देश

114 राफेल फाइटर जेट्स की डील पर बड़ा अपडेट: इस वित्त वर्ष के अंत तक पूरा हो सकता है कॉन्ट्रैक्ट

नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की ताकत को और बढ़ाने के लिए भारत सरकार एक अहम और बड़ा कदम उठाने जा रही है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इस बात की पुष्टि की है कि वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है। हाल ही में एक बयान में उन्होंने संकेत दिया कि इस बहुप्रतीक्षित मेगा डिफेंस प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक पूरा होने की पूरी संभावना है।

‘बाय एंड मेक’ मॉडल पर आधारित होगी यह अहम डील

रक्षा सचिव ने बताया कि यह पूरी खरीद प्रक्रिया ‘बाय एंड मेक’ (Buy and Make) कार्यक्रम के तहत की जा रही है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इन 114 राफेल विमानों का एक बड़ा हिस्सा भारत में ही असेंबल किया जाएगा। सरकार का मुख्य फोकस देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसी कड़ी में प्रयास किया जा रहा है कि इन नए राफेल विमानों में भारतीय हथियार प्रणालियों, तकनीक और स्वदेशी कलपुर्जों का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाए, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बल मिले।

राफेल में होगा स्वदेशी हथियारों का एकीकरण

भारतीय रक्षा उद्योग और वायुसेना के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है कि फ्रांस की एविएशन कंपनी डसॉल्ट (Dassault) राफेल जेट्स में भारतीय हथियारों को इंटिग्रेट करने पर सहमत हो गई है। रक्षा सचिव ने जानकारी देते हुए बताया कि भारत ने जो राफेल मरीन विमान नौसेना के लिए खरीदे थे, फ्रांसीसी कंपनी उनमें भी स्वदेशी हथियारों को लगाने पर सहमत हो चुकी है। अब 114 विमानों की नई डील में भी भारतीय राडार, मिसाइल और अन्य आधुनिक प्रणालियों को शामिल करने पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

क्या है प्रोजेक्ट की वर्तमान स्थिति?

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, फिलहाल रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) के तहत कंपनियों द्वारा जमा की गई बोलियों (bids) का मूल्यांकन किया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय इसके तकनीकी और आर्थिक पहलुओं की गहन जांच कर रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के मुताबिक, यह मूल्यांकन प्रक्रिया अपने निर्णायक चरण की ओर बढ़ रही है। सरकार को उम्मीद है कि इस साल के अंत तक इस खरीद प्रक्रिया के ठोस नतीजे सामने आ जाएंगे और डील पर अंतिम मुहर लग जाएगी।

114 राफेल डील की मुख्य बातें:

  • विशाल बेड़ा: भारतीय वायुसेना को 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) मिलेंगे, जो स्क्वाड्रन की घटती संख्या को पूरा करेंगे।
  • आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा: डील के तहत भारत में ही लड़ाकू विमानों की असेंबली और निर्माण की दूसरी लाइन स्थापित की जाएगी।
  • स्वदेशी हथियार: इन आधुनिक लड़ाकू विमानों को पूर्ण रूप से भारतीय तकनीक और स्वदेशी मारक हथियारों से लैस किया जाएगा।
  • तेजस पर नहीं पड़ेगा असर: रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस डील से स्वदेशी LCA तेजस मार्क-2 के विकास और निर्माण पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील के पूरा होने से ना सिर्फ भारतीय वायुसेना की रणनीतिक मारक क्षमता में कई गुना बढ़ोतरी होगी, बल्कि देश के एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी नई ऊंचाइयां मिलेंगी। भारत में राफेल की असेंबली लाइन शुरू होने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और रक्षा क्षेत्र में देश की निर्भरता विदेशी आयात पर कम होगी।

प्रियंका वर्मा

शहर और कस्बे दोनों की दुनिया से परिचित हैं। वे परिवार के बीच रहकर बड़ी हुईं और छोटी उम्र से ही लोगों के चेहरे और बातचीत पर ध्यान देती रही हैं। उन्हें लिखना-पढ़ना, पुराने गीत सुनना और रिश्तेदारों से लंबी बातें करना पसंद है। उनकी नजर उन छोटी बातों पर जाती है जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button