PNG Drive 3.0 और एकीकृत पोर्टल: रोजाना कनेक्शन दोगुना करने का लक्ष्य, LPG से शिफ्ट पर जोर

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026: पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) के स्थापना दिवस पर Piped Natural Gas (PNG) कनेक्शन बढ़ाने की मुहिम PNG Drive 3.0 और एकीकृत आवेदन पोर्टल शुरू होने की खबरें सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार योजना का मकसद घरेलू और व्यावसायिक एलपीजी इस्तेमाल घटाना और उन इलाकों में कनेक्शन तेज करना है, जहां पाइपलाइन नेटवर्क पहले से मौजूद है।
Times of India की 23 सितंबर की रिपोर्ट में PNGRB चेयरपर्सन अनिल कुमार जैन ने कहा था कि नया पोर्टल “गेम चेंजर” होगा। देश के किसी भी हिस्से से आवेदन स्वीकार होंगे और तुरंत संबंधित सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनी को भेज दिए जाएंगे। Zee Business ने 30 सितंबर को बताया था कि 1 अक्टूबर को ड्राइव के साथ पोर्टल भी आएगा, जिसमें नया कनेक्शन, पाइपलाइन की मांग और शिकायत तीनों शामिल होंगे।
क्यों बढ़ी रफ्तार
पिछले अभियान PNG Drive 2.0 का असर आधिकारिक आंकड़ों में दिखता है। PNGRB के अनुसार 1 जनवरी से 30 जून 2026 के बीच 15.31 लाख रजिस्ट्रेशन, 12.10 लाख कनेक्शन और 13.37 लाख बिल्ड उपभोक्ता जुड़े। साथ ही 5,991 कमर्शियल और 1,193 इंडस्ट्रियल कनेक्शन बने, और 23 नए Geographical Areas (GA) प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क से जुड़े।
पश्चिम एशिया संकट के बाद रफ्तार और बढ़ी। PNGRB की अप्रैल 2026 प्रेस नोट के मुताबिक 15 मार्च 2026 से रोजाना औसतन 10,000 से ज्यादा नए PNG कनेक्शन दिए जा रहे थे। अप्रैल तक अतिरिक्त इंफ्रास्ट्रक्चर 6.5 लाख कनेक्शनों के लिए तैयार हो चुका था और करीब 5.29 लाख घरेलू कनेक्शन गैस से जुड़ चुके थे। Economic Times ने अगस्त में लिखा था कि संकट से पहले दैनिक जोड़ 4,000–5,000 के आसपास था।
AajTak समेत कुछ रिपोर्टों में अब इस रफ्तार को दोगुना कर रोज 20,000 कनेक्शन का लक्ष्य बताया गया है। हालांकि अगस्त की ET रिपोर्ट में मंत्रालय के 1 लाख दैनिक कनेक्शन वाले ऊंचे लक्ष्य पर अधिकारियों ने कहा था कि गैस प्लंबर और तकनीशियनों की कमी के कारण यह व्यावहारिक नहीं है। कंपनियां जितना संभव हो, उतना बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।
पोर्टल क्या बदलेगा
अभी उपभोक्ता अपनी इलाके की CGD कंपनी की वेबसाइट या हेल्पलाइन पर आवेदन करते हैं। नया एकीकृत पोर्टल पूरे देश के लिए एक जगह बनाने की कोशिश है। PNGRB की मैप की गई पाइपलाइन जानकारी से यह पता चलेगा कि आवेदक के पास नेटवर्क उपलब्ध है या नहीं, और निपटान की समय-सीमा तय होगी।
Times of India के अनुसार आवेदकों को आधार नंबर देना होगा, ताकि एक ही घर पर सब्सिडी वाला एलपीजी और PNG दोनों न चलें। पश्चिम एशिया संकट के दौरान पेट्रोलियम मंत्रालय ने नोटिफिकेशन जारी कर PNG जुड़े उपभोक्ताओं को घरेलू एलपीजी कनेक्शन या रिफिल रखने से रोका था। पोर्टल इस नियम को लागू करने में मदद करेगा।
