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Smriti Mandhana New Captain: हरमनप्रीत कौर गईं, स्मृति मंधाना बनीं टीम इंडिया की नई कप्तान, बीसीसीआई ने किया ऐलान

 नई दिल्ली. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने हरमनप्रीत कौर के महिला टीम की कप्तानी से हटने के बाद उनकी जगह नया कैप्टन चुन लिया है. मंगलवार, 6 अक्टूबर को अचानक ही वर्ल्ड चैंपियन कप्तान ने अपने पद को छोड़ने की घोषणा कर सबको चौंका दिया. स्मृति मंधाना को भारतीय महिला क्रिकेट टीम का कप्तान बनाने की घोषणा की है.

टीम इंडिया स्टार ओपनर स्मृति मंधाना को टीम की कप्तानी की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. पिछले कुछ सालों से वो भारतीय टीम का अहम हिस्सा रही हैं. स्मृति ने तीनों ही फॉर्मेट में शानदार प्रदर्शन किया है. अनुभवी इंटरनेशनल क्रिकेटर के तौर पर दुनिया के तमाम लीग में खेल चुकी हैं. घरेलू क्रिकेट वूमन प्रीमियर लीग में अपनी कप्तानी की क्षमता दिखा चुकी हैं. स्मृति ने हाल ही में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 2024 और 2026 में विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) का खिताब जिताने में कप्तान के तौर पर अहम भूमिका निभाई. उनके नेतृत्व में RCB ने दोनों सीजन में शानदार प्रदर्शन करते हुए ट्रॉफी अपने नाम की.

2013 से भारतीय टीम का हिस्सा

स्मृति मंधाना ने साल 2013 से भारतीय टीम की तरफ से डेब्यू किया था. उनके पास इंटरनेशनल क्रिकेट का लंबा अनुभव है. अब वह टीम के एक नए दौर में कप्तानी की जिम्मेदारी संभालेंगी. अब स्मृति फुल-टाइम व्हाइट-बॉल कप्तान की भूमिका निभाएंगी, लेकिन वह इससे पहले भी भारतीय टीम की कप्तानी कर चुकी हैं. उन्होंने 18 T20I और 4 वनडे मैचों में भारत का नेतृत्व किया है.

कप्तानी मिलने पर क्या बोलीं स्मृति?

नई जिम्मेदारी मिलने के बाद स्मृति मंधाना ने इसे अपने लिए बेहद खास सम्मान बताया. उन्होंने कहा कि भारत की कप्तानी करना उनके लिए बहुत मायने रखता है और वह इस जिम्मेदारी को लेकर बेहद उत्साहित हैं.

स्मृति ने कहा, “भारत की कप्तानी की जिम्मेदारी मिलना एक बहुत ही खास सम्मान है. भारत का प्रतिनिधित्व करना मेरे लिए हमेशा से बहुत मायने रखता है. अब टीम की कप्तानी करने का मौका मिलना मेरे लिए बहुत कीमती है.”

उन्होंने आगे BCCI, चयनकर्ताओं, टीम की साथी खिलाड़ियों और अपने सफर में साथ देने वाले सभी लोगों का आभार जताया. स्मृति ने कहा कि वह उन सभी लोगों की आभारी हैं, जिन्होंने उन पर भरोसा जताया.

नवीन कुमार

झारखंड के परिवेश से जुड़े रहे हैं। पहाड़, जंगल और छोटे कस्बों की जिंदगी उन्होंने करीब से देखी है। परिवार में सादगी और मेहनत का मूल्य सिखाया गया। वे लोगों से मिलना, उनकी बात सुनना और स्थानीय मेलों-त्योहारों में शामिल होना पसंद करते हैं। उनकी पहचान सीधेपन और जमीन से जुड़े रहन-सहन से है।

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