यूपी विधानसभा चुनाव 2027: कांग्रेस के सामने अखिलेश यादव की 4 बड़ी शर्तें, सीट शेयरिंग पर सपा का नया प्लान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच गठबंधन तय माना जा रहा है, लेकिन सीट शेयरिंग का फॉर्मूला अभी तक पूरी तरह से सुलझ नहीं पाया है। दोनों दलों के नेताओं के बीच जारी बयानबाजी के बीच नई दिल्ली में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की अहम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सपा-कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक, समाजवादी पार्टी ने गठबंधन की बैठक में सीट बंटवारे को लेकर अपना रुख मजबूती से रखने की रणनीति बनाई है। बैठक में सपा, कांग्रेस से संभावित उम्मीदवारों के नामों के साथ-साथ उनकी पसंदीदा सीटों की सूची मांग सकती है। आगामी बैठक में सपा प्रमुख अखिलेश यादव स्वयं न जाकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भेज सकते हैं, जो कांग्रेस के सामने सीट शेयरिंग को लेकर सपा की रणनीति और मांगें रखेंगे।
कांग्रेस के सामने सपा की 4 अहम शर्तें
सपा प्रमुख अखिलेश यादव सीट शेयरिंग पर लगातार यह स्पष्ट करते आ रहे हैं कि गठबंधन में सीटों की संख्या नहीं, बल्कि ‘जीत’ सबसे अहम होगी। 2024 के लोकसभा चुनाव की तर्ज पर ही 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भी सपा ने कांग्रेस के सामने अपनी ये शर्तें रखी हैं:
- मजबूत प्रत्याशी का नाम: कांग्रेस को यूपी की जिन विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ना है, उन पर अपने संभावित और जिताऊ उम्मीदवारों के नाम स्पष्ट करने होंगे।
- सीटों की सूची: सपा का स्पष्ट कहना है कि कांग्रेस जिन विशिष्ट सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, उनकी सटीक सूची दे।
- क्षेत्रीय जनाधार: कांग्रेस जिन सीटों पर दावेदारी पेश कर रही है, वहां उसका वर्तमान जनाधार और राजनीतिक स्थिति क्या है, यह स्पष्ट करना होगा।
- जीत की संभावना: सपा की मांग है कि कांग्रेस उम्मीदवार की जीत की कितनी संभावना है, इसका व्यावहारिक आकलन किया जाए। अखिलेश यादव का मानना है कि सही प्रत्याशी के चयन से ही चुनावी नतीजे तय होते हैं।
‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में सपा की रणनीति
बैठक में समाजवादी पार्टी सीटों की दावेदारी के साथ-साथ कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों की जमीनी पकड़ का मुद्दा प्रमुखता से उठाएगी। सपा का मुख्य फोकस केवल सीटों की संख्या के बजाय प्रत्याशी की जीतने की क्षमता पर रहेगा। सपा का मानना है कि सिर्फ कागजी दावों या नेताओं की बयानबाजी के आधार पर सीटों की मांग करना गठबंधन के हित में नहीं है। पार्टी की ओर से यह बात स्पष्ट रखी जाएगी कि गठबंधन का मुख्य लक्ष्य हर हाल में चुनाव जीतना है।
2027 के चुनावी समीकरणों पर गहन मंथन
यूपी विधानसभा चुनाव में सीट शेयरिंग के दौरान उम्मीदवारों के क्षेत्रीय समीकरण और उनकी जीत की क्षमता को ही मुख्य आधार बनाया जाएगा। अखिलेश यादव का पूरा ध्यान 2027 के चुनाव पर केंद्रित है, क्योंकि यह चुनाव समाजवादी पार्टी के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि सपा नेतृत्व गठबंधन और सीट बंटवारे के मामले में किसी भी तरह की राजनीतिक ढील देने के मूड में नहीं है।



