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पश्चिम एशिया संघर्ष में भारतीय नाविकों की हिफाजत: सीफेरर-फर्स्ट सिस्टम, 24 घंटे कंट्रोल रूम और नौसेना एस्कॉर्ट

पश्चिम एशिया के बढ़ते संघर्ष के बीच होर्मुज, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों पर खतरा बढ़ा है। 4,500 से ज्यादा भारतीय नाविकों पर नजर, 24 घंटे कंट्रोल सिस्टम और नौसेना का एस्कॉर्ट—कौन संभाल रहा हिफाजत?

नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने दुनिया के तीन सबसे संवेदनशील समुद्री चोकपॉइंट्स—स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, बाब-अल-मंदेब और लाल सागर—को खतरे के दायरे में ला दिया है। इन रास्तों से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर मिसाइल, ड्रोन और अन्य हमलों की घटनाएं बढ़ी हैं। भारत के लिए यह सिर्फ व्यापार या ऊर्जा आपूर्ति का मुद्दा नहीं है। इन जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम कर रहे हैं, और कई हमलों में उनकी जान भी गई है।

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक फारस की खाड़ी क्षेत्र में 4,500 से ज्यादा भारतीय नाविक वाणिज्यिक जहाजों पर तैनात हैं। इनमें से 163 नाविक 12 सक्रिय जहाजों पर सवार हैं—छह भारतीय ध्वज वाले और छह विदेशी ध्वज वाले, जो भारत के लिए माल ले जा रहे हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा में इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि खाड़ी से लाल सागर और काला सागर तक वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हमले पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। भारतीय नाविकों की जान गई है, और यह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

हालिया हमले और भारतीय नाविकों पर असर

23 सितंबर 2026 को ओमान की खाड़ी में एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाले बल्क कैरियर एमवी केप दाओ पर हमला हुआ। जहाज यूएई के मीना साक्र से भारत की ओर आ रहा था। इस हमले में उत्तर प्रदेश के देवरिया के नाविक सूरज यादव की मौत हो गई। वे वाइपर के पद पर काम कर रहे थे और हमले से कुछ देर पहले परिवार से वीडियो कॉल पर थे। इससे करीब दस दिन पहले पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एल गाया पर होर्मुज से गुजरते समय हमला हुआ, जिसके बाद एक भारतीय चालक दल सदस्य लापता बताया गया।

जुलाई 2026 में होर्मुज में एमटी अल बहिया और एमटी मोम्बासा पर हुए हमलों में एक भारतीय नाविक की मौत हुई और कई घायल हुए। भारत ने इन घटनाओं पर ईरान से औपचारिक विरोध दर्ज कराया। लाल सागर में 4 अगस्त 2026 को भारतीय ध्वज वाले एमएसवी फैजे नूरे ओलिया पर प्रक्षेप्य हमला हुआ। जहाज यमन के होदेइदा के पास डूब गया, लेकिन 14 चालक दल सदस्यों में से 13 भारतीय समेत सभी को यमनी बलों ने बचा लिया। इन घटनाओं से साफ है कि खतरा सिर्फ होर्मुज तक सीमित नहीं रहा। बाब-अल-मंदेब और लाल सागर में हूती हमलों ने भी जहाजों और चालक दल को निशाना बनाया है।

सीफेरर-फर्स्ट सिस्टम: 24 घंटे निगरानी और परिवारों से संपर्क

बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा नौवहन महानिदेशालय (डीजी शिपिंग) ने ‘सीफेरर-फर्स्ट’ ढांचा लागू किया है। इसका मकसद प्रभावित क्षेत्र में हर भारतीय नाविक की पहचान, स्थिति और कल्याण पर नजर रखना है, चाहे जहाज किसी भी देश के झंडे वाला हो।

इसके तहत डीजी कम्युनिकेशन सेंटर और समर्पित 24 घंटे कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे काम करते हैं। जहाज मालिकों और रिक्रूटमेंट एजेंसियों को पोत की पूरी जानकारी और क्रू लिस्ट जमा करनी होती है। ई-नविक पोर्टल के जरिए समुद्री दुर्घटना, सुरक्षा घटना और संकट की डिजिटल रिपोर्टिंग होती है। हर 24 घंटे में स्थिति रिपोर्ट जारी की जाती है। प्रभावित परिवारों के लिए संपर्क अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो कल्याण, प्रत्यावर्तन और कानूनी मुद्दों में मदद करते हैं। शिकायत के लिए टोल-फ्री नंबर और व्हाट्सऐप सहायता भी सक्रिय है।

जुलाई 2026 में डीजी शिपिंग ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर नए भारतीय नाविकों की तैनाती रोकने की सलाह जारी की थी, जब तक स्थिति सामान्य न हो। मृत्यु के मामलों में नाविक कल्याण कोष के तहत परिजनों को 10 लाख रुपये की तत्काल अनुग्रह राशि दी जा रही है। पहले के आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से 4,000 से ज्यादा फंसे नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है और कई भारत-बद्ध जहाज होर्मुज से सफलतापूर्वक निकल चुके हैं।

