छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़: भूतपूर्व सैनिकों ने राज्यपाल से की मुलाकात, ESM आरक्षण पर GAD पत्र की समीक्षा और संशोधन की मांग

रायपुर, 5 अक्टूबर: छत्तीसगढ़ में भूतपूर्व सैनिकों के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर भूतपूर्व सैनिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल रमेन डेका से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के 11 सितंबर 2026 के एक पत्र के प्रभावों की विधिक समीक्षा कराने तथा आवश्यक होने पर उसमें संशोधन या रोक लगाने की मांग की है।

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, GAD के पत्र में यह व्यवस्था बताई गई है कि यदि पात्र भूतपूर्व सैनिक अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं होते हैं तो उनके लिए निर्धारित पदों को गैर-सैनिक अभ्यर्थियों से भरा जा सकता है तथा लंबित रिक्तियों के निपटान की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। इस पर भूतपूर्व सैनिकों ने चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी किसी भी कार्रवाई में भूतपूर्व सैनिक नियम, 1985 के प्रावधानों, 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण तथा संबंधित वर्गवार आरक्षण व्यवस्था का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

ज्ञापन में कहा गया है कि किसी भी ESM पद को गैर-ESM अभ्यर्थी से भरने से पहले नियमों में उपलब्ध चयन-मानक में छूट संबंधी प्रावधानों का परीक्षण किया जाना चाहिए। साथ ही प्रत्येक मामले में कारण दर्ज करते हुए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी मांग की कि लंबित रिक्तियों और आरक्षण व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का रोस्टरवार परीक्षण किया जाए।

भूतपूर्व सैनिकों ने राज्य सैनिक बोर्ड की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि पुनर्वास और आरक्षण से जुड़े मामलों में संस्थागत व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखना आवश्यक है। उनके अनुसार, इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और नियमसम्मत बनी रहेगी।

ज्ञापन में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के एक फैसले का भी उल्लेख किया गया है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि न्यायालय के निर्णय और GAD के पत्र के बीच विधिक सामंजस्य को स्पष्ट किया जाना चाहिए तथा प्रशासनिक निर्णयों के पीछे के कारणों को अभिलेखित और पारदर्शी रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई है कि 11 सितंबर 2026 के GAD पत्र के आधार पर की जा रही या प्रस्तावित कार्रवाई की विधिसम्मत समीक्षा कराई जाए। साथ ही भूतपूर्व सैनिकों ने अनुरोध किया है कि ESM आरक्षण को प्रभावित करने वाले किसी भी निर्णय से पहले संबंधित नियमों, 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण और अन्य आरक्षण प्रावधानों का रोस्टरवार परीक्षण अनिवार्य किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर पत्र को संशोधित करने, वापस लेने या स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने की भी मांग की गई है।

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी नए लाभ या अतिरिक्त आरक्षण की नहीं है, बल्कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के प्रभावी और एकरूप अनुपालन को सुनिश्चित करने की है ताकि भूतपूर्व सैनिकों को नियमों के अनुरूप उनका अधिकार मिल सके।

प्रतिनिधिमंडल में पवन निषाद, गोवर्धन शर्मा, सुनील वर्मा, जेपी नायक, रवि साहू, डेमन साहू, राकेश सोनी, सोहनलाल साहू, रोमनाथ वर्मा, खेमराज शर्मा, पंकज कुमार, गणपत साहू, राजेश कुमार, अमरजीत सिंह, भूपेंद्र साहू और गजेन्द्र साहू शामिल थे।

सुनीता सिंह

एक जिम्मेदार और परिवार-केंद्रित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने जीवन में अनुशासन और ईमानदारी को सबसे ऊपर रखा है। पढ़ाई और घर संभालने के साथ-साथ समाज के छोटे कामों में भी रुचि रखती हैं। उन्हें बच्चों से बात करना, त्योहारों की तैयारी और घर की पुरानी यादें संजोना अच्छा लगता है। उनकी भाषा सरल है और सोच स्पष्ट।

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