिए उकसाने वाला कृत्य) और धारा 336 (जालसाजी) सहित अन्य प्रावधानों का जिक्र किया है। आरोपी को पुलिस रिमांड में लेकर आगे पूछताछ की जा रही है।
3 अक्टूबर के प्रदर्शन का संदर्भ
यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के विरोध में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन 2 अक्टूबर से शुरू हुआ था। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू थी। प्रदर्शनकारियों को हटने को कहा गया और मना करने पर उन्हें हिरासत में लिया गया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) समेत संगठनों ने दावा किया कि महिलाओं, पत्रकारों और वकीलों के साथ बदसलूकी हुई।
इसी दिन शाम करीब 6 बजे तीन महिलाओं ने, जिन्होंने खुद को पत्रकार बताया, हिरासत के दौरान पुलिस कर्मियों द्वारा छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए शिकायत दी। एक शिकायत में एसीपी विवेक भगत पर आरोप है कि महिला अधिकारी की अनुपस्थिति पर सवाल पूछने के बाद उन्होंने यौन हमला किया और धक्का दिया। पुलिस के अनुसार शिकायत दर्ज की गई, मेडिकल जांच हुई और मामला क्राइम ब्रांच को भेजा गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भगत के खिलाफ अभी तक एफआईआर दर्ज होने की जानकारी नहीं है। 5 अक्टूबर को भगत को अतिरिक्त डीसीपी पदोन्नत किया गया।
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ शारीरिक हमले के व्यापक दावों को आधारहीन और भ्रामक बताया है। साथ ही पत्रकारों के लिए प्रदर्शन कवरेज से जुड़े दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। पुलिस ने साफ किया है कि एआई वीडियो वाला मामला साइबर सेल की अलग जांच है, जबकि महिला पत्रकारों की शिकायत पर क्राइम ब्रांच अलग से कार्रवाई कर रही है।
पुलिस के अनुसार वायरल सामग्री में प्रदर्शन स्थल के असली सीसीटीवी का इस्तेमाल कर उसे एआई से इस तरह बदला गया कि एक वर्दीधारी अधिकारी को महिला के साथ अनुचित व्यवहार करते दिखाया जा सके। तकनीकी जांच में इसे एआई-जनरेटेड पाया गया। आरोपी की फंडिंग, सहयोगी और यह सामग्री किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है या नहीं, इन बिंदुओं पर जांच जारी है।



