छत्तीसगढ़

छोटी आदतें जो सालों तक पीठ को सुरक्षित रखती हैं-एमएमआई

डॉ. घनश्याम बिसन ससापरधी

रायपुर, 16 अक्टूबर। डॉ. घनश्याम बिसन ससापरधी, कंसलटेंट , न्यूरोसर्जरी, एमएमआई नारायणा अस्पताल ने बताया कि क्लिनिक में मेरे पास ऐसे कई लोग आते हैं जिन्होंने तीस साल तक अपनी रीढ़ का ध्यान नहीं रखा, और अब दस मिनट सिफऱ् पीठ दर्द की शिकायत करते रहते हैं। सच यह है कि रीढ़ अचानक खराब नहीं होती। यह रोज़ की छोटी-छोटी हरकतों के हज़ारों बार दोहराए जाने का नतीजा होती है। अच्छी बात यह है कि इन आदतों को बदला जा सकता है।

डॉ. ससापरधी ने बताया कि रीढ़ में 24 गतिशील कशेरुकाएँ (वर्टिब्रा) होती हैं। ये डिस्क से जुड़ी होती हैं और मांसपेशियाँ इन्हें थामे रखती हैं। रीढ़ को हरकत का बोझ उठाने के लिए ही बनाया गया है। डिस्क में खून की नलियाँ नहीं होतीं, इसलिए उन्हें पोषण तभी मिलता है जब शरीर हरकत में हो। इसीलिए रोज़ 8 घंटे पैदल चलने वाले व्यक्ति को रीढ़ की परेशानी, 9 घंटे बिना हिले बैठे रहने वाले दफ़्तर के कर्मचारी से कम होती है। दफ़्तर में काम करने वाले को रीढ़ पर पडऩे वाले भारी बोझ से ज़्यादा नुकसान एक ही स्थिति में बैठे रहने से होता है।

डॉ. ससापरधी ने बताया कि कोई एक आदर्श मुद्रा नहीं होती। सही तरीके से बैठने पर भी दो घंटे बाद पीठ दर्द करने लगती है। इसलिए हर 30 से 45 मिनट में अपनी स्थिति बदलें। खड़े हों, थोड़ा चलें, पानी पिएँ। बैठते समय कंप्यूटर की स्क्रीन या किताब आँखों की सीध में रखें। फ़ोन को भी नीचे झुककर देखने के बजाय आँखों की सीध में उठाकर देखें।

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