TOI के आंकड़ों के मुताबिक 1.7 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं के आसपास PNG नेटवर्क उपलब्ध है, लेकिन सक्रिय कनेक्शन करीब 1.2 करोड़ हैं। करीब 22 लाख एलपीजी उपभोक्ता तुरंत शिफ्ट हो सकते हैं। 18 अगस्त 2026 तक देश में कुल घरेलू PNG कनेक्शन 1.74 करोड़ थे। PNGRB ने 307 से 309 Geographical Areas अधिकृत किए हैं, जो मुख्य भूमि को कवर करते हैं।
पहले के अभियान और नई योजनाएं
PNG Drive 2.0 जून 2026 में समाप्त हुआ था। उससे पहले जनवरी में शुरू हुई मुहिम को संकट देखते हुए जून तक बढ़ाया गया था। अगस्त 2026 में मंत्रालय ने Domestic PNG Connection Incentive Scheme शुरू की, जो 1 सितंबर से प्रभावी है। इसके तहत तय न्यूनतम से ज्यादा बिल्ड कनेक्शन जोड़ने वाली CGD कंपनियों को हर अतिरिक्त कनेक्शन पर 200 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर सस्ता APM गैस अतिरिक्त आवंटन मिलता है। इसका मकसद कनेक्शन की आर्थिक व्यवहार्यता सुधारना है।
Economic Times ने अगस्त में लिखा था कि PNG Drive 3.0 सितंबर में शुरू हो सकता है। बाद की रिपोर्टों ने तारीख 1 अक्टूबर बताई। योजना का जोर उन शहरों पर है जहां CGD नेटवर्क है, लेकिन एलपीजी इस्तेमाल अभी ज्यादा है। रेस्टोरेंट, होटल और छोटे उद्योगों को भी शिफ्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उपभोक्ता को क्या फायदा
PNG कनेक्शन में सिलेंडर बुक कराने और खत्म होने का इंतजार नहीं रहता। आपूर्ति पाइपलाइन से लगातार मिलती है। मीटर के हिसाब से जितनी गैस इस्तेमाल होती है, उतना बिल आता है। रसोई में सिलेंडर रखने की जगह बचती है। मीटर और पाइप अपेक्षाकृत कम जगह लेते हैं।
सुरक्षा और सफाई के लिहाज से भी पाइप्ड गैस को बेहतर माना जाता है, क्योंकि सिलेंडर बदलने और भंडारण का जोखिम घटता है। कीमत स्थानीय टैक्स, कंपनी शुल्क और गैस सोर्स पर निर्भर करती है। कई राज्यों ने प्राकृतिक गैस पर VAT घटाकर 5 प्रतिशत करने की दिशा में कदम उठाए हैं, जिससे घरेलू बिल पर असर पड़ सकता है।
सीमाएं और अगला कदम
नेटवर्क हर गली तक नहीं पहुंचा है। जहां पाइपलाइन नहीं है, वहां कनेक्शन में समय लग सकता है। CGD कंपनियों को प्लंबर, अनुमति और राइट-ऑफ-वे की उपलब्धता पर निर्भर रहना पड़ता है। आधिकारिक प्रेस नोट में 20,000 दैनिक लक्ष्य या नए 80 GA की अलग सूची अभी सार्वजनिक रूप से पुष्ट नहीं हुई है।
उपभोक्ता PNGRB और अपनी CGD कंपनी की वेबसाइट पर पोर्टल लिंक और क्षेत्रवार रोलआउट प्लान देख सकते हैं। आवेदन के बाद स्टेटस ट्रैक करने और शिकायत दर्ज करने की सुविधा पोर्टल का मुख्य वादा है। योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि आवेदन कितनी तेजी से असली गैस कनेक्शन में बदलते हैं और बिलिंग सक्रिय रहती है।



