नीरू ढांडा ने एशियाई खेलों में रचा इतिहास, महिला ट्रैप में स्वर्ण के साथ एशियन रिकॉर्ड

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियाई खेलों में भारतीय निशानेबाज नीरू ढांडा ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वह एशियाई खेलों में व्यक्तिगत ट्रैप स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।
26 वर्षीय शूटर ने आइची प्रीफेक्चरल जनरल शूटिंग गैलरी में हुए फाइनल में 30 में से 28 टारगेट हिट किए और नया एशियन रिकॉर्ड कायम किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड 24 का था। चीन की सुन युनोंग 26 अंकों के साथ रजत पर रहीं, जबकि कुवैत की हाजर अब्दुलमलिक ने 21 अंकों के साथ कांस्य पदक जीता।
इस जीत के साथ भारत के लिए व्यक्तिगत ट्रैप स्वर्ण का 48 साल का इंतजार भी खत्म हो गया। इससे पहले 1978 में बैंकॉक एशियाई खेलों में पुरुष ट्रैप स्पर्धा में रणधीर सिंह ने स्वर्ण पदक जीता था। नीरू एशियाई खेलों में महिला ट्रैप व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक जीतने वाली पहली भारतीय भी हैं। यह पदक भारत का इन खेलों का पांचवां स्वर्ण था।
क्वालीफिकेशन और टीम रजत
नीरू ने तीन दिन चले क्वालीफिकेशन में 125 में से 118 का स्कोर बनाकर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। कतर की रे बासिल का भी यही स्कोर रहा। दोनों संयुक्त रूप से शीर्ष पर रहीं। यह क्वालीफिकेशन स्कोर खेलों का रिकॉर्ड भी रहा।
उसी दिन सुबह नीरू ने आशिमा अहलावत और मनीषा कीर के साथ महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता। भारतीय तिकड़ी का संयुक्त स्कोर 328 रहा। चीन 346 अंकों के साथ स्वर्ण पर रहा, जबकि कुवैत 325 अंकों के साथ कांस्य पर रहा। आशिमा का व्यक्तिगत स्कोर 106 और मनीषा का 104 रहा। दोनों व्यक्तिगत फाइनल में नहीं पहुंचीं।
अस्पताल से पोडियम तक
प्रतियोगिता से करीब दस दिन पहले नीरू को गंभीर इन्फेक्शन हो गया था। वे दिल्ली के एक अस्पताल में तीन दिन भर्ती रहीं। नेशनल कोच पीटर विल्सन के अनुसार उनकी स्थिति नाजुक थी और खेलों में शामिल होना अनिश्चित लग रहा था।
नीरू ने खुद बताया कि नेशनल कैंप के दौरान वे कमरे में ही रहीं और कई दिनों तक ठोस भोजन नहीं कर सकीं। उन्होंने करीब साढ़े तीन सप्ताह तक नियमित ट्रेनिंग नहीं की। इसके बावजूद उन्होंने फाइनल में संयम बनाए रखा और बारिश वाले मौसम में भी सटीक निशाने साधे।
किसान परिवार से सेना तक का सफर
नीरू ढांडा का जन्म 25 मई 2000 को हरियाणा के जींद जिले में हुआ। उनके पिता किसान हैं। खेल के प्रति रुचि तब जागी जब उन्होंने अपने चचेरे भाई लक्ष्य श्योराण को 2018 एशियाई खेलों में रजत पदक जीतते देखा। इसके बाद वे भोपाल स्थित मध्य प्रदेश स्टेट शूटिंग अकादमी गईं, जहां बिना भारी खर्च के सुविधाएं उपलब्ध हुईं।
वे भारतीय सेना में नायब सूबेदार हैं और महू स्थित आर्मी मार्कमैनशिप यूनिट में ट्रेनिंग लेती हैं। उनके विकास में भारतीय खेल प्राधिकरण की टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम और ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट का सहयोग रहा है। नेशनल ट्रैप कोच पीटर विल्सन और भारतीय ओलंपियन मनशेर सिंह ने उनकी तैयारी कराई।
उसी दिन एथलेटिक्स में भी स्वर्ण
उसी दिन बाद में भारतीय महिला 4×400 मीटर रिले टीम ने भी स्वर्ण पदक जीत लिया। किरण पहल, एम.आर. पूवम्मा, प्राची और विथ्या रामराज ने 3:29.69 का समय निकालकर इन खेलों में भारत का पहला एथलेटिक्स स्वर्ण सुनिश्चित किया। 29 सितंबर भारतीय दल के लिए अब तक का सबसे मजबूत दिन रहा।
एशियाई खेल 4 अक्टूबर तक चलेंगे। नीरू ढांडा के अगले चरण में रिकवरी और राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की समीक्षा शामिल रहेगी।



