कलपक्कम का 500 मेगावाट PFBR मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद, BHAVINI का RTI जवाब

नई दिल्ली: तमिलनाडु के कलपक्कम में बन रहा भारत का 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है। यह जानकारी भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) ने सूचना के अधिकार (RTI) आवेदन के जवाब में दी है। भारत टुडे की 1 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार BHAVINI ने स्पष्ट किया कि परियोजना मार्च 2027 तक पूरी होने की उम्मीद है। यह समयसीमा रिएक्टर की प्रथम क्रिटिकैलिटी के करीब छह महीने बाद की है।
परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के अनुसार 500 MWe क्षमता वाले इस रिएक्टर ने 6 अप्रैल 2026 को रात 8:25 बजे प्रथम क्रिटिकैलिटी हासिल की थी। क्रिटिकैलिटी का मतलब नियंत्रित और आत्मनिर्भर नाभिकीय विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया की शुरुआत है। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) की सुरक्षा समीक्षा और मंजूरी के बाद यह उपलब्धि दर्ज हुई।
क्रिटिकैलिटी और व्यावसायिक संचालन में अंतर
क्रिटिकैलिटी निर्माण पूरा होने या ग्रिड को बिजली देने के बराबर नहीं है। अप्रैल 2026 के बाद रिएक्टर लो-पावर फिजिक्स प्रयोगों, सोडियम कूलेंट की स्थिरता जांच, तापीय शक्ति बढ़ाने, टरबाइन सिंक्रोनाइजेशन और AERB की चरणबद्ध मंजूरियों से गुजर रहा है। आर्थिक समय और विश्व न्यूक्लियर न्यूज समेत कई रिपोर्टों में व्यावसायिक संचालन देर 2026 या शुरुआती 2027 तक अनुमानित किया गया था। BHAVINI का ताजा RTI जवाब मार्च 2027 को पूर्णता की आधिकारिक अपेक्षा के रूप में रखता है।
रिएक्टर की डिजाइन और तकनीक विकास IGCAR ने किया है। निर्माण और कमीशनिंग BHAVINI कर रही है, जो DAE के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। ईंधन लोडिंग अक्टूबर 2025 में शुरू हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मार्च 2024 में कोर लोडिंग की शुरुआत के समय कलपक्कम पहुंचे थे।
तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम में जगह
PFBR होमी जहांगीर भाभा द्वारा परिकल्पित तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम का दूसरा चरण है।
- पहला चरण: दाबित भारी जल रिएक्टर (PHWR) प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग करते हैं और प्लूटोनियम-239 पैदा करते हैं।
- दूसरा चरण: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर खर्च किए गए ईंधन से निकले प्लूटोनियम और यूरेनियम-238 ब्लैंकेट से नया विखंडनीय ईंधन पैदा करते हैं। PFBR यूरेनियम-प्लूटोनियम मिक्स्ड ऑक्साइड (MOX) ईंधन और तरल सोडियम शीतलक का उपयोग करता है। कोर के चारों ओर यूरेनियम-238 का ब्लैंकेट है, जिसे तेज न्यूट्रॉन प्लूटोनियम-239 में बदलते हैं। डिजाइन के मुताबिक रिएक्टर जितना ईंधन खपत करता है, उससे अधिक पैदा कर सकता है।
- तीसरा चरण: थोरियम-232 को यूरेनियम-233 में बदलकर लंबे समय तक ऊर्जा सुरक्षा। भारत के पास थोरियम भंडार बड़े हैं, जबकि प्राकृतिक यूरेनियम सीमित है।
DAE के आधिकारिक बयान के अनुसार क्रिटिकैलिटी के साथ भारत अपने सीमित यूरेनियम से कहीं अधिक ऊर्जा निकालने और भविष्य के थोरियम आधारित रिएक्टरों की दिशा में आगे बढ़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अप्रैल 2026 में इसे नागरिक परमाणु यात्रा का निर्णायक कदम बताया था। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी इस मील के पत्थर पर भारत को बधाई दी थी।
लागत, देरी और संसदीय चिंता
