ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद पाकिस्तानी मीडिया का परमाणु दावा; लेफ्टिनेंट कर्नल विकास गुर्जर का जवाब

नई दिल्ली: मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के एक साल से अधिक समय बाद पाकिस्तानी मीडिया में यह दावा फिर चर्चा में आया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान भारत के खिलाफ परमाणु हथियार इस्तेमाल करने वाला था। इस दावे पर भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) विकास गुर्जर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर करारा जवाब दिया है।
गुर्जर ने पाकिस्तानी टीवी चैनल के एक पैनल डिस्कशन का क्लिप साझा करते हुए लिखा कि अगर ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान परमाणु बम इस्तेमाल करने को तैयार था, तो यह इस बात का संकेत है कि पारंपरिक युद्ध में उसके पास पर्याप्त जवाब नहीं बचा था। उनके अनुसार, परमाणु हथियार ऐसी स्थिति में आत्मघाती विकल्प होते। एक बार इस्तेमाल होने पर पाकिस्तान को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता।
वायरल वीडियो में क्या कहा गया
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पाकिस्तान के एक मीडिया चैनल का है। उसमें भारत-पाकिस्तान टकराव और युद्धविराम पर चर्चा हो रही थी। पैनल में मौजूद एक व्यक्ति का कहना था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान परमाणु बम का इस्तेमाल करने ही वाला था, इसलिए युद्धविराम हुआ। यह दावा पैनल चर्चा का हिस्सा है। भारत या पाकिस्तान की आधिकारिक सैन्य वार्ता से इसकी स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
ऑपरेशन सिंदूर क्या था
22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के बैसारन घाटी में पर्यटकों पर हमला हुआ। इस हमले में 26 लोग मारे गए। भारत ने हमले का संबंध पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क से जोड़ा। द रेजिस्टेंस फ्रंट ने पहले जिम्मेदारी ली थी। भारत इसे लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा बताता है। पाकिस्तान ने आरोप खारिज किया।
7 मई 2025 की मध्यरात्रि के आसपास भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। आधिकारिक भारतीय बयान के अनुसार, पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े नौ आतंकी ठिकानों पर मिसाइल और हवाई हमले किए गए। भारत ने कहा कि शुरुआती हमले आतंकी ढांचे पर केंद्रित थे और गैर-वृद्धिशील थे।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच ड्रोन, मिसाइल और सीमावर्ती फायरिंग का सिलसिला चला। भारत ने बाद में पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों, एयरबेस और रडार सिस्टम पर भी हमलों का दावा किया। पाकिस्तान ने भारतीय विमान गिराने, अपने इलाकों में नागरिक नुकसान और अपने जवाबी अभियान का दावा किया। दोनों पक्षों के आंकड़े एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। 10 मई 2025 को दोनों देशों के सैन्य अभियान महानिदेशकों (डीजीएमओ) के बीच हॉटलाइन वार्ता के बाद संघर्ष विराम हुआ।
परमाणु दावे पर आधिकारिक स्थिति
जनवरी 2026 में भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ वार्ता में परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। उनके अनुसार, जो परमाणु बयानबाजी सामने आई, वह पाकिस्तान के राजनेताओं या आम चर्चा से जुड़ी थी। सैन्य वार्ता से ऐसा संकेत नहीं मिला कि पाकिस्तानी सेना ने परमाणु escalation की बात की हो।
भारत सरकार का आधिकारिक रुख यह रहा कि कार्रवाई पारंपरिक सैन्य दायरे में रही। भारत ने परमाणु ब्लैकमेल न स्वीकार करने की बात दोहराई। पाकिस्तान ने भी आधिकारिक स्तर पर परमाणु हमले की पुष्टि नहीं की। संघर्ष चार दिनों में थम गया और परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं हुआ।
पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने बाद में किराना हिल्स से जुड़े दावों पर कहा था कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने को निशाना नहीं बनाया। कुछ खुले स्रोत विश्लेषकों ने उस इलाके के पास क्षति की संभावना जताई थी, लेकिन भारतीय आधिकारिक पक्ष ने इसे आतंकी और पारंपरिक सैन्य लक्ष्यों तक सीमित बताया।
दावे का संदर्भ और सीमा
पाकिस्तानी मीडिया का हालिया पैनल दावा एक साल बाद आया है। यह टीवी चर्चा है, सैन्य दस्तावेज या स्वतंत्र सत्यापन नहीं। मई 2025 के संकट में दोनों तरफ सोशल मीडिया और टीवी पर कई असत्यापित दावे फैले थे। भारत में भी कुछ चैनलों पर अतिरंजित दावे हुए, जिन्हें बाद में आधिकारिक या फैक्ट-चेक रिपोर्टों में गलत पाया गया। पाकिस्तान की ओर से भी कई दावे स्वतंत्र सबूतों से मेल नहीं खाए।
लेफ्टिनेंट कर्नल विकास गुर्जर सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और सोशल मीडिया पर नियमित टिप्पणी करते हैं। उनका बयान व्यक्तिगत प्रतिक्रिया है, भारतीय सेना का आधिकारिक प्रेस बयान नहीं।
संक्षेप में, पहलगाम हमले के बाद भारत ने आतंकी ठिकानों पर हमला किया, दोनों पक्षों के बीच सीमित लेकिन तीव्र सैन्य टकराव हुआ, 10 मई को संघर्ष विराम हुआ और परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं हुए। पाकिस्तानी मीडिया का यह दावा कि परमाणु हमला लगभग हो चुका था, पैनल चर्चा तक सीमित है। भारतीय सेनाध्यक्ष ने डीजीएमओ वार्ता में परमाणु चर्चा से इनकार किया है।



