गैस सिलिंडरों से चोरी का भंडाफोड़ कार्रवाई नहीं होने से उठ रहे सवाल
डोंगरगढ़: महंगाई के दौर में रसोई गैस उपभोक्ताओं की जेब पर कथित तौर पर डाका डालने का मामला सामने आने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म है। बीते बुधवार को शहरवासियों की सतर्कता से स्थानीय इंडेन गैस एजेंसी के चार कर्मचारियों को सिलिंडरों से गैस चोरी करते हुए पकड़ने का दावा किया गया। हालांकि, आरोपित मौके से भागने में सफल रहे। मामले की सूचना मिलने पर स्थानीय प्रशासन के खाद्य निरीक्षक और एसडीएम मौके पर पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज करने के साथ पंचनामा कार्रवाई भी की गई। इसके बावजूद अब तक एफआइआर दर्ज होने और आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
छह महीने से गैस वितरण का काम कर रहे थे कर्मचारी
गैस चोरी के आरोपों से घिरे चारों कर्मचारी राजस्थान के निवासी बताए जा रहे हैं। वे पिछले करीब छह महीने से स्थानीय गैस एजेंसी में गैस वितरण का काम कर रहे थे। शहरवासियों का आरोप है कि कुछ उपभोक्ता पिछले काफी समय से सिलिंडरों में गैस कम मिलने की शिकायत कर रहे थे। अब कथित गैस चोरी का मामला सामने आने के बाद उपभोक्ताओं को अपनी पुरानी शिकायतें सही साबित होने का दावा करने का आधार मिला है।
पंचनामा हुआ, लेकिन एफआईआर पर स्थिति स्पष्ट नहीं
मामले का राजफाश होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर प्रत्यक्षदर्शियों के बयान लिए और पंचनामा तैयार किया। वहीं, गैस एजेंसी संचालक की ओर से भी एफआइआर दर्ज कराने की बात कही गई थी। लेकिन घटना के बाद पर्याप्त समय बीतने के बावजूद प्राथमिकी और कार्रवाई को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से मामले पर खुलकर जानकारी नहीं दिए जाने से भी लोगों में नाराजगी है।
उपभोक्ताओं को जवाब का इंतजार, विपक्ष की चुप्पी पर भी चर्चा
गैस सिलिंडर हर परिवार की जरूरत है। ऐसे में यदि सिलिंडरों से गैस निकालने के आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका सीधा नुकसान उपभोक्ताओं को होता है। शहरवासी चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, आरोपों की सच्चाई सामने आए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर जनहित के मुद्दों को लेकर मुखर रहने वाले विपक्षी दलों की ओर से भी अब तक कोई प्रमुख प्रतिक्रिया सामने नहीं आने की चर्चा है। फिलहाल, शहरवासियों की निगाहें प्रशासन और गैस एजेंसी प्रबंधन पर टिकी हैं।
