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यूपी मंडी परिषद: किसानों की सुविधाओं और व्यवस्था में पारदर्शिता पर जोर, नवनियुक्त सचिवों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की किसान हितैषी नीतियों को धरातल पर उतारने के लिए राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने कदम बढ़ा दिए हैं। मंडी व्यवस्था को अधिक प्रभावी और किसान केंद्रित बनाने के उद्देश्य से मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने नवनियुक्त मंडी सचिवों के साथ संवाद किया और उन्हें किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में निदेशक ने दोनों महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि गांधी जी के सत्य-अहिंसा और शास्त्री जी के सादगी व ईमानदारी के आदर्श वर्तमान समय में भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं।

नवनियुक्त सचिवों को दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग

निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रदेश की मंडी व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नवनियुक्त मंडी सचिवों को जल्द ही विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा:
  • मंडी संचालन और विभागीय कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी।
  • किसानों की समस्याओं और शिकायतों का त्वरित एवं समयबद्ध निस्तारण।
  • राजस्व प्रक्रियाओं का उचित क्रियान्वयन।
  • आर्थिक रूप से कमजोर किसानों की विशेष सहायता के लिए कार्ययोजना।

किसानों और आढ़तियों से नियमित संवाद के निर्देश

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि मंडियां केवल कृषि उपज की खरीद-बिक्री का केंद्र नहीं हैं, बल्कि किसानों को उचित वातावरण और सुविधाएं उपलब्ध कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। निदेशक ने सचिवों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों और आढ़तियों से नियमित संवाद स्थापित करें। कृषि उपज की बिक्री व्यवस्था की नियमित निगरानी की जाए ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

मंडी सचिव हैं महत्वपूर्ण कड़ी

विपणन निदेशक टी.के. शीबू ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में मंडी प्रशासन और किसानों के बीच मंडी सचिव एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। सरकार का पूरा प्रयास है कि सरकारी व्यवस्थाओं को अधिक जवाबदेह बनाया जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि मंडियों में किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी हर समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जा रहा है।

मनोज तिवारी

पारंपरिक परिवार से आते हैं। घर में पूजा-पाठ, बड़ों का सम्मान और सादा रहन-सहन रहा। उन्होंने जीवन में धैर्य और संयम सीखा। उन्हें मंदिर के प्रांगण में बैठना, गंगा किनारे की यादें और पुराने रिश्तों को जीवित रखना अच्छा लगता है। वे कम शब्दों में बात करते हैं, लेकिन बात पूरी होती है।

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