म्यांमार संकट का असर: मिजोरम बना ड्रग्स तस्करी का नया केंद्र, 8 महीने में 850 करोड़ का नशा जब्त

आइजोल: पूर्वोत्तर का सीमावर्ती राज्य मिजोरम पड़ोसी म्यांमार से नशीली वस्तुओं की तस्करी का मुख्य केंद्र बनता जा रहा है। बीते आठ महीने में ही राज्य में करीब 850 करोड़ रुपये मूल्य की नशीली वस्तुएं जब्त की गई हैं और 900 से ज्यादा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। भारत सरकार के नशा मुक्त भारत संकल्प अभियान के बावजूद पूर्वोत्तर के इस राज्य में तस्करी के आंकड़े चिंताजनक बने हुए हैं।
लंबी और दुर्गम सीमा ने बढ़ाई मुश्किलें
मिजोरम की करीब 510 किमी लंबी सीमा म्यांमार से सटी है। राज्य के 11 में से छह जिले म्यांमार के चिन राज्य से जुड़े हैं। फरवरी 2021 में म्यांमार में हुए सैन्य तख्तापलट के बाद वहां से भारी तादाद में लोगों ने मिजोरम में शरण ली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में राज्य के विभिन्न शरणार्थी शिविरों में करीब 31 हजार लोग रह रहे हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, म्यांमार से लगी अधिकांश सीमा पर कंटीले तारों की बाड़ नहीं है। ये इलाके घने दुर्गम जंगलों और नदियों से जुड़े हैं। स्थानीय तस्करों को जंगल के खुफिया रास्तों की अच्छी जानकारी होती है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए सीमा पार से होने वाली इस तस्करी को पूरी तरह रोकना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हवाला नेटवर्क का खुलासा
सुरक्षा बलों ने हालिया अभियानों में करोड़ों रुपये की हेरोइन जब्त की है। खुफिया विभाग के सूत्रों के अनुसार, नशे के इस बड़े कारोबार को चलाने में हवाला नेटवर्क की अहम भूमिका है। हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़े पैमाने पर अभियान चलाकर एक ऐसे ही सिंडिकेट का खुलासा किया था और विभिन्न बैंकों में जमा करोड़ों रुपये जब्त किए थे। सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती के बाद अब तस्कर नए-नए रास्तों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
युवाओं में नशे की लत और HIV का बढ़ता खतरा
राज्य का सबसे प्रभावशाली सामाजिक संगठन ‘यंग मिजो एसोसिएशन’ (YMA) इस समस्या पर अंकुश लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है। YMA के प्रवक्ता वी. लालमालसावमा का कहना है कि नशीली दवाओं की आसान उपलब्धता के कारण युवाओं में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है। इसी का नतीजा है कि राज्य में एचआईवी (HIV) के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जुलाई तक राज्य में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या करीब 35 हजार दर्ज की गई थी। राज्य में एचआईवी की संक्रमण दर 2.75% है, जो कि पूरे देश में सबसे ज्यादा है। नशे की ओवरडोज और इससे जुड़ी बीमारियों से कई युवाओं की जान भी जा चुकी है।
तस्करी पर लगाम कसने के लिए क्या कर रही है सरकार?
राज्य सरकार और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों ने आपसी तालमेल बढ़ाते हुए सीमावर्ती इलाकों में निगरानी सख्त कर दी है। सरकार ने तीन वर्षीय नशा-विरोधी कार्य योजना शुरू की है। इसके तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और नशे की लत से पीड़ित युवाओं के इलाज के लिए नए पुनर्वास केंद्र खोले गए हैं। इस मुहिम में चर्च, वाईएमए, गैर-सरकारी संगठन (NGOs) और स्थानीय समुदाय भी अहम भूमिका निभा रहे हैं और ग्रामीण स्तर पर युवाओं की काउंसलिंग की जा रही है।
जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता वनरामछुआंगी और डी. सापडांगा का मानना है कि नशीली दवाओं के बढ़ते सेवन से मिजोरम की युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। यह अब केवल अपराध या सुरक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसके बेहद गंभीर और दूरगामी सामाजिक परिणाम सामने आएंगे। इस खूबसूरत पर्वतीय राज्य को बचाने के लिए केंद्र, राज्य और सामाजिक संगठनों को युद्ध स्तर पर प्रयास करने होंगे।