परियोजना का निर्माण अक्टूबर 2004 में शुरू हुआ था। मूल लक्ष्य सितंबर 2010 या 2011 के आसपास था। प्रथम-प्रकार (first-of-its-kind) उपकरण, डिजाइन सत्यापन, सुरक्षा समीक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं के कारण बार-बार देरी हुई।
द हिंदू बिजनेसलाइन की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार संसदीय स्थायी समिति ने लागत बढ़ोतरी पर असंतोष जताया था। मूल अनुमान ₹3,492 करोड़ था, जबकि संशोधित अनुमान ₹8,181 करोड़ पहुंच गया। फरवरी 2026 तक कोर का बड़ा हिस्सा लोड हो चुका था, फिर भी बिजली उत्पादन शुरू नहीं हुआ था। समिति ने मील-पत्थर से जुड़ी बजट रिलीज और तकनीकी देरी कम करने के सुझाव दिए थे।
रिएक्टर की डिजाइन जीवन लगभग 40 वर्ष बताई जाती है। सकल क्षमता 500 MWe है; कुछ अंतरराष्ट्रीय ट्रैकर नेट क्षमता करीब 470 MWe दर्ज करते हैं। तापीय क्षमता लगभग 1,253 MWt है।
देश की परमाणु क्षमता विस्तार की बड़ी तस्वीर
BHAVINI के RTI जवाब के साथ NPCIL की जानकारियां भी सामने आई हैं। PIB के जुलाई 2026 के संसदीय जवाब के अनुसार देश की स्थापित परमाणु क्षमता 8,780 मेगावाट है, जो 24 रिएक्टरों से आती है और 2025-26 में कुल बिजली उत्पादन में करीब 3.1 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु क्षमता का है। 2031-32 तक करीब 22 गीगावाट पहुंचने का रोडमैप बताया गया है।
निर्माण या कमीशनिंग चरण की प्रमुख परियोजनाएं:
- राजस्थान के रावतभाटा में RAPP-8 (700 मेगावाट PHWR) कमीशनिंग के अग्रिम चरण में है और 2026 में परिचालन की उम्मीद है। RAPP-7 पहले ही वाणिज्यिक संचालन में आ चुका है। RAPP-7 और 8 की संयुक्त स्वीकृत लागत ₹22,924 करोड़ है।
- कुडनकुलम इकाई 3 और 4 (प्रत्येक 1,000 मेगावाट) की अपेक्षित पूर्णता जून 2027 और जून 2028 है। स्वीकृत लागत ₹68,893 करोड़।
- कुडनकुलम इकाई 5 और 6 की अपेक्षित पूर्णता जून 2029 और मार्च 2030 है। स्वीकृत लागत ₹69,437 करोड़।
- हरियाणा के गोरखपुर में GHAVP-1 और 2 (2×700 मेगावाट) निर्माणाधीन हैं।
- कर्नाटक के कैगा में इकाई 5 और 6 (2×700 मेगावाट) का निर्माण शुरू हो चुका है; अपेक्षित पूर्णता जून 2031 और जून 2032।
सरकार ने PFBR के समान डिजाइन वाले दो 500 मेगावाट फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR-1 और FBR-2) की प्री-प्रोजेक्ट गतिविधियां कलपक्कम में मंजूर की हैं। PFBR के सफल प्रदर्शन के बाद इन पर आगे बढ़ा जाएगा। साथ ही फास्ट रिएक्टर फ्यूल साइकिल फैसिलिटी (FRFCF) भी कलपक्कम में बन रही है, जो खर्च किए गए ईंधन के पुनर्प्रसंस्करण के लिए जरूरी है। इसकी समयसीमा अलग दस्तावेजों में दिसंबर 2027 से दिसंबर 2029 के बीच बताई गई है।
व्यावसायिक संचालन के बाद क्या बदलता है
पूर्ण व्यावसायिक संचालन के बाद भारत रूस के बाद व्यावसायिक पैमाने का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर चलाने वाला दूसरा देश बनने की स्थिति में होगा। रिएक्टर दक्षिणी ग्रिड को बिजली देगा और बंद ईंधन चक्र की दिशा में अनुभव जुटाएगा। भविष्य की फास्ट ब्रीडर इकाइयों के लिए प्लूटोनियम और बाद में थोरियम मार्ग का आधार भी यही संयंत्र तैयार करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिटिकैलिटी एक द्वार है, मंजिल नहीं। मार्च 2027 की अपेक्षा AERB की मंजूरी, पावर एसेंशन और ग्रिड कनेक्शन पर निर्भर करेगी। पिछले डेढ़ दशक की देरी को देखते हुए समयसीमा की निगरानी जरूरी रहेगी। फिर भी अप्रैल 2026 की क्रिटिकैलिटी और BHAVINI का ताजा RTI जवाब मिलकर संकेत देते हैं कि परियोजना अब अंतिम कमीशनिंग चरण में है।



