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चुनाव आयोग का ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) विवाद: 16 राज्यों में मतदाता सूची को लेकर क्या है सच?

हाल ही में चुनाव आयोग (Election Commission of India) के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision – SIR) कार्यक्रम को लेकर कई ख़बरें सामने आ रही हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि चुनाव आयोग के अधिकारियों के बीच मतभेद के कारण 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के ‘स्पेशल समरी रिवीजन’ (SSR) में देरी हो रही है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह बात भी कही गई कि चुनाव आयुक्तों के बीच 14 बार आपत्तियां दर्ज की गईं। आइए जानते हैं क्या है पूरी सच्चाई और क्या है चुनाव आयोग का SIR अभियान।

क्या है SIR (Special Intensive Revision)?

SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अपडेट और सटीक बनाने के लिए चलाया जा रहा एक विशेष और व्यापक अभियान है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक (18 वर्ष से अधिक) मतदान से वंचित न रहे और कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न रहे। SIR के तहत मुख्य कार्य:
  • नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना।
  • मृत या स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के नाम सूची से हटाना।
  • नाम, पते या अन्य विवरणों में हुई त्रुटियों को सुधारना।
  • डुप्लीकेट (एक से अधिक जगह दर्ज) नामों को हटाना।
  • बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन करना।

चुनाव आयोग के मतभेद की ख़बरों की क्या है सच्चाई?

सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक दलों द्वारा यह दावा किया गया था कि SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेद हैं और 14 सवाल या आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जिसके कारण 16 राज्यों में प्रक्रिया रुकी हुई है। फैक्ट चेक: चुनाव आयोग ने इन दावों का खंडन किया है। आयोग के अनुसार, यह एक ‘सामान्य प्रक्रिया’ का हिस्सा है और चुनाव आयुक्तों के बीच किसी भी प्रकार के मतभेद की खबरें भ्रामक हैं। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने भी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया था कि SIR चुनाव आयोग के वैधानिक अधिकार क्षेत्र (जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 21(3)) में आता है और यह निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी के अनुरूप है।

16 राज्यों में SIR का क्या है स्टेटस?

भारत निर्वाचन आयोग देशभर में चरणबद्ध तरीके से SIR लागू कर रहा है:
  • पहला चरण: 24 जून 2025 को बिहार से शुरू हुआ।
  • दूसरा चरण: 28 अक्टूबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुआ। असम में SIR की जगह विशेष पुनरीक्षण (Special Revision) 10 फरवरी 2026 को पूरा किया गया।
  • तीसरा चरण: इसमें 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। इनमें से ओडिशा, मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर में अंतिम मतदाता सूची सितंबर 2026 के पहले सप्ताह में जारी होने वाली थी, जबकि अन्य राज्यों के लिए डेडलाइन अक्टूबर से दिसंबर 2026 के बीच तय की गई है।
हाल ही में चुनाव आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि 20 राज्यों में जहां SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां छूटे हुए पात्र मतदाताओं और नए युवा मतदाताओं को जोड़ने के लिए एक विशेष अभियान (Special Drive) चलाया जाए। इसके लिए BLOs को घर-घर जाकर सत्यापन करने और फॉर्म 6 भरवाने के निर्देश दिए गए हैं।

मतदाता सूची से भारी संख्या में नाम कटने का विवाद

विपक्ष ने आरोप लगाया था कि SIR के पहले और दूसरे चरण में करीब 7.8 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इस पर चुनाव आयोग की ओर से साफ किया गया है कि जो नाम हटाए गए हैं, वे मुख्य रूप से मृत व्यक्तियों के, उन लोगों के जो स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके हैं, या डुप्लीकेट एंट्री वाले नाम थे। महाराष्ट्र जैसे राज्यों में चुनाव आयोग ने नाम हटाए जाने के दावों और आपत्तियों को दर्ज कराने की समय-सीमा 12 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी है और अंतिम मतदाता सूची अब 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। साथ ही, जिन लोगों को नोटिस मिले हैं, उनकी सुनवाई के लिए खास मदद केंद्र और ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था भी की गई है।

निष्कर्ष

चुनाव आयोग के अधिकारियों के बीच गंभीर मतभेद की खबरें भ्रामक हैं। 16 राज्यों में मतदाता सूची को अपडेट करने की SIR प्रक्रिया चुनाव आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार तीसरे चरण में चल रही है और यह किसी विवाद की वजह से नहीं रुकी है। इसका उद्देश्य आगामी चुनावों के लिए एक स्वच्छ और सटीक मतदाता सूची तैयार करना है।

सुनीता सिंह

एक जिम्मेदार और परिवार-केंद्रित व्यक्तित्व हैं। उन्होंने जीवन में अनुशासन और ईमानदारी को सबसे ऊपर रखा है। पढ़ाई और घर संभालने के साथ-साथ समाज के छोटे कामों में भी रुचि रखती हैं। उन्हें बच्चों से बात करना, त्योहारों की तैयारी और घर की पुरानी यादें संजोना अच्छा लगता है। उनकी भाषा सरल है और सोच स्पष्ट।

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