युद्ध अभ्यास 2026 संपन्न: औली और महाजन में भारत-अमेरिका की सेनाओं ने आधुनिक रणनीति व स्वदेशी तकनीक का प्रदर्शन किया

भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच वार्षिक द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास’ का 22वां संस्करण उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक साथ संपन्न हुआ है। इस बार अभ्यास पहली बार दो थिएटर प्रारूप में आयोजित किया गया, जिसमें पर्वतीय और रेगिस्तानी दोनों परिस्थितियों में संयुक्त अभियान चलाए गए।
अभ्यास का औपचारिक शुभारंभ 15 सितंबर 2026 को औली फॉरेन ट्रेनिंग नोड में हुआ था। समापन समारोह 27 सितंबर को महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आयोजित किया गया। दोनों देशों के लगभग 600-600 सैन्यकर्मी इसमें शामिल रहे। अमेरिकी टुकड़ी अलास्का स्थित 11वीं एयरबोर्न डिवीजन की 1st मोबाइल ब्रिगेड कॉम्बैट टीम और मल्टी-डोमेन टास्क फोर्स के तत्वों से बनी थी, जबकि भारतीय पक्ष का नेतृत्व 14 इन्फैंट्री डिवीजन ने किया।
औली में पर्वतीय और काउंटर-टेरर प्रशिक्षण
औली में प्रशिक्षण का केंद्र उच्च पर्वतीय युद्ध, जंगल वारफेयर, रॉक-फेस रैपलिंग, स्नाइपर फायरिंग और काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशन रहा। दोनों सेनाओं के जवानों ने एकीकृत दस्तों के रूप में बिल्डिंग-क्लियरेंस और रूम-इंटरवेंशन ड्रिल किए। इन अभियानों में ड्रोन, रोबोटिक डॉग, प्रशिक्षित सैन्य कुत्ते और स्नाइपर टीमों का समन्वित इस्तेमाल किया गया।
भारतीय सेना के हेलीकॉप्टरों से संयुक्त एयर असॉल्ट भी किए गए, जिसमें अमेरिकी और भारतीय प्लाटून एक ही फॉर्मेशन में उतरे। सैनिकों ने एक-दूसरे के छोटे हथियारों और ड्रोन प्लेटफॉर्म का आदान-प्रदान कर व्यावहारिक अनुभव हासिल किया। औली के इंडोर शूटिंग रेंज में स्वदेशी एके-203 असॉल्ट राइफल से फायरिंग का अभ्यास भी हुआ।
महाजन में फायरपावर और काउंटर-ड्रोन क्षमता
राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में फोकस लंबी दूरी की सटीक गोलाबारी, आर्टिलरी समन्वय और काउंटर-ड्रोन क्षमता पर रहा। भारतीय पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, धनुष 155 मिमी तोप और एम-777 अल्ट्रा लाइट होवित्जर के साथ अमेरिकी एचआईएमएआरएस सिस्टम का संयुक्त प्रशिक्षण हुआ। एल-70 एयर डिफेंस गन और अमेरिकी एम-एलआईडीएस काउंटर-यूएएस सिस्टम भी शामिल रहे।
भारतीय सेना के एएच-64ई अपाचे अटैक हेलीकॉप्टरों को जमीनी बलों के साथ इंटीग्रेटेड फायर सपोर्ट ड्रिल में लगाया गया। दोनों सेनाओं की ऑब्जर्वेशन पोस्ट टीमों ने लक्ष्य पहचान, फायर ऑर्डर और फायर करेक्शन की संयुक्त प्रक्रिया पर काम किया।
अभ्यास का उद्देश्य
युद्ध अभ्यास 2004 से नियमित रूप से आयोजित हो रहा है। इस वर्ष का संस्करण इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स के इस्तेमाल, मल्टी-डोमेन ऑपरेशन, ड्रोन व ऑटोनॉमस सिस्टम तथा आधुनिक हथियार प्रणालियों के समन्वय पर केंद्रित था। अभ्यास का उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना, साझा सामरिक प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान करना और विभिन्न भूभागों में संयुक्त अभियान की क्षमता मजबूत करना रहा।
समापन के साथ दोनों पक्षों ने तीन सप्ताह के संयुक्त प्रशिक्षण को सफल बताया। इस दौरान आधुनिक सैन्य रणनीतियों के साथ स्वदेशी प्लेटफॉर्मों का भी व्यापक प्रदर्शन हुआ।



