छत्तीसगढ़

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज की भर्ती रद्द करने का फैसला निरस्त

448 पदों के लिए चयन प्रक्रिया वहीं से शुरू करने का आदेश

छत्तीसगढ़ संवाददाता

बिलासपुर, 30 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अंबिकापुर के शासकीय मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2022 से चल रही भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर व्यापमं के माध्यम से नई भर्ती कराने के फैसले को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में शामिल उम्मीदवारों को नियुक्ति का अपने आप अधिकार नहीं मिल जाता, लेकिन सरकार भी बिना ठोस और कानूनी आधार के चल रही भर्ती को मनमाने ढंग से खत्म नहीं कर सकती।

जस्टिस बिभु दत्त गुरु की सिंगल बेंच ने 28 अक्टूबर को दिए फैसले में भर्ती प्रक्रिया को उसी चरण से दोबारा शुरू करने और तीन महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है।

राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय मेडिकल कॉलेज, अंबिकापुर ने 20 जुलाई 2022 को विभिन्न पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके बाद 2023 में संशोधित विज्ञापन भी जारी किए गए।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, भर्ती के लिए मेरिट लिस्ट तैयार कर 23 अगस्त 2023 को दस्तावेज सत्यापन के लिए उम्मीदवारों को बुलाया गया था। हालांकि, राज्य सरकार के मुताबिक अपरिहार्य कारणों से 21 अगस्त 2023 को यह कार्यक्रम रद्द कर दिया गया।

इसके बाद 23 अप्रैल 2025 को कॉलेज की जनरल बॉडी की बैठक में भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर व्यापमं के माध्यम से नई भर्ती कराने का फैसला लिया गया। बैठक में डीन ने बताया था कि एक लाख से अधिक आवेदन आने के कारण भर्ती प्रक्रिया पूरी करने में काफी समय लगेगा। इस फैसले को दस अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

याचिकाकर्ताओं के वकील पवन श्रीवास्तव ने कोर्ट में दलील दी कि उम्मीदवार नियुक्ति का कोई पूर्ण अधिकार नहीं जता रहे हैं। उनकी आपत्ति भर्ती प्रक्रिया को बिना ठोस आधार के रद्द करने को लेकर है।

उन्होंने डीन की ओर से 19 जून 2025 को चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को भेजे गए पत्र का हवाला दिया। इस पत्र के अनुसार, 63 तृतीय श्रेणी पदों के लिए 10,374 और 385 चतुर्थ श्रेणी पदों के लिए 44,961 आवेदन प्राप्त हुए थे। यानी कुल 448 पदों के लिए 55,335 आवेदन आए थे।

ऐसे में जनरल बॉडी की बैठक में बताए गए एक लाख से अधिक आवेदनों और आधिकारिक पत्र में दर्ज आंकड़ों के बीच अंतर का स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया। याचिकाकर्ताओं ने यह आशंका भी जताई कि नई भर्ती शुरू होने से कुछ उम्मीदवार अधिकतम आयु सीमा पार कर सकते हैं और उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।

राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता सुयशधर बड़गैया ने कहा कि चयन प्रक्रिया में शामिल होने मात्र से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का अटल अधिकार नहीं मिल जाता। भर्ती का तरीका बदलना सक्षम प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में है। सरकार ने यह भी दलील दी कि फैसला संस्थान के व्यापक हित में लिया गया था और इसके पीछे किसी तरह का पक्षपात या दुर्भावना नहीं थी।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए माना कि चयन प्रक्रिया में शामिल होने से नियुक्ति का अधिकार पैदा नहीं होता। लेकिन कोर्ट ने साथ ही स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि सरकार को चल रही भर्ती रद्द करने की असीमित छूट मिल जाती है।

कोर्ट ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में एकरूपता, पारदर्शिता और बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए उपयुक्त परिस्थितियों में व्यापमं के माध्यम से भर्ती कराना सही हो सकता है। लेकिन केवल यह कहना कि व्यापमं से भर्ती कराना ज्यादा सुविधाजनक या बेहतर होगा, पहले से चल रही चयन प्रक्रिया को खत्म करने का पर्याप्त आधार नहीं है।

बेंच ने यह भी गौर किया कि राज्य सरकार ने पहले की भर्ती प्रक्रिया में किसी अवैधता या प्रक्रियागत खामी की पहचान नहीं की थी। जब चयन प्रक्रिया शुरुआती चरण से आगे बढ़ चुकी थी, तब उसे पूरा क्यों नहीं किया जा सकता था, इसका भी संतोषजनक कारण नहीं बताया गया।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनरल बॉडी का प्रस्ताव प्रशासनिक फैसले को न्यायिक समीक्षा से बचा नहीं सकता, खासकर तब जब फैसले का आधार बने तथ्यों पर ही सवाल उठ रहे हों।

हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2025 की जनरल बॉडी के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसके तहत विज्ञापन रद्द कर भर्ती प्रक्रिया बंद की गई थी। इसके साथ ही 19 जून 2025 के इससे जुड़े आदेश को भी निरस्त कर दिया गया।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि भर्ती प्रक्रिया को वहीं से आगे बढ़ाया जाए, जहां उसे रोका गया था। उम्मीदवारों की पात्रता और दस्तावेजों का सत्यापन करने, उनकी तुलनात्मक मेरिट तय करने तथा लागू नियमों के अनुसार पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश जारी करने की प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी की जाए।

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