पंजाब में 24 साल में तीसरा सबसे सूखा मानसून, 38% कम हुई बारिश; भूजल पर बढ़ा संकट

पटियाला: पंजाब में इस बार मानसून की विदाई के साथ बारिश के आंकड़ों ने किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में जून से सितंबर 2026 के बीच सामान्य से 38 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। वर्ष 2000 के बाद से यह तीसरा ऐसा साल है, जब मानसून इतना कमजोर रहा है।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस मानसून सीजन में केवल 272.8 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि पंजाब का सामान्य औसत आंकड़ा 439.8 मिलीमीटर है। इससे पहले साल 2014 में 50 फीसदी और 2012 में 47 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई थी। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल (2025) में 620.9 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य से 41 फीसदी अधिक थी। सिर्फ एक साल के भीतर मानसूनी बारिश में इतनी भारी गिरावट आई है। लगातार दो कमजोर मानसून (2024 में 28% कम) का सामना कर रहे पंजाब के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।
भूजल पर बढ़ता दबाव
महीनों के आधार पर देखें तो 2026 में जून और सितंबर में सिर्फ 29.5-29.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। जुलाई में 119.3 मिलीमीटर और अगस्त में 94.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जो जून और सितंबर की भारी कमी की भरपाई नहीं कर पाई। पंजाब की खेती मुख्य रूप से भूजल पर निर्भर है। मानसून की कमजोरी के कारण सिंचाई के लिए ट्यूबलवेल पर दबाव बढ़ेगा, जिससे भूजल का प्राकृतिक रिचार्ज भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
बीते वर्षों में पंजाब में बारिश के आंकड़े
| साल | बारिश (मिलीमीटर में) | सामान्य से स्थिति |
|---|---|---|
| 2026 | 272.8 मिमी | 38% कम |
| 2025 | 620.9 मिमी | 41% ज्यादा |
| 2024 | 314.6 मिमी | 28% कम |
| 2014 | 243.9 मिमी | 50% कम |
| 2012 | 262.2 मिमी | 47% कम |
अल नीनो के प्रभाव से भटका मानसून
पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी (PAU) लुधियाना के जलवायु परिवर्तन एवं कृषि मौसम विभाग की विशेषज्ञ डा. पवनीत कौर किंगरा का कहना है कि इस बार का मानसून अल नीनो के प्रभाव में था। इसी वजह से पहले ही सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया गया था। बारिश लाने वाले लो प्रेशर सिस्टम और मानसूनी गतिविधियां इस बार पंजाब के बजाय देश के अन्य हिस्सों में ज्यादा सक्रिय रहीं। जुलाई के मध्य तक ही पंजाब में बारिश सामान्य से 24 फीसदी कम दर्ज की गई थी, और मानसून की गतिविधि आगे भी लगातार कमजोर बनी रही, जिससे सितंबर तक भी बारिश की यह कमी पूरी नहीं हो सकी।



