प्रेस क्लब में पत्रकारिता की पात्रता पर उठे सवाल, फर्जी पत्रकारों के खिलाफ जंग छेड़ने वाले अध्यक्ष से अब सदस्यों की सदस्यता का हिसाब मांग रहे सवाल!
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में फर्जी पत्रकारों के खिलाफ प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा द्वारा जंग छेड़ने की पहल ने पत्रकारिता जगत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। फर्जी पत्रकारों पर कार्रवाई और पत्रकारिता की गरिमा बचाने की मुहिम निश्चित रूप से स्वागत योग्य है, लेकिन इसी के साथ एक बड़ा सवाल प्रेस क्लब की अपनी सदस्यता व्यवस्था को लेकर भी उठने लगा है। आखिर जिस संस्था का नेतृत्व फर्जी पत्रकारों के खिलाफ मोर्चा खोल रहा है, उस संस्था के सदस्यों की पत्रकारिता संबंधी पात्रता और पेशेवर पृष्ठभूमि की जांच कितनी पारदर्शी है?सूत्रों के हवाले से प्रेस क्लब के सदस्यों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। दावा किया जा रहा है कि सदस्यता सूची में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिनका नियमित पत्रकारिता से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। यहां तक कि जूते की दुकान, पान दुकान , स्कूल संचालक, राजनीति से जुड़े कारोबारियों और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय लोगों के सदस्य होने की चर्चाएं भी सुनाई दे रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है, लेकिन यदि इन चर्चाओं में सच्चाई है तो यह प्रेस क्लब की सदस्यता प्रक्रिया और पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।फर्जी पत्रकारों पर कार्रवाई से पहले सदस्यता की भी हो निष्पक्ष समीक्षासवाल यह नहीं है कि अध्यक्ष अजीत मिश्रा फर्जी पत्रकारों के खिलाफ अभियान क्यों चला रहे हैं, बल्कि सवाल यह है कि पत्रकारिता की शुचिता और गरिमा की कसौटी सभी के लिए एक समान क्यों नहीं होनी चाहिए? यदि पत्रकारिता के नाम पर गैर-पत्रकारों को संरक्षण नहीं मिलना चाहिए तो फिर प्रेस क्लब की सदस्यता में भी स्पष्ट पात्रता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।प्रेस क्लब कोई राजनीतिक संगठन या व्यापारिक संस्था नहीं, बल्कि पत्रकारिता की गरिमा, स्वतंत्रता और पेशेवर जिम्मेदारी का प्रतिनिधित्व करने वाला मंच है। ऐसे में सदस्यता का आधार भी पत्रकारिता से जुड़ा वास्तविक कार्य, अनुभव और निर्धारित नियम होने चाहिए।अजीत मिश्रा के सामने अब बड़ी चुनौतीप्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा के सामने अब दोहरी चुनौती है। पहली, फर्जी पत्रकारों के खिलाफ अपनी मुहिम को निष्पक्ष और प्रभावी बनाना तथा दूसरी, प्रेस क्लब की सदस्यता सूची और सदस्यों की पात्रता को लेकर उठ रही चर्चाओं पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करना।क्या प्रेस क्लब अपनी सदस्यता सूची सार्वजनिक करेगा? क्या सदस्यों की पत्रकारिता संबंधी पृष्ठभूमि और सदस्यता के दस्तावेजों की निष्पक्ष समीक्षा होगी? क्या राजनीतिक प्रभाव और व्यक्तिगत संबंधों से परे पत्रकारिता के वास्तविक कर्मवीरों को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा?बिलासपुर के पत्रकारिता जगत में इन सवालों के जवाब का इंतजार है।क्योंकि फर्जी पत्रकारिता के खिलाफ जंग तभी सार्थक होगी, जब पत्रकारिता की शुचिता का पैमाना दूसरों के लिए ही नहीं, अपने घर के भीतर भी समान रूप से लागू होगा।

