वामपंथी दलों ने एसआईआर रोकने की मांग की, नहीं माना तो आंदोलन; वोटिंग उम्र 16 करने की मांग भी

वामपंथी दलों ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को तुरंत रोकने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की व्यवस्था में सुधार की मांग की है। दलों का कहना है कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन चलाया जाएगा।
झारखंड में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा (माले), फॉरवर्ड ब्लॉक, आरएसपी और एसयूसीआई (सी) ने संयुक्त प्रेस वार्ता में यह रुख रखा। उन्होंने कहा कि एसआईआर की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए, गलत तरीके से काटे गए मतदाताओं का मताधिकार बहाल किया जाए और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष तथा सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश वाली तीन सदस्यीय समिति के जरिए की जाए।
झारखंड में यह अभियान 28 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) तक चलने की घोषणा की गई। राष्ट्रीय स्तर पर भी वामपंथी दलों ने चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और एसआईआर रोकने तथा मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे या हटाए जाने की मांग दोहराई। नेताओं ने कहा कि मांगें पूरी नहीं होने तक देशभर में प्रदर्शन जारी रहेंगे।
चुनाव सुधार के एजेंडे में वोटिंग की न्यूनतम उम्र घटाने की मांग भी जुड़ी हुई है। भाकपा (माले लिबरेशन) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा है कि मतदान की उम्र 18 से घटाकर 16 वर्ष की जानी चाहिए, ताकि युवा पीढ़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सीधे शामिल हो सके। भारत में वर्तमान में मतदान की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष है, जिसे 61वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1988 के जरिए 21 से घटाया गया था।
एसआईआर को लेकर विपक्षी दल और नागरिक संगठन मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम कटने का आरोप लगा रहे हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया मृत, दोहरे और अयोग्य नामों को हटाने तथा सूची को अद्यतन करने के लिए की जा रही है। आयोग ने युवा मतदाताओं के पंजीकरण संबंधी आरोपों का भी खंडन किया है।
विपक्ष एसआईआर रद्द करने, कट चुके नाम बहाल करने और आगामी चुनाव पूर्व-एसआईआर सूची के आधार पर कराने की मांग कर रहा है। वामपंथी दलों ने स्पष्ट किया है कि अगर ये मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा।



