CEC ज्ञानेश कुमार को ‘जनता के महाभियोग’ का नोटिस: योगेंद्र यादव और पूर्व अधिकारियों को चुनाव आयोग जाने से रोका गया

नई दिल्ली: राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और पूर्व नौकरशाहों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘जनता के महाभियोग’ का नोटिस जारी किया है। सोमवार को यह प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के कार्यालय जाकर मुख्य चुनाव आयुक्त को यह नोटिस सौंपना चाहता था, लेकिन भारी पुलिस बल और बैरिकेडिंग के कारण उन्हें रास्ते में ही रोक दिया गया。
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल?
योगेंद्र यादव के अनुसार, इस प्रतिनिधिमंडल में कई रिटायर्ड अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। प्रमुख नामों में दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, पूर्व गृह सचिव जी.के. पिल्लई, पूर्व केंद्रीय सचिव अमिताभ पांडेय, पूर्व राजनयिक अशोक शर्मा और आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज शामिल हैं。
चुनाव आयोग बना ‘किला’, प्रेस क्लब में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस
चुनाव आयोग तक पहुंचने से रोके जाने के बाद योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने लिखा, “चुनाव आयोग को किले में तब्दील कर दिया गया है और आयोग तक जाने वाले हर रास्ते पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। हमने आयोग तक पहुंचने की कोशिश की, लेकिन रास्ते बंद कर दिए गए थे”。
आयोग के बाहर रोके जाने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार शाम 5 बजे प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी करने और अपनी बात जनता के सामने रखने का फैसला किया。
ज्ञानेश कुमार पर क्या हैं आरोप?
प्रतिनिधिमंडल ने संवैधानिक अधिकारों और जवाबदेही का हवाला देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त पर 6 गंभीर आरोप लगाए हैं और उनके इस्तीफे की मांग की है। महाभियोग की इस 4 पन्नों की चार्जशीट में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दे उठाए गए हैं:
- सामूहिक कामकाज को कमजोर करना: आरोप है कि CEC ने अन्य चुनाव आयुक्तों से पर्याप्त विचार-विमर्श और बिना सही एजेंडे के चुनाव आयोग के नाम पर फैसले लिए।
- फॉर्म-6 में बदलाव: वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित रूप से बिना उचित मंजूरी के बदलाव करना।
- मतदाता सूची (SIR) में गड़बड़ी: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं को उनके अधिकार से वंचित करने का आरोप, जिसमें दावा किया गया है कि 13.3 करोड़ नाम हटाए गए हैं।
- आयोग की निष्पक्षता पर सवाल: उनके आचरण, राजनीतिक बयानबाजी और फैसलों से राजनीतिक पक्षपात की आशंका पैदा होने का दावा किया गया है।
योगेंद्र यादव और प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक अधिकार के साथ संवैधानिक जवाबदेही भी बहुत ज़रूरी है। उनका कहना है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जनता और संविधान के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। पूर्व अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो जनता की ओर से उन्हें हटाने की मांग जारी रहेगी。
