कवर्धा में किसान आंदोलन से जनजीवन अस्त-व्यस्त, दूसरे दिन भी चक्काजाम जारी; रायपुर, जबलपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव मार्ग बाधित
कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कवर्धा में भारतीय किसान संघ का 23 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन लगातार दूसरे दिन भी जारी है। किसानों के चक्काजाम से शहर का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कवर्धा से रायपुर, जबलपुर, बिलासपुर और राजनांदगांव की ओर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर आवागमन बाधित होने से आम नागरिकों, यात्रियों और वाहन चालकों की परेशानी बढ़ गई है। नेशनल हाईवे पर 24 घंटे से अधिक समय से जाम लगा हुआ है। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं और सैकड़ों ट्रैक्टरों के सड़क पर खड़े होने से यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
किसानों के आंदोलन का असर अब शहर के दैनिक कामकाज पर भी दिखाई देने लगा है। नौकरी, व्यापार, इलाज और अन्य जरूरी कार्यों के लिए दूसरे शहरों की यात्रा करने वाले लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई वाहन चालक रास्ते में फंसे हुए हैं, जबकि कुछ लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग तलाशने पड़ रहे हैं। मार्गों पर यातायात बाधित होने से मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है, जिसका असर परिवहन व्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।

चक्काजाम के दौरान एंबुलेंस को आवाजाही की छूट दिए जाने की बात सामने आई है, जबकि अन्य वाहनों का आवागमन बाधित है। इसके बावजूद प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति के कारण आपातकालीन सेवाओं और अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई है। लगातार दूसरे दिन आवागमन प्रभावित रहने से आम लोगों के सामने आवाजाही का संकट खड़ा हो गया है।
किसान आंदोलन का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। मार्गों पर यातायात बाधित होने के कारण निजी स्कूलों में शुक्रवार को छुट्टी कर दी गई है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई है, वहीं अभिभावकों को भी अपनी दिनचर्या में बदलाव करना पड़ा है। यदि आंदोलन का जल्द समाधान नहीं निकलता है, तो आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
भारतीय किसान संघ के किसान अपनी 23 सूत्रीय मांगों को लेकर सड़क पर डटे हुए हैं। आंदोलनकारी किसान अपने साथ राशन-पानी लेकर पहुंचे हैं और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। शासन-प्रशासन की ओर से किसानों से बातचीत किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। वार्ता बेनतीजा रहने के कारण चक्काजाम समाप्त नहीं हो सका है।
फिलहाल प्रशासन के सामने किसानों से बातचीत कर समाधान निकालने और प्रमुख मार्गों पर यातायात बहाल कराने की चुनौती है। एक ओर किसान अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर अड़े हैं, वहीं दूसरी ओर सड़कें बाधित होने से आम नागरिकों को लगातार परेशानी उठानी पड़ रही है। अब सबकी नजर शासन-प्रशासन और किसान संगठन के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी है।


