छत्तीसगढ़

अनुकंपा नियुक्ति व्यवस्था समाप्त करने की संभावित तैयारी, कर्मचारी संगठनों ने किया कड़ा विरोध

कहा शासन ने कदम बढ़ाया तो मंत्रालय से लेकर निचले स्तर तक होगा आंदोलन

रायपुर, 13 अक्टूबर।छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के पश्चात शासकीय सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी अथवा अधिकारी के आकस्मिक निधन की स्थिति में उनके आश्रित परिवार को अनुकंपा नियुक्ति प्रदान किए जाने की व्यवस्था शासन द्वारा लागू है। यह व्यवस्था किसी परिवार को दी जाने वाली सामान्य नियुक्ति नहीं, बल्कि उस परिवार पर अचानक आई आर्थिक एवं सामाजिक विपदा के समय शासन की ओर से दिया जाने वाला मानवीय सहारा है।

विश्वस्त सूत्रों से अनुकंपा नियुक्ति की वर्तमान व्यवस्था को समाप्त किए जाने पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। इस संभावित निर्णय को लेकर प्रदेश के कर्मचारी-अधिकारी संगठनों में भारी आक्रोश एवं चिंता व्याप्त है।

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था को समाप्त करना न केवल हजारों प्रभावित परिवारों के भविष्य को अंधकारमय करने वाला कदम होगा, बल्कि यह शासन की कर्मचारी हितैषी एवं संवेदनशील छवि के विपरीत भी होगा।

कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि शासन द्वारा अनुकंपा नियुक्ति की व्यवस्था समाप्त करने अथवा उसे कमजोर करने का कोई निर्णय लिया जाता है, तो इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

संगठनों ने शासन को आगाह करते हुए कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति व्यवस्था कर्मचारी परिवारों के लिए जीवन का सहारा है, इसे समाप्त करने का प्रयास कर्मचारी जगत के साथ अन्याय होगा।

सरकार यदि ऐसा कोई निर्णय लेती है तो प्रदेश के कर्मचारी-अधिकारी संगठन एकजुट होकर इसका पुरजोर विरोध करेंगे तथा मंत्रालय से लेकर प्रदेश के अंतिम छोर तक चरणबद्ध एवं व्यापक जमीनी संघर्ष किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा, मंत्रालयीन कर्मचारी संघ के अध्यक्ष चंद्रकांत पाण्डेय, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पवन कुमार शर्मा, चंद्रशेखर तिवारी, लिपिक वर्ग के प्रांत अध्यक्ष रोहित एवं संजय सिंह, विभागाध्यक्ष कर्मचारी संघ के अध्यक्ष जय कुमार साहू सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री एवं शासन से मांग की है कि अनुकंपा नियुक्ति की वर्तमान व्यवस्था को समाप्त करने संबंधी किसी भी प्रस्ताव पर आगे बढ़ने के बजाय कर्मचारी संगठनों से चर्चा की जाए। तथा इस मानवीय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं सरल बनाया जाए।

कर्मचारी संगठनों ने कहाकिसी कर्मचारी की आकस्मिक मृत्यु के बाद उसके परिवार को बेसहारा छोड़ना कल्याणकारी शासन की नीति नहीं हो सकती। अनुकंपा नियुक्ति समाप्त करने का निर्णय लिया गया तो यह छत्तीसगढ़ के कर्मचारी जगत के लिए एक काला अध्याय साबित होगा।

आगे क्या – यदि भाजपा सरकार ने यह निर्णय लिया तो यह दो वर्ष बाद होने वाले चुनाव में कर्मचारियों को आकर्षित करने का मुद्दा होगा। ओपीएस की तरह विपक्षी दल इसे चुनावी घोषणा पत्र में शामिल कर इस वोट बैंक को अपने पक्ष में करने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे।

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