सरकार को सिर्फ औपचारिक पक्षकार बनाने पर धारा 80 का नोटिस जरूरी नहीं- हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ संवाददाता
बिलासपुर, 29 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी सिविल मुकदमे में राज्य सरकार को केवल औपचारिक पक्षकार बनाया गया है और उसके खिलाफ कोई राहत नहीं मांगी गई है, तो सिर्फ धारा 80 सीपीसी के तहत नोटिस नहीं देने के आधार पर वादपत्र वापस नहीं किया जा सकता। जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने ओम बिल्डर्स एंड डेवलपर्स की याचिका मंजूर करते हुए निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया।
याचिकाकर्ता फर्म के साझेदार सुनील कुमार अग्रवाल ने खरसिया के जिला न्यायाधीश द्वारा 28 सितंबर 2026 को पारित आदेश को चुनौती दी थी। फर्म ने 22 अगस्त 2026 को निजी पक्षों के खिलाफ स्वामित्व की घोषणा, स्थायी निषेधाज्ञा और बकाया किराया वसूलने के लिए सिविल मुकदमा दायर किया था।
निचली अदालत ने राज्य सरकार को धारा 80 सीपीसी के तहत नोटिस नहीं दिए जाने का आधार बनाकर वादपत्र वापस कर दिया था।
हाईकोर्ट ने वादपत्र और संबंधित कानूनी प्रावधानों का परीक्षण करते हुए कहा कि धारा 80 के नोटिस का उद्देश्य सरकार को प्रस्तावित मुकदमे, आरोपों और मांगी गई राहत की जानकारी देना है, ताकि वह दावे पर विचार कर सके। लेकिन सरकार को केवल औपचारिक प्रतिवादी बनाने से मुकदमा अपने आप सरकार के खिलाफ नहीं हो जाता।
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया और मुकदमा दर्ज कर कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही करने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता को 4 नवंबर 2026 को निचली अदालत में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। राज्य की ओर से पैनल अधिवक्ता मलय जैन ने पैरवी की।


