डांगी के खिलाफ विभागीय जांच में महिला आईपीएस पारुल माथुर को जिम्मेदारी

प्रारंभिक जांच में आरोप प्रमाणित,पीड़िता की आपत्ति पर बदला गया प्रस्तुतकर्ता अधिकारी
छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 14अक्टूबर।छत्तीसगढ़ के निलंबित आईपीएसअधिकारी और बिलासपुर के तत्कालीन आईजीरतनलाल डांगी के खिलाफ महिला योगा टीचर की शिकायत पर चल रही विभागीय जांच में अब महिला आईपीएसअधिकारी पारुल माथुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया है। पीड़िता की आपत्ति के बाद गृह विभाग ने यह बदलाव किया। मामले में प्रारंभिक जांच के दौरान आरोप प्रमाणित पाए जाने की जानकारी भी पुलिस विभाग ने हाईकोर्ट को दी है।
बिलासपुर के राजकिशोर नगर निवासी महिला योगा टीचर ने रतनलाल डांगी पर अश्लील फोटो और मैसेज भेजकर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए थे। महिला की शिकायत पर पुलिस महानिदेशक ने आईपीएसआनंद छाबड़ा और मिलना कुर्रे को प्रारंभिक जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी।
हालांकि,पीड़िता ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जांच में पक्षपात और अनियमितताएं बरती गईं तथा डांगी को बचाने की कोशिश की गई। इसके बाद उसने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और ऋषभदेव साहू के माध्यम से बिलासपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जांच अधिकारियों को बदलने की मांग की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने गृह विभाग के सचिव और पुलिस महानिदेशक से जवाब मांगा था। सुनवाई के दौरान पुलिस विभाग ने अदालत को बताया कि प्रारंभिक जांच में शिकायत के आरोप प्रमाणित पाए गए हैं और निलंबित आईपीएसअधिकारी के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया जा चुका है।
इसके बाद विभागीय जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दीपांशु विजय काबरा को जांच अधिकारी और आईपीएसप्रशांत अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था।
पीड़िता ने दोबारा आपत्ति जताते हुए संवेदनशील मामले में महिला आईपीएसअधिकारी को जिम्मेदारी देने की मांग की। इस पर गृह विभाग ने29सितंबर2026को आदेश जारी कर प्रशांत अग्रवाल की जगह पारुल माथुर को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त कर दिया।
प्रस्तुतकर्ता अधिकारी का काम विभागीय जांच में सरकार की ओर से पक्ष रखना और संबंधित दस्तावेज व साक्ष्य पेश करना होता है। इस तरह जांच अधिकारी के रूप में दीपांशु काबरा और प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के रूप में पारुल माथुर को जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार की ओर से जांच व्यवस्था में किए गए बदलाव की जानकारी मिलने के बाद हाईकोर्ट ने गृह विभाग के सचिव और पुलिस महानिदेशक के जवाब से संतुष्ट होकर याचिका का अंतिम निराकरण कर दिया।


