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रायबरेली सिविल कोर्ट में ‘फर्जी वकीलों’ पर कड़ा एक्शन: बिना C.O.P. ड्रेस पहनने वालों को सेंट्रल बार एसोसिएशन की सख्त चेतावनी

रायबरेली: उत्तर प्रदेश के रायबरेली सिविल कोर्ट परिसर में अब बिना उचित मान्यता के वकालत का रौब गांठने वालों की खैर नहीं है। सेंट्रल बार एसोसिएशन, रायबरेली ने कोर्ट परिसर में पेशेवर अनुशासन और असली वकीलों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी व्यक्ति जिसके पास सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (C.O.P.) नहीं है, वह अधिवक्ता की निर्धारित वेशभूषा (ड्रेस कोड) में कोर्ट परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेगा।

द रूलबुक: क्या है नया आदेश?

जिस तरह खेल के मैदान में बिना जर्सी और बिना रोस्टर के किसी खिलाड़ी को उतरने की अनुमति नहीं होती, ठीक उसी तरह रायबरेली कोर्ट में भी अब केवल प्रमाणित अधिवक्ता ही वेशभूषा में नजर आएंगे। सेंट्रल बार एसोसिएशन की ओर से जारी आधिकारिक सूचना ने कचहरी परिसर में हलचल मचा दी है। यह कदम मुख्य रूप से उन लोगों की पहचान करने और उन पर नकेल कसने के लिए उठाया गया है, जो बिना किसी वैध डिग्री या प्रैक्टिस सर्टिफिकेट के खुद को वकील के तौर पर पेश करते हैं।

एसोसिएशन ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है:

  • बिना C.O.P. के कोई भी व्यक्ति वकीलों वाली निर्धारित पोशाक पहनकर न्यायालय परिसर में प्रवेश नहीं करेगा।
  • यदि कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति इस वेशभूषा में पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तुरंत और सख्त विधिक (कानूनी) कार्रवाई की जाएगी।

लीडरशिप का सख्त रुख (The Playmakers)

इस पूरे एक्शन प्लान को सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र यादव और महामंत्री संजय प्रताप सिंह ‘कछवाह’ के कुशल नेतृत्व में लागू किया गया है। दोनों पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय की गरिमा और असली अधिवक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था। इस कड़े निर्देश के बाद कचहरी परिसर में बिना वैध दस्तावेजों के वकालत की ड्रेस पहनने वालों की मॉनिटरिंग और भी सख्त कर दी गई है।

कचहरी परिसर में इसका प्रभाव (The Big Picture)

एसोसिएशन की ओर से जारी इस नोटिस के बाद से रायबरेली कचहरी परिसर में यह मुद्दा चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है। प्रमाणित अधिवक्ताओं ने एसोसिएशन के इस फैसले का खुले दिल से स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे न सिर्फ कोर्ट परिसर में पेशेवर अनुशासन कायम होगा, बल्कि आम जनता और मुवक्किलों को भी ‘फर्जी वकीलों’ के चंगुल से बचाया जा सकेगा। यह नियम कोर्ट के भीतर एक सुरक्षित और अधिक पारदर्शी माहौल तैयार करेगा।

आगे क्या होगा? (What’s Next)

चेतावनी जारी हो चुकी है और अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जमीनी स्तर पर इस नियम का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाता है। जो लोग अब तक केवल काली कोट के दम पर न्यायालय में अपनी पहचान बना रहे थे, उनके लिए दरवाजे बंद हो चुके हैं। यदि कोई नियम तोड़ता है, तो एसोसिएशन ने कानूनी कार्रवाई का जो ब्लूप्रिंट तैयार किया है, वह आने वाले समय में प्रदेश की अन्य जिला अदालतों के लिए भी एक बेहतरीन उदाहरण बन सकता है।

अजय यादव

एक सीधे-सादे स्वभाव के व्यक्ति हैं। बचपन से ही अपने आसपास की बातों को याद रखने की आदत रही। परिवार में बड़ों का आदर और मेहनत की सीख मिली। वे सड़कों पर घूमना, बस-स्टैंड और बाजार की हलचल देखना पसंद करते हैं। उन्हें लगता है कि असली तस्वीर वही है जो आम दिन में दिखती है, किसी मंच पर नहीं।

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