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सोशल मीडिया में वायरल कविता का संघर्ष, 1600 मीटर की दौड़ 6 मिनट में पूरी कर बनी मिसाल।

विकास नंद/ सर्वव्यापी

सपनों को पूरा करने के लिए सुविधाओं की नहीं, बल्कि मजबूत हौसले और जुनून की जरूरत होती है। झारखंड के रामगढ़ में चल रही होमगार्ड भर्ती के दौरान कविता कुमारी ने अपने संघर्ष और जज्बे से हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आर्थिक तंगी के बीच कविता पारंपरिक साड़ी पहनकर और नंगे पांव ही शारीरिक दक्षता परीक्षा देने मैदान में उतरीं और 1600 मीटर की दौड़ महज 6 मिनट में पूरी कर दी।कविता के पास न तो ट्रैक सूट था और न ही दौड़ने के लिए जूते। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि इन सुविधाओं पर खर्च करना उनके लिए संभव नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने हालात के सामने घुटने नहीं टेके। तपती धूप और गर्म जमीन की परवाह किए बिना साड़ी में नंगे पांव दौड़ लगाकर उन्होंने अपने जज्बे की मिसाल पेश की।

पति की मौत के बाद दो बच्चों और सास-ससुर की जिम्मेदारी

कविता का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। उनके पति दीपक महतो गुजरात में काम करते थे, लेकिन बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। पति के इलाज के दौरान परिवार पर कर्ज भी चढ़ गया। पति के निधन के बाद दो छोटे बच्चों के साथ सास-ससुर की जिम्मेदारी भी कविता के कंधों पर आ गई।परिवार का पालन-पोषण करने के लिए कविता ईंट भट्ठे में मजदूरी करती हैं। दिनभर मजदूरी और घर की जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने होमगार्ड में भर्ती होने का सपना नहीं छोड़ा।

सुबह 4 बजे उठकर करती हैं तैयारी

कविता की दिनचर्या भी उनके संघर्ष की कहानी बयां करती है। वह सुबह करीब 4 बजे उठती हैं और होमगार्ड भर्ती की तैयारी के लिए दौड़ लगाती हैं। कई बार उन्हें नंगे पांव ही अभ्यास करते हुए देखा गया है। दौड़ की तैयारी के बाद घर का काम और फिर मजदूरी—इसी दिनचर्या के बीच वह अपने भविष्य की राह तैयार कर रही हैं।कविता का कहना है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अगर मन में लक्ष्य हो तो रास्ता निकाला जा सकता है। उनका सपना है कि होमगार्ड में चयनित होकर वह अपने बच्चों और परिवार का सहारा बनें।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ संघर्ष

कविता के नंगे पांव साड़ी पहनकर दौड़ लगाने का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद उनकी कहानी तेजी से लोगों तक पहुंची। उनकी मेहनत, संघर्ष और हिम्मत की लोग जमकर सराहना कर रहे हैं। सुविधाओं के अभाव के बावजूद लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत करने वाली कविता अब कई लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।कविता की कहानी यह संदेश देती है कि संसाधनों की कमी किसी इंसान के सपनों को रोक नहीं सकती, यदि हौसला मजबूत हो। नंगे पांव दौड़ती कविता ने साबित कर दिया कि मंजिल तक पहुंचने के लिए सबसे जरूरी चीज जूते नहीं, बल्कि मजबूत इरादा होता है।

राजेश कुमार

उत्तर भारत के एक छोटे शहर में पले-बढ़े। बचपन से ही लोगों की बातें सुनना और आसपास की ज़िंदगी को ध्यान से देखना उनकी आदत रही है। परिवार में सादगी और मेहनत को हमेशा महत्व दिया गया। खाली समय में किताबें पढ़ना, पुरानी डायरियाँ पलटना और सड़क किनारे चाय की दुकान पर बैठकर आम लोगों से बात करना उन्हें अच्छा लगता है। वे मानते हैं कि हर इंसान की अपनी एक कहानी होती है, बस उसे सुनने वाला कोई होना चाहिए।

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