छत्तीसगढ़

भ्रष्टाचार के मामलों में टुटेजा को मिली जमानत में दखल से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- शक को पुख्ता सबूत में बदलना होगा

छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका खारिज, जमानत के दुरुपयोग पर हाईकोर्ट जाने की छूट

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 29अक्टूबर।छत्तीसगढ़ के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा को भ्रष्टाचार के नए मामलों में मिली जमानत के खिलाफ राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। कोर्ट ने हाईकोर्ट के जमानत आदेशों में दखल देने से इनकार करते हुए साफ कहा कि भ्रष्टाचार में शामिल होने का बेहद मजबूत शक हो सकता है,लेकिन उसे पुख्ता सबूत में बदलना जांच एजेंसी की जिम्मेदारी है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत,जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी)का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट ने जमानत देते समय जो टिप्पणियां की थीं,उनका ट्रायल कोर्ट पर कोई असर नहीं पड़ना चाहिए।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इन मामलों में आरोपियों के भ्रष्टाचार में शामिल होने का मजबूत संदेह है। हालांकि,बेंच ने कहा कि केवल संदेह के आधार पर दोष साबित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलें सुनने के बाद कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों में शक बहुत मजबूत हो सकता है,लेकिन उसे ठोस और विश्वसनीय सबूत में बदलना जरूरी है। यह पूरी तरह जांच एजेंसी की क्षमता और उसके जुटाए गए साक्ष्यों पर निर्भर करेगा।

छत्तीसगढ़ सरकार ने दलील दी थी कि हाईकोर्ट के जमानत आदेशों में की गई कुछ टिप्पणियां आरोप तय करने और संज्ञान लेने के स्तर पर राज्य के पक्ष को प्रभावित कर सकती हैं। सरकार का कहना था कि इन मामलों में एक ही समूह के आरोपियों की भूमिका सामने आई है और अलग-अलग घोटालों के जरिए सरकारी संसाधनों का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया।

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