फ्लाईदुबई विमान हाइजैक मामले के बाद भारत सरकार अलर्ट, गृह मंत्रालय कर रहा कॉकपिट सुरक्षा की समीक्षा

हाल ही में फ्लाईदुबई (Flydubai) की एक उड़ान को हाइजैक करने के प्रयास और कॉकपिट के भीतर हुई हिंसक घटना के बाद भारत सरकार पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गई है। इस गंभीर सुरक्षा चूक को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों ने मामले पर कड़ी नजर रखी हुई है।
कॉकपिट सुरक्षा को लेकर बढ़ाई गई सतर्कता
इस घटना ने उड़ान के दौरान कॉकपिट के भीतर से ही पैदा होने वाले खतरे की ओर दुनिया भर का ध्यान खींचा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्लाईदुबई की उड़ान में एक को-पायलट ने कॉकपिट के अंदर भारतीय कैप्टन पर जानलेवा हमला कर विमान को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी। इस तरह की अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए भारत सरकार ने देश के तमाम एयरपोर्ट्स और भारतीय विमानों का सिक्योरिटी रिव्यू करने का फैसला किया है।
उड्डयन सुरक्षा के लिए उठाए जा सकते हैं ये कड़े कदम
भारत सरकार विमानों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता बनाने के लिए कई नए नियमों और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) पर विचार कर रही है। कॉकपिट सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए निम्नलिखित बदलाव किए जा सकते हैं:
- एयर मार्शल की तैनाती: संवेदनशील मार्गों, विशेषकर इजरायल जैसे हाई-रिस्क वाले रूट्स पर उड़ान भरने वाले भारतीय विमानों में एयर मार्शल की तैनाती पर विचार किया जा रहा है।
- पायलटों की मनोवैज्ञानिक जांच: उड़ान की जिम्मेदारी सौंपने से पहले पायलटों और क्रू मेंबर्स का नियमित रूप से साइको टेस्ट (मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण) कराया जा सकता है।
- ड्यूटी रोस्टर में बदलाव: ऐसे पायलट या क्रू मेंबर्स जिनके बीच कोई आपसी विवाद या तनातनी का इतिहास हो, उन्हें एक साथ ड्यूटी पर न भेजने के नियम लागू किए जा सकते हैं।
- सुरक्षा जांच में सख्ती: क्रू मेंबर्स और कॉकपिट की जांच को और सख्त किया जाएगा, ताकि कोई भी नुकसानदायक वस्तु अंदर न ले जाई जा सके।
फिलहाल, गृह मंत्रालय और संबंधित उड्डयन एजेंसियां फ्लाईदुबई मामले की अंतरराष्ट्रीय जांच की बारीकी से मॉनिटरिंग कर रही हैं। सरकार तमाम भारतीय एयरलाइंस और एयरपोर्ट ऑपरेटरों के लगातार संपर्क में है, ताकि भविष्य में इस तरह के किसी भी संभावित खतरे को टाला जा सके और यात्रियों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।