भारतीय नौसेना की भूमिका: ऑपरेशन संकल्प और ऊर्जा सुरक्षा

निगरानी और कूटनीतिक समन्वय के साथ नौसेना सक्रिय सुरक्षा भी दे रही है। 2019 से ऑपरेशन संकल्प के तहत गल्फ ऑफ ओमान और होर्मुज के आसपास युद्धपोत तैनात हैं। हालिया तनाव के दौरान यह मौजूदगी बढ़ाई गई। गल्फ ऑफ ओमान में कई युद्धपोत, समुद्री गश्ती विमान, ड्रोन और सैटेलाइट फीड से रीयल-टाइम निगरानी हो रही है। भारतीय युद्धपोत एलपीजी और क्रूड टैंकरों को होर्मुज क्षेत्र से बाहर निकालकर भारतीय बंदरगाहों तक एस्कॉर्ट कर चुके हैं।

लाल सागर और बाब-अल-मंदेब के लिए मार्च 2026 में ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा शुरू किया गया। 14 सितंबर 2026 तक इस अभियान के तहत 449 व्यापारी जहाजों को गल्फ ऑफ एडन और लाल सागर से सुरक्षित निकाला गया। इनमें 2.03 करोड़ मीट्रिक टन माल और 8.4 अरब डॉलर मूल्य का तेल शामिल था। अगस्त 2026 में आईएनएस त्रिशूल और आईएनएस आदित्य ने एमटी कंपास (भारतीय ध्वज) और एमटी थलाट्टा को बाब-अल-मंदेब के उच्च जोखिम वाले क्षेत्र से एस्कॉर्ट किया। पश्चिमी नौसेना कमान के अनुसार, जरूरत पड़ने पर तैनाती बढ़ाई जा सकती है। मरीन कमांडो भी इन जहाजों पर तैनात रहते हैं।

सूचना संलयन केंद्र-हिंद महासागर क्षेत्र (आईएफसी-आईओआर) नौसेना, डीजी शिपिंग और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय का केंद्र है। घटना होने पर जहाजों को निकटतम भारतीय या गठबंधन युद्धपोत से वीएचएफ चैनल 16 पर संपर्क करने और तुरंत नियंत्रण कक्ष को सूचना देने का प्रोटोकॉल है।

चुनौतियां और सीमाएं

बड़ी चुनौती यह है कि अधिकांश भारतीय नाविक विदेशी ध्वज वाले जहाजों पर काम करते हैं। अंतरराष्ट्रीय जल में हमला होने पर तुरंत मदद पास के देशों की नौसेना या तटरक्षक बल से मिलती है, और भारत दूतावासों के जरिए समन्वय करता है। किसी एक देश के लिए हर विदेशी जहाज को लगातार एस्कॉर्ट करना व्यावहारिक नहीं है। भारत ऊर्जा आयात के लिए इन रास्तों पर निर्भर है—कच्चे तेल की बड़ी हिस्सेदारी होर्मुज से आती है—और यूरोप व्यापार के लिए बाब-अल-मंदेब-लाल सागर मार्ग महत्वपूर्ण है। हमलों से बीमा प्रीमियम, मालभाड़ा और यात्रा समय बढ़ जाता है।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में भी यह रुख रखा है कि वाणिज्यिक जहाज भू-राजनीतिक तनाव का निशाना नहीं बनने चाहिए और नौवहन की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए। स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा कि नाविकों की सुरक्षा, निकासी और प्रत्यावर्तन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।

आगे का परिदृश्य

स्थिति अभी भी अस्थिर है। होर्मुज से यातायात कुछ हद तक बहाल हुआ है, लेकिन लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में खतरा बना हुआ है। भारत की व्यवस्था—रीयल-टाइम ट्रैकिंग, 24 घंटे नियंत्रण कक्ष, परिवार संपर्क अधिकारी और नौसेना के एस्कॉर्ट—नाविकों की हिफाजत का मुख्य ढांचा है। यह पूरी तरह जोखिम खत्म नहीं करता, लेकिन घटना होने पर त्वरित प्रतिक्रिया और सहायता सुनिश्चित करता है। जब तक पश्चिम एशिया में संघर्ष शांत नहीं होता, इन जलमार्गों से गुजरने वाले हर भारतीय नाविक पर नजर और समन्वय जारी रहेगा।

अनीता शर्मा

एक संवेदनशील और शांत स्वभाव की महिला हैं। घर-परिवार के बीच रहकर उन्होंने ज़िंदगी के छोटे-छोटे पड़ावों को करीब से देखा है। उन्हें सुबह की सैर, घर के आंगन में बैठकर चाय पीना और पुरानी पत्रिकाएँ पढ़ना पसंद है। वे आसपास के लोगों के सुख-दुख को दिल से महसूस करती हैं। उनकी सोच साफ और सीधी है — जो दिखे, वही कहें, बिना बढ़ा-चढ़ाए।

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