रायगढ़: गणेश चतुर्थी पर जन्मे हाथी शावक की छठी जंगल की सीमा पर मनाई गई
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में गणेश चतुर्थी के दिन जन्मे जंगली हाथी के नन्हे शावक की छठी मंगलवार को मनाई गई। धरमजयगढ़ वन मंडल के बाकारुमा रेंज के ससकोबा परिसर में जन्मे इस शावक के जन्म के करीब 15 दिन बाद ग्रामीणों ने जंगल की सीमा पर पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ पूजा-अर्चना की और दावत का आयोजन किया।
कार्यक्रम गनपतपुर और ससकोबा के बीच स्थित पुल के पास पहाड़ी जंगल की सीमा पर हुआ। ग्रामीणों ने जंगल में भोजन तैयार किया तथा शावक के स्वस्थ जीवन की कामना के साथ विधि-विधान से पूजा की। इलाके में इस आयोजन की चर्चा हो रही है।
कार्यक्रम में गनपतपुर गांव के सरपंच हरिओमशंकर राठिया, हरिश्चंद्र राठिया, ससकोबा टीएसएस अध्यक्ष बोधसिंह राठिया, ससकोबा सरपंच पति अनिल कुमार राठिया, मुनेश्वर राठिया और रैरूमा खुर्द के अमित कुमार राठिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और बच्चे शामिल रहे।
वन विभाग के अनुसार बाकारुमा रेंज के ससकोबा क्षेत्र में इस समय करीब 31 हाथियों का दल विचरण कर रहा है। विभाग की टीम दल की गतिविधियों पर निगरानी रखे हुए है। अधिकारियों ने गांव वालों से हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है।
गौरतलब है कि ससकोबा परिसर में गणेश चतुर्थी के दिन मादा हथिनी ने शावक को जन्म दिया था। उस समय इस दल में करीब 11 हाथी बताए गए थे। मां और शावक को सुरक्षित बताया गया था तथा वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी थी।